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Balrampur News: एपीओ की सेवा समाप्ति पर हाईकोर्ट में सीडीओ तलब
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बलरामपुर। पचपेड़वा ब्लॉक के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) मनरेगा अतुल कुमार मिश्र की सेवा समाप्ति के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह ने आदेशों के अनुपालन में लापरवाही पर सख्ती दिखाते हुए जिले के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को तलब किया है। न्यायालय ने उन्हें 27 मार्च को दोपहर 2:15 बजे स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने और व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी की ओर से सेवा समाप्ति के खिलाफ दाखिल याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। उनके अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि संविदा पर कार्यरत होने के बावजूद याची की सेवाएं बिना कारण