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Bahraich News: अभियोजन अधिकारियों और शासकीय अधिवक्ताओं के भरे जाएंगे रिक्त पद
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बहराइच। प्रदेश में अभियोजन अधिकारियों और शासकीय अधिवक्ताओं के लगभग 50 फीसदी पद रिक्त हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए शासन से वार्ता कर जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह बातें बुधवार को अभियोजन कार्यालय में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश के निदेशक अभियोजन ललित मुदगल ने कहीं।
निदेशक अभियोजन ने कहा कि पीड़ितों को त्वरित न्याय मिले। इसके लिए पुराने कानूनों में संशोधन कर बीएनएस, बीएनएसएस व साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानून लागू किए गए हैं। पहले मुकदमों में गवाह अपनी सुरक्षा को लेकर संशय में रहते थे, जिसके कारण समय पर उनकी गवाही नहीं हो पाती थी। साक्ष्यों और गवाहों के अभाव में मुकदमों का शीघ्र निस्तारण भी संभव नहीं हो पाता था।
इस समस्या के समाधान के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था लागू की गई है। नए कानून लागू होने के बाद प्रदेश में नवीन अपराधों में छह मामलों में मृत्युदंड, 35 में आजीवन कारावास, 36 मामलों में दस वर्ष या उससे अधिक की सजा तथा 1174 मामलों में दस वर्ष या उससे कम की सजा दिलाई जा चुकी है। वहीं 74,701 मामलों में जुर्माने के माध्यम से अभियुक्तों को दंडित किया गया है।
प्रदेश में अभियोजन अधिकारियों और शासकीय अधिवक्ताओं की कमी पर उन्होंने स्वीकार किया कि लगभग 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि इन रिक्तियों को भरने के लिए शासन से वार्ता कर जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान अपर निदेशक अभियोजन देवीपाटन मंडल विजय शंकर मिश्रा, संयुक्त निदेशक अभियोजन कंदरपेश द्विवेदी, अभियोजन अधिकारी निर्मल यादव, बृजेश तिवारी, आकाश अरुण, नीरज पांडेय, प्रमोद पटेल, देवेशचंद्र त्रिपाठी, शासकीय अधिवक्ता गिरीश शुक्ला तथा विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) संतप्रताप सिंह मौजूद रहे।
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निदेशक अभियोजन ने कहा कि पीड़ितों को त्वरित न्याय मिले। इसके लिए पुराने कानूनों में संशोधन कर बीएनएस, बीएनएसएस व साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानून लागू किए गए हैं। पहले मुकदमों में गवाह अपनी सुरक्षा को लेकर संशय में रहते थे, जिसके कारण समय पर उनकी गवाही नहीं हो पाती थी। साक्ष्यों और गवाहों के अभाव में मुकदमों का शीघ्र निस्तारण भी संभव नहीं हो पाता था।
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इस समस्या के समाधान के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था लागू की गई है। नए कानून लागू होने के बाद प्रदेश में नवीन अपराधों में छह मामलों में मृत्युदंड, 35 में आजीवन कारावास, 36 मामलों में दस वर्ष या उससे अधिक की सजा तथा 1174 मामलों में दस वर्ष या उससे कम की सजा दिलाई जा चुकी है। वहीं 74,701 मामलों में जुर्माने के माध्यम से अभियुक्तों को दंडित किया गया है।
प्रदेश में अभियोजन अधिकारियों और शासकीय अधिवक्ताओं की कमी पर उन्होंने स्वीकार किया कि लगभग 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि इन रिक्तियों को भरने के लिए शासन से वार्ता कर जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान अपर निदेशक अभियोजन देवीपाटन मंडल विजय शंकर मिश्रा, संयुक्त निदेशक अभियोजन कंदरपेश द्विवेदी, अभियोजन अधिकारी निर्मल यादव, बृजेश तिवारी, आकाश अरुण, नीरज पांडेय, प्रमोद पटेल, देवेशचंद्र त्रिपाठी, शासकीय अधिवक्ता गिरीश शुक्ला तथा विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) संतप्रताप सिंह मौजूद रहे।

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