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Bahraich News: देवनपुरवा गांव में पिंजरे में कैद हुई मादा तेंदुआ
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ककरहा रेंज के देवनपुरवा गांव में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद मादा तेंदुआ।
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मिहींपुरवा (बहराइच)। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग की ककरहा रेंज अंतर्गत देवनपुरवा गांव में कई दिनों से दहशत का कारण बनी मादा तेंदुआ शुक्रवार तड़के वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरे में कैद हो गई। उसके पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वन विभाग के अनुसार, मादा तेंदुआ की उम्र दो से तीन वर्ष के बीच है। स्वास्थ्य परीक्षण में वह पूरी तरह स्वस्थ मिली है।
देवनपुरवा गांव के आसपास पिछले कई दिनों से तेंदुए की लगातार चहलकदमी देखी जा रही थी। इस दौरान उसने कई बकरियों और मवेशियों का शिकार किया था। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल था और लोगों ने खेतों व जंगल की ओर अकेले जाना भी कम कर दिया था। मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने पिंजरा लगाया था।
शुक्रवार सुबह करीब चार बजे मादा तेंदुआ शिकार देख पिंजरे के भीतर पहुंची और कैद हो गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सतर्कता के साथ रेस्क्यू की कार्रवाई पूरी की। पशु चिकित्सक ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें वह स्वस्थ पाई गई।
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कतर्नियाघाट के डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और विभागीय मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार मादा तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से वन्यजीव दिखाई देने पर उसके पास न जाने और तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की है।
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देवनपुरवा गांव के आसपास पिछले कई दिनों से तेंदुए की लगातार चहलकदमी देखी जा रही थी। इस दौरान उसने कई बकरियों और मवेशियों का शिकार किया था। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल था और लोगों ने खेतों व जंगल की ओर अकेले जाना भी कम कर दिया था। मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने पिंजरा लगाया था।
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शुक्रवार सुबह करीब चार बजे मादा तेंदुआ शिकार देख पिंजरे के भीतर पहुंची और कैद हो गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सतर्कता के साथ रेस्क्यू की कार्रवाई पूरी की। पशु चिकित्सक ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें वह स्वस्थ पाई गई।
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कतर्नियाघाट के डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और विभागीय मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार मादा तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से वन्यजीव दिखाई देने पर उसके पास न जाने और तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की है।