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Bahraich News: कतर्नियाघाट जंगल में हाथियों पर ढोल-नगाड़े और पटाखे बेअसर

संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Mon, 23 Feb 2026 01:30 AM IST
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Drums and firecrackers have no effect on elephants in Katarniaghat forest.
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बहराइच/बिछिया। कतर्नियाघाट में विचरण कर रहे जंगली हाथियों पर अब ग्रामीणों के पारंपरिक उपाय बेअसर होते नजर आ रहे हैं। ढोल-नगाड़े बजाना, पटाखे छोड़ना, टीन पीटना और गोबर के कंडों में मिर्च जलाकर धुआं करना जैसे उपाय पहले कुछ समय तक कारगर रहे, लेकिन अब हाथी इनके अभ्यस्त हो चुके हैं। लगातार फसल के नुकसान और जानमाल की हानि के बीच विशेषज्ञ नई रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
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551 वर्ग किलोमीटर में फैले कतर्नियाघाट के कोर जोन में इस समय हाथियों का झुंड कई हिस्सों में बंटा हुआ है। एक दल आजमगढ़पुरवा, आंबा, फकीरपुरी, मटेही, तिगड़ा और मुखिया फार्म इलाके में सक्रिय है, जबकि दूसरा गुट गिरिजापुरी फार्म, बंधा रोड, त्रिलोकी गौढ़ी, रामपुर रेतिया, टिलवा, बगुलाहिया फार्म और बर्दिया इलाके में घूम रहा है।
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ये झुंड गेहूं व गन्ने की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाल के दिनों में हाथियों के हमले में दो ग्रामीणों की मौत भी हो चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगभग हर वर्ष एक से दो लोगों की जान हाथियों के हमलों में चली जाती है।

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क्यों बेअसर हो रहे पारंपरिक उपाय...
नेचर एनवायरमेंट एंड वाइल्डलाइफ सोसाइटी (न्यूज) के विशेषज्ञ सितांगशु दास का कहना है कि हाथी अत्यंत बुद्धिमान जीव होते हैं। यदि एक ही तरीका बार-बार अपनाया जाए, तो वे उसके आदी हो जाते हैं और डरना छोड़ देते हैं। यही कारण है कि ढोल-नगाड़े और पटाखों का असर अब कम हो गया है। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समन्वित कार्ययोजना बनानी होगी, ताकि मानव-हाथी संघर्ष को कम किया जा सके और जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



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तीन माह हाथियों के मस्त रहने का समय

दिसंबर से फरवरी तक ‘मस्त’ (उत्तेजना) का समय होता है, इस दौरान विशेषकर नर हाथियों से दूरी बनाए रखें। यदि हाथी कान खड़े कर सूंड ऊपर उठाकर आवाज करे, तो यह हमले का संकेत हो सकता है, तुरंत खुद को सुरक्षित करें।


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विशेषज्ञों की सलाह :

- हाथी सामने आ जाए तो सीधे न भागें, बल्कि तिरछी दिशा में हटें।

- अचानक सामना होने पर हाथी के लिए रास्ता छोड़ दें, पास जाने की कोशिश न करें।
- दौड़ते समय गमछा, पगड़ी या कपड़ा फेंकने से हाथी का ध्यान भटक सकता है।

- गांव में प्रवेश करने पर 8–10 लोग सुरक्षित दूरी बनाकर शोर कर सकते हैं, लेकिन बहुत नजदीक न जाएं।
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