बहराइच। जिले में जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह प्रयास उत्तर प्रदेश कृषि विविधीकरण सहायता परियोजना (यूपी-डास) के तहत हो रहा है। इसके अंतर्गत यूपी एग्रीज परियोजना डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक से धान की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। तेजवापुर और फखरपुर विकास खंड के गांवों में फील्ड लेवल डेमोंस्ट्रेशन (एफएलडी) स्थापित किए गए हैं। यहां किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिल रहा है।
खम्हरिया शुक्ल, गजपतिपुर, रामगांव और टेड़वा बसंतपुर गांवों में प्रदर्शनों का विशेषज्ञों ने निरीक्षण किया। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. आरके मलिक ने इसमें भाग लिया। एसोसिएट साइंटिस्ट डॉ. धीरज तिवारी और क्लस्टर कोऑर्डिनेटर डॉ. विपिन कुमार भी मौजूद थे। परियोजना वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार शर्मा और जूनियर रिसर्च टेक्नीशियन राघवेंद्र ने भी किसानों से संवाद किया। विशेषज्ञों ने डीएसआर तकनीक की बारीकियां समझाईं। डॉ. मलिक ने खरपतवार नियंत्रण को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने समय पर खरपतवारनाशी, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, उचित बीज दर और नियमित निगरानी से बेहतर उत्पादन की बात कही। विशेषज्ञों के अनुसार, डीएसआर तकनीक से कम पानी, कम श्रम और कम लागत में खेती संभव है।