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Bahraich News: दो गांवों में कटान, नदी में समाई चार बीघा जमीन
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महसी के मांझा गांव में कटान कर रही सरयू नदी।
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बहराइच। खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बाद सरयू नदी का जलस्तर अब फिर घटने लगा है, लेकिन जलस्तर में कमी के साथ नदी की धार तेज होने से तटवर्ती इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है। शुक्रवार को माझा क्षेत्र में कटान शुरू हो गई। लोनियनपुरवा और गोलागंज कोठार गांव के पास करीब चार बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा गई। इससे नदी किनारे बसे ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
शुक्रवार शाम चार बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 105.86 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.07 मीटर से 21 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि, नदी में अभी 2,28,292 क्यूसेक पानी का बहाव बना हुआ है। जलस्तर घटने के बावजूद तेज धारा के कारण कटान का खतरा बना हुआ है।
माझा क्षेत्र के लोनियनपुरवा और गोलागंज कोठार के निकट नदी की तेज धार ने खेती योग्य जमीन को काटना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार को करीब चार बीघा जमीन नदी में समा गई। कटान की रफ्तार बढ़ने पर खेतों के साथ नदी किनारे स्थित आबादी पर भी खतरा बढ़ सकता है।
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लोनियनपुरवा निवासी रामनरेश ने बताया कि नदी का पानी कम होने लगा है, लेकिन धार काफी तेज हो गई है। शुक्रवार को देखते ही देखते खेत का बड़ा हिस्सा नदी में चला गया। उन्होंने कहा कि इसी तरह कटान जारी रहा तो खेती की जमीन बचाना मुश्किल होगा।
गोलागंज कोठार निवासी मुंशीलाल ने बताया कि जलस्तर घटने से बाढ़ का खतरा कुछ कम हुआ है, लेकिन अब कटान की चिंता सताने लगी है। नदी किनारे खेत होने के कारण हर साल कटान में जमीन का नुकसान होता है। इस बार भी चार बीघा के आसपास जमीन नदी में समा गई है।
बाढ़ खंड के उपखंड अधिकारी नंदू प्रसाद ने बताया कि विभिन्न बैराजों से सरयू नदी में करीब 2.28 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों के ग्रामीणों को सतर्क किया गया है। राजस्वकर्मी भी लगातार प्रभावित और तटवर्ती गांवों में भ्रमण कर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
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शुक्रवार शाम चार बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 105.86 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.07 मीटर से 21 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि, नदी में अभी 2,28,292 क्यूसेक पानी का बहाव बना हुआ है। जलस्तर घटने के बावजूद तेज धारा के कारण कटान का खतरा बना हुआ है।
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माझा क्षेत्र के लोनियनपुरवा और गोलागंज कोठार के निकट नदी की तेज धार ने खेती योग्य जमीन को काटना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार को करीब चार बीघा जमीन नदी में समा गई। कटान की रफ्तार बढ़ने पर खेतों के साथ नदी किनारे स्थित आबादी पर भी खतरा बढ़ सकता है।
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लोनियनपुरवा निवासी रामनरेश ने बताया कि नदी का पानी कम होने लगा है, लेकिन धार काफी तेज हो गई है। शुक्रवार को देखते ही देखते खेत का बड़ा हिस्सा नदी में चला गया। उन्होंने कहा कि इसी तरह कटान जारी रहा तो खेती की जमीन बचाना मुश्किल होगा।
गोलागंज कोठार निवासी मुंशीलाल ने बताया कि जलस्तर घटने से बाढ़ का खतरा कुछ कम हुआ है, लेकिन अब कटान की चिंता सताने लगी है। नदी किनारे खेत होने के कारण हर साल कटान में जमीन का नुकसान होता है। इस बार भी चार बीघा के आसपास जमीन नदी में समा गई है।
बाढ़ खंड के उपखंड अधिकारी नंदू प्रसाद ने बताया कि विभिन्न बैराजों से सरयू नदी में करीब 2.28 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों के ग्रामीणों को सतर्क किया गया है। राजस्वकर्मी भी लगातार प्रभावित और तटवर्ती गांवों में भ्रमण कर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।