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Ballia News: एफआईआर से नाम हटाने के लिए 22 हजार रुपये घूस लेने का आरोप
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भीमपुरा। मारपीट के मामले में दर्ज एफआईआर से विवेचना के दौरान नाम हटाने के एवज में 22 हजार रुपये घूस लेने का मामला सामने आया है। मामला भीमपुरा थाने से जुड़ा है।
वायरल वीडियो में मधुकीपुर दिलमन निवासी सीताराम चौहान ने थाने पर तैनात एक उपनिरीक्षक व एक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो में सीताराम चौहान थाना परिसर के सामने आरोप लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं कि 22 जुलाई को रास्ते के विवाद को लेकर हुई मारपीट की घटना में वह शामिल नहीं थे, इसके बावजूद विपक्षी की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में नाम दर्ज करवाया गया। प्राथमिकी के संबंध में थाने जाने के दौरान उनकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई। आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने विवेचना के दौरान नाम हटवाने के लिए 30 से 35 हजार रुपये खर्च होने की बात कही।
सीताराम के मुताबिक, उन्होंने पहली बार सात हजार और दूसरी बार 15 हजार रुपये दिए। दोनों बार उक्त व्यक्ति ने उनके सामने ही थाने पर तैनात उपनिरीक्षक को रुपये दिए। बाद में और रुपये की मांग की गई, लेकिन उन्होंने असमर्थता जताते हुए रुपये देने से इन्कार कर दिया।
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थानाध्यक्ष रंजीत विश्वकर्मा ने उपनिरीक्षक पर रुपये लेने के आरोप को निराधार बताया। बताया कि 22 जुलाई को रास्ते के विवाद को लेकर हुई मारपीट के मामले में सुधा चौहान की तहरीर पर तीन महिलाओं समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की विवेचना चल रही है। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी और जांच में तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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वायरल वीडियो में मधुकीपुर दिलमन निवासी सीताराम चौहान ने थाने पर तैनात एक उपनिरीक्षक व एक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो में सीताराम चौहान थाना परिसर के सामने आरोप लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं कि 22 जुलाई को रास्ते के विवाद को लेकर हुई मारपीट की घटना में वह शामिल नहीं थे, इसके बावजूद विपक्षी की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में नाम दर्ज करवाया गया। प्राथमिकी के संबंध में थाने जाने के दौरान उनकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई। आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने विवेचना के दौरान नाम हटवाने के लिए 30 से 35 हजार रुपये खर्च होने की बात कही।
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सीताराम के मुताबिक, उन्होंने पहली बार सात हजार और दूसरी बार 15 हजार रुपये दिए। दोनों बार उक्त व्यक्ति ने उनके सामने ही थाने पर तैनात उपनिरीक्षक को रुपये दिए। बाद में और रुपये की मांग की गई, लेकिन उन्होंने असमर्थता जताते हुए रुपये देने से इन्कार कर दिया।
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थानाध्यक्ष रंजीत विश्वकर्मा ने उपनिरीक्षक पर रुपये लेने के आरोप को निराधार बताया। बताया कि 22 जुलाई को रास्ते के विवाद को लेकर हुई मारपीट के मामले में सुधा चौहान की तहरीर पर तीन महिलाओं समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की विवेचना चल रही है। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी और जांच में तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।