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Ballia News: 45 वर्षों से चकबंदी अधूरी, 5 हजार से ज्यादा किसानों की नहीं बनी फार्मर आईडी
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पूर। जनपद की सबसे बड़ी राजस्व ग्राम पंचायत पूर में 45 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया लंबित है। इससे ग्रामीणों और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। पांच हजार से ज्यादा किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान के सचिव भानु प्रकाश सिंह बबलू ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रतिवेदन भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। इसमें उन्होंने बताया है कि पूर वर्ष 1982 से चकबंदी चल रही है, फिर भी अधूरी है। वर्ष 2014 में धारा-23 और धारा-24 का प्रकाशन हो चुका है, लेकिन धारा-52 का प्रकाशन अब तक नहीं होने से हजारों खातेदारों, चकदारों और किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
चकबंदी से संबंधित कई महत्वपूर्ण अभिलेख, जिनमें जोत-चक-पड़ताल पत्र संख्या-04 एवं 11 की जिल्दें शामिल हैं, उपलब्ध नहीं हैं। वहीं बंदोबस्त कार्य नक्शा, तकसीमी भू-चित्र तथा अन्य अभिलेख या तो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं या अनुपलब्ध बताए जा रहे हैं।
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उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उपलब्ध एवं अनुपलब्ध अभिलेखों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, गायब दस्तावेजों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए तथा सभी अभिलेखों का डिजिटलीकरण कराया जाए।
उनका कहना है कि रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध न होने के कारण ग्राम पूर के पांच हजार से अधिक किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है, जिससे वे केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।
लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण, अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती, अभिलेखों की सुरक्षा आदि मांग की मांग की है। साथ ही 30 दिनों के भीतर जांच कर कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान के सचिव भानु प्रकाश सिंह बबलू ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रतिवेदन भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। इसमें उन्होंने बताया है कि पूर वर्ष 1982 से चकबंदी चल रही है, फिर भी अधूरी है। वर्ष 2014 में धारा-23 और धारा-24 का प्रकाशन हो चुका है, लेकिन धारा-52 का प्रकाशन अब तक नहीं होने से हजारों खातेदारों, चकदारों और किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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चकबंदी से संबंधित कई महत्वपूर्ण अभिलेख, जिनमें जोत-चक-पड़ताल पत्र संख्या-04 एवं 11 की जिल्दें शामिल हैं, उपलब्ध नहीं हैं। वहीं बंदोबस्त कार्य नक्शा, तकसीमी भू-चित्र तथा अन्य अभिलेख या तो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं या अनुपलब्ध बताए जा रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उपलब्ध एवं अनुपलब्ध अभिलेखों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, गायब दस्तावेजों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए तथा सभी अभिलेखों का डिजिटलीकरण कराया जाए।
उनका कहना है कि रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध न होने के कारण ग्राम पूर के पांच हजार से अधिक किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है, जिससे वे केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।
लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण, अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती, अभिलेखों की सुरक्षा आदि मांग की मांग की है। साथ ही 30 दिनों के भीतर जांच कर कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।