Umashankar Singh: राजनीति में हमेशा दिखाते रहे दम, सांसद सनातन पांडेय को भी दी थी पटखनी; पढ़ें रोचक कहानी
Ballia News: विधायक उमाशंकर सिंह का पार्थिव शरीर ज्यों ही सैकड़ों गाड़ियों के साथ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से परजीपार के पास कासिमाबाद रोड पर पहुंची अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग हाथों में माला लेकर खडे थे। परजीपार से लेकर सिधारघाट तक कतारबद्ध होकर लोग खड़े थे।
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Umashankar Singh Passed Away: बसपा विधायक उमाशंकर सिंह विकास कार्यों, मजबूत जनसंपर्क और राजनीतिक सूझबूझ के लिए जाने जाते हैं। क्षेत्र में उनकी छवि एक सक्रिय और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि की रही है। उन्होंने रसड़ा विधानसभा चुनाव में बलिया लोकसभा से सपा सांसद सनातन पांडेय को भी पराजित कर अपनी राजनीतिक ताकत का परिचय दिया था। उमाशंकर सिंह हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखते रहे हैं। राजनीतिक विरोधियों ने कई बार उन्हें चुनौती देने और पीछे छोड़ने की कोशिश की, लेकिन अपनी रणनीति, संगठन क्षमता और जनाधार के दम पर वह लगातार सफलता हासिल करते रहे।
वर्ष 2012 : प्रदेश विधानसभा चुनाव में रसड़ा सीट से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार उमाशंकर सिंह ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सनातन पांडेय को 52,825 मतों के अंतर से हराया था। उमाशंकर सिंह को 84,436 वोट और उपविजेता सनातन पांडेय को 31,611 वोट मिले। जीत का अंतर 52,825 रहा।
वर्ष 2017 : के चुनाव में जब भाजपा की लहर चल रही थी, तब भी बसपा के उमाशंकर सिंह ने ही जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी रामइबाल सिंह को 33 हजार मतों से हराया।
वर्ष 2022 : प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार उमाशंकर सिंह ने रसड़ा सीट पर सुभासपा-सपा गठबंधन के प्रत्याशी महेंद्र चौहान को 6,583 मतों के अंतर से हराया था। उमाशंकर सिंह को 87,887 वोट और उपविजेता महेंद्र को 81,304 वोट मिले थे। उमाशंकर सिंह की यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक थी क्योंकि वर्ष 2022 के चुनाव में वह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उत्तर प्रदेश में जीतने वाले एकमात्र विधायक बने थे।
अपने दम पर 25 वर्ष नपा रसड़ा के किले को किया था ध्वस्त रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। रसड़ा नगर पालिका परिषद में पच्चीस वर्ष तक लगातार चेयरमैन रहे वशिष्ठ नारायण सोनी को पराजित कर नगर में पहली बार बसपा का प्रत्याशी जिताया।
अपने बलबूते रसड़ा में दो बार लगातार ब्लाक प्रमुख भी बनाए तथा अपने लगातार तीन बार विधायक बने। बसपा से प्रदेश में इकलौता विधायक बन कर बसपा का लाज बचाई। अनेक परेशानी एवं बाधा के बावजूद उन्होंने सफलता की सीढ़ी पर आगे बढ़ते रहे। एक व्यक्ति द्वारा दो पदों पर लाभ लेने के मामले में उनकी विधायकी पर तलवार भी लटकी थी लेकिन पुनः विधान सभा की बहाली हुई।