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Bahraich News: सरकारी पुस्तकों को बेचने में चार गिरफ्तार

संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Mon, 23 Feb 2026 01:40 AM IST
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बहराइच। बेसिक शिक्षा विभाग की सरकारी किताबों के गबन और कबाड़ की दुकान पर बिक्री के मामले में थाना रामगांव पुलिस ने रविवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एक अन्य आरोपी की तलाश में दबिश जारी है। पुलिस ने 13,082 सरकारी पुस्तकें बरामद करने का दावा किया है। पकड़े गए आरोपियों में बेसिक शिक्षा विभाग का चपरासी और कबाड़ी भी शामिल है।
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अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि 17 फरवरी 2026 को जिला समन्वयक आशुतोष सिंह की तहरीर पर थाना रामगांव में सरकारी पुस्तकों को कबाड़ी दिलशाद की दुकान पर बेचने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले के खुलासे के लिए तीन विशेष टीमें गठित की गई थीं।
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एएसपी ने बताया कि टीमों ने शहर के अलग-अलग स्थानों से बीएसए कार्यालय में तैनात अनुचर दरगाह बख्शीपुरा निवासी आलोक मिश्रा, नाजिरपुरा बाईपास निवासी कबाड़ी दिलशाद अली, शिव नगर निवासी शुभांकर गुप्ता और चांदपुरा निवासी अर्जुन को गिरफ्तार किया गया। एक अन्य आरोपी समीर अहमद की तलाश जारी है।

पकड़े गए लोगों के कब्जे से 13,082 सरकारी पुस्तकें और दो गैस सिलिंडर बरामद हुए हैं। रामगांव थानाध्यक्ष गुरुसेन सिंह ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि बीएसए कार्यालय में पुस्तकों के रख-रखाव की जिम्मेदारी संभाल रहे अनुचर आलोक मिश्रा ने धनलाभ के उद्देश्य से अपने साथियों के साथ मिलकर स्टॉक से सरकारी पुस्तकों का गबन कर बेच दिया।


इस खुलासे के बाद पुलिस और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इस पूरे प्रकरण में और नाम सामने आते हैं।



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ब्लैकमेलिंग का भी आरोप
पुलिस का यह भी दावा है कि कबाड़ी की दुकान पर सरकारी किताबें मिलने का वीडियो वायरल करने की धमकी देकर तीन लोगों ने आरोपी से धनउगाही की। इस एंगल पर भी जांच जारी है और साक्ष्य मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।


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...तो कौन देगा इन सवालों का जवाब:

- क्या एक अनुचर अकेले इतना बड़ा खेल कर सकता है कि एक ट्रक सरकारी किताबें कबाड़ की दुकान तक पहुंच जाएं।

- वायरल वीडियो में दिख रहीं पुस्तकों की वास्तविक कीमत क्या सचमुच केवल 13,082 रुपये है।
- इतने बड़े विभागीय घोटाले के उजागर होने के बाद क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहेगी या किसी बड़े अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी।
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