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Bahraich News: कटान के मुहाने पर पिपरी का ऐतिहासिक किला, बुनियाद पर ठोकरें मार रहा खतरा

Thu, 30 Jul 2026 12:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 12:07 AM IST
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Pipri's historic fort stands at the edge of erosion; its very foundation is under threat.
महसी के पिपरी में सरयू नदी की कटान में कट रहा एैतिहासिक किला।
बहराइच। सरयू नदी का जलस्तर लगातार घटकर खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है, लेकिन इससे राहत मिलने के बजाय तटवर्ती गांवों में कटान का संकट गहरा गया है। महसी इलाके में स्थित ऐतिहासिक पिपरी का किला भी तेज कटान के मुहाने पर पहुंच गया है। वहीं मांझा, लोनियनपुरवा, तुरंतीपुरवा और आसपास के गांवों के किसानों की उपजाऊ जमीन तेजी से नदी में समा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल कटान की समस्या झेल रहे हैं, फिर भी इससे बचाव के स्थायी उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
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बाढ़ विभाग के अनुसार नदी का जलस्तर भले ही घटा है, लेकिन नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बुधवार को सरयू में करीब 1.88 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों में बारिश जारी रही तो जलस्तर में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इस समय नदी की लहरें पिपरी किले की दीवारों पर थपेड़े ले रही हैं, इसके चलते किले के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। अभी तक इस किले की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
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गांव निवासी जगदंबा और इतवारी ने कहा कि जलस्तर उतरते ही खेतों के साथ अब ऐतिहासिक धरोहर पिपरी का किला भी खतरे की जद में आ गया है। प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने का दावा किया है, जबकि ग्रामीण तत्काल कटानरोधी कार्य शुरू कराने की जरूरत बता रहे हैं। उधर इस मामले में उपजिलाधिकारी प्रकाश सिंह का कहना है कि कटान निरोधक कार्य के लिए बाढ़ खंड के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। राजस्व टीम लगातार प्रभावित इलाकों में भ्रमण कर रही है।
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1857 की क्रांति के बाद हुआ था किले का निर्माण
महसी तहसील के बौंडी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक पिपरी किला केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की यादों को संजोए एक अमूल्य धरोहर है। इस किले का निर्माण वर्ष 1867 में पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के पौत्र राजा जगज्योति सिंह ने कराया था। वर्ष 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों द्वारा रियासतों के पुनर्गठन के दौरान पिपरी रियासत के 33 गांव रणजीत सिंह के वंशजों को मिले थे। बाद में राजा जगज्योति सिंह ने यहां इस भव्य किले का निर्माण कराया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह किला क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकों और रणनीति बनाने का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। कहा जाता है कि अंग्रेजी शासन के खिलाफ कई योजनाएं इसी किले में तैयार की गईं और देशभक्तों का यहां लगातार जमावड़ा लगा रहता था। समय के साथ प्रशासनिक उपेक्षा और सरयू (घाघरा) नदी के लगातार कटान ने इस ऐतिहासिक धरोहर को खंडहर में बदल दिया।

बुधवार को जलस्तर की स्थिति
बैराज/स्थान जलस्तर
खतरे का निशान
पानी छोड़ा गया

शारदा बैराज 134.70 मी. 135.49 मी. 68,147 क्यूसेक
गिरिजापुरी बैराज 135.05 मी. 136.78 मी. 1,17,776 क्यूसेक

सरयू बैराज 129.60 मी. 133.50 मी. 2,168 क्यूसेक
-------
तीनों बैराजों से नदी में छोड़ा गया कुल पानी : 1,88,091 क्यूसेक।

एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 105.61 मीटर, खतरे का निशान 106.07 मीटर।
घूरदेवी स्थान पर नदी का जलस्तर 111.36 मीटर, खतरे का निशान 112.150 मीटर।
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