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Bahraich News: संजय सेतु बंद, दो माह पीपा पुल से आवागमन
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जरवलरोड स्थित सरयू नदी पर बृहस्पतिवार से संजय सेतु पर शुरू मरम्मत का कार्य।
- फोटो : जरवलरोड स्थित सरयू नदी पर बृहस्पतिवार से संजय सेतु पर शुरू मरम्मत का कार्य।
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जरवलरोड। सरयू (घाघरा) नदी पर बने करीब 44 वर्ष पुराने संजय सेतु को बृहस्पतिवार से दो माह के लिए बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बनाए गए पीपा पुल से आवागमन शुरू कर दिया गया है। अगले दो महीनों तक यही अस्थायी पुल बहराइच, श्रावस्ती और गोंडा जिले के लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा बना रहेगा।
बृहस्पतिवार दोपहर करीब 12 बजे जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, एसडीएम कैसरगंज, क्षेत्राधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में पीपा पुल का परीक्षण किया गया। परीक्षण सफल रहने के बाद कार, जीप, बाइक और एम्बुलेंस जैसे छोटे वाहनों को आवाजाही की अनुमति दे दी गई, जबकि ट्रक, बस और अन्य व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
उधर, पीपा पुल चालू होते ही जेसीबी मशीनों की मदद से संजय सेतु पर डामर उखाड़कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया। पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे कोई भी वाहन या व्यक्ति सीधे पुल से न गुजर सके।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि पीपा पुल पर हर दिन बदलते जलस्तर और मौसम के अनुसार व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस, राजस्व, परिवहन, स्वास्थ्य और सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है।
पुल बंद होते ही दिखा असर
पुल बंद होने के कारण कई यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। निजी बसों से सफर कर रहे लोग जब पुल के पास पहुंचे तो उन्हें बीच रास्ते में ही उतार दिया गया। चिलचिलाती धूप में महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे पैदल पीपा पुल पार करते नजर आए। गोंडा से बाराबंकी जा रही सुनीता देवी ने बताया कि बस को पुल से पहले ही रोक दिया गया, जिससे उन्हें बच्चों के साथ पैदल चलना पड़ा। वहीं यात्री रामसुंदर ने कहा कि उन्हें जरूरी काम से जाना था, लेकिन अब पहले पैदल पुल पार करना और फिर दूसरे छोर पर वाहन ढूंढना मजबूरी हो गई है। मोहम्मद आरिफ ने बताया कि अगर पहले जानकारी मिल जाती तो वे वैकल्पिक रास्ता चुनते।
यात्रियों की सुविधा के लिए 12 शटल बसें चलेंगी
संजय सेतु बंद होने के बाद रोडवेज विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। यातायात निरीक्षक राम प्रकाश यादव ने बताया कि बहराइच से जरवल रोड होते हुए घाघरा घाट तक चार शटल बसें चलाई जाएंगी। वहीं, लखनऊ से घाघराघाट तक भी चार बसों का संचालन होगा। इसके अलावा लखीमपुर खीरी डिपो की चार बसें भी इस रूट पर संचालित की जाएंगी। इन बसों के चालक और परिचालकों की ड्यूटी भी निर्धारित कर दी गई है, ताकि सेवा नियमित रूप से जारी रह सके।
लखीमपुर खीरी से भी बढ़ाई गई बस सेवा
लखीमपुर खीरी से जरवल रोड तक चार अतिरिक्त बसों के संचालन की व्यवस्था की गई है। इससे यात्रियों को लंबी दूरी तय करने में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
24 घंटे तैनात रहेंगे अधिकारी और कर्मचारी
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि पीपा पुल की निगरानी और सुचारू संचालन के लिए एसडीएम, सीओ, पीडब्ल्यूडी, बाढ़ खंड, एआरटीओ, स्वास्थ्य विभाग और पंचायत विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा नायब तहसीलदार, पुलिस कर्मी, जेई, रोडवेज कर्मी और चिकित्सा टीम भी मौके पर 24 घंटे तैनात रहेगी।
