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Balrampur News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी से 793 ग्राम पंचायतों में बढ़ी हलचल
Fri, 26 Jun 2026 10:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 26 Jun 2026 10:53 PM IST
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बलरामपुर। पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी का असर जिले में दिखाई देने लगा है। जिले की 793 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति के बाद आए इस आदेश के बाद पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच चुनाव की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं प्रशासकों की नियुक्ति पर रोक की संभावनाओं से विकास कार्यों पर असर दिखने की आशंका बढ़ गई है।
वर्तमान में ग्राम पंचायतों का संचालन प्रशासकों के माध्यम से किया जा रहा है। सेवानिवृत्त एडीपीआरओ जेएल शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट ने चुनाव टालने के लिए जारी शासनादेश को प्रथम दृष्टया असंवैधानिक प्रावधान पर आधारित बताते हुए सरकार से चुनाव की स्पष्ट समय सीमा मांगी है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अदालत में कहा है कि मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है। ऐसे में जिले में भी पंचायत चुनाव की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बढ़ गई है। वहीं राजनीतिक विश्लेषक प्रो. एसके मिश्र ने कहा कि सरकार को अब कोई ठोस कदम उठाना होगा। वैसे चुनाव कराने के लिए सरकार के पास पर्याप्त समय है। अखिल भारतीय पंचायत परिषद के जिलाध्यक्ष गुलजारी लाल शुक्ल ने कहा कि पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का होना लोकतंत्र की मूल भावना है। सरकार को बिना अनावश्यक विलंब के पंचायत चुनाव कराकर ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों की वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि विकास योजनाओं के संचालन और स्थानीय समस्याओं के समाधान में तेजी आ सके। एडीपीआरओ अशोक सचान ने पूरे मामले में कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
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वर्तमान में ग्राम पंचायतों का संचालन प्रशासकों के माध्यम से किया जा रहा है। सेवानिवृत्त एडीपीआरओ जेएल शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट ने चुनाव टालने के लिए जारी शासनादेश को प्रथम दृष्टया असंवैधानिक प्रावधान पर आधारित बताते हुए सरकार से चुनाव की स्पष्ट समय सीमा मांगी है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अदालत में कहा है कि मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है। ऐसे में जिले में भी पंचायत चुनाव की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बढ़ गई है। वहीं राजनीतिक विश्लेषक प्रो. एसके मिश्र ने कहा कि सरकार को अब कोई ठोस कदम उठाना होगा। वैसे चुनाव कराने के लिए सरकार के पास पर्याप्त समय है। अखिल भारतीय पंचायत परिषद के जिलाध्यक्ष गुलजारी लाल शुक्ल ने कहा कि पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का होना लोकतंत्र की मूल भावना है। सरकार को बिना अनावश्यक विलंब के पंचायत चुनाव कराकर ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों की वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि विकास योजनाओं के संचालन और स्थानीय समस्याओं के समाधान में तेजी आ सके। एडीपीआरओ अशोक सचान ने पूरे मामले में कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
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