आपात स्थिति के लिए नाव और गोताखोर तैनात
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर दो नाव, नाविक और गोताखोरों की 8-8 घंटे की शिफ्ट में तैनाती की गई है। साथ ही तकनीकी टीम लगातार पीपा पुल की निगरानी कर रही है, ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
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बृहस्पतिवार दोपहर करीब 12 बजे जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, एसडीएम कैसरगंज, क्षेत्राधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में पीपा पुल का परीक्षण किया गया। परीक्षण सफल रहने के बाद कार, जीप, बाइक और एम्बुलेंस जैसे छोटे वाहनों को आवाजाही की अनुमति दे दी गई, जबकि ट्रक, बस और अन्य व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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उधर, पीपा पुल चालू होते ही जेसीबी मशीनों की मदद से संजय सेतु पर डामर उखाड़कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया। पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे कोई भी वाहन या व्यक्ति सीधे पुल से न गुजर सके।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि पीपा पुल पर हर दिन बदलते जलस्तर और मौसम के अनुसार व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस, राजस्व, परिवहन, स्वास्थ्य और सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है।
पुल बंद होते ही दिखा असर
पुल बंद होने के कारण कई यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। निजी बसों से सफर कर रहे लोग जब पुल के पास पहुंचे तो उन्हें बीच रास्ते में ही उतार दिया गया। चिलचिलाती धूप में महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे पैदल पीपा पुल पार करते नजर आए। गोंडा से बाराबंकी जा रही सुनीता देवी ने बताया कि बस को पुल से पहले ही रोक दिया गया, जिससे उन्हें बच्चों के साथ पैदल चलना पड़ा। वहीं यात्री रामसुंदर ने कहा कि उन्हें जरूरी काम से जाना था, लेकिन अब पहले पैदल पुल पार करना और फिर दूसरे छोर पर वाहन ढूंढना मजबूरी हो गई है। मोहम्मद आरिफ ने बताया कि अगर पहले जानकारी मिल जाती तो वे वैकल्पिक रास्ता चुनते।
यात्रियों की सुविधा के लिए 12 शटल बसें चलेंगी
संजय सेतु बंद होने के बाद रोडवेज विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। यातायात निरीक्षक राम प्रकाश यादव ने बताया कि बहराइच से जरवल रोड होते हुए घाघरा घाट तक चार शटल बसें चलाई जाएंगी। वहीं, लखनऊ से घाघराघाट तक भी चार बसों का संचालन होगा। इसके अलावा लखीमपुर खीरी डिपो की चार बसें भी इस रूट पर संचालित की जाएंगी। इन बसों के चालक और परिचालकों की ड्यूटी भी निर्धारित कर दी गई है, ताकि सेवा नियमित रूप से जारी रह सके।
लखीमपुर खीरी से भी बढ़ाई गई बस सेवा
लखीमपुर खीरी से जरवल रोड तक चार अतिरिक्त बसों के संचालन की व्यवस्था की गई है। इससे यात्रियों को लंबी दूरी तय करने में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
24 घंटे तैनात रहेंगे अधिकारी और कर्मचारी
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि पीपा पुल की निगरानी और सुचारू संचालन के लिए एसडीएम, सीओ, पीडब्ल्यूडी, बाढ़ खंड, एआरटीओ, स्वास्थ्य विभाग और पंचायत विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा नायब तहसीलदार, पुलिस कर्मी, जेई, रोडवेज कर्मी और चिकित्सा टीम भी मौके पर 24 घंटे तैनात रहेगी।
आपात स्थिति के लिए नाव और गोताखोर तैनात
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर दो नाव, नाविक और गोताखोरों की 8-8 घंटे की शिफ्ट में तैनाती की गई है। साथ ही तकनीकी टीम लगातार पीपा पुल की निगरानी कर रही है, ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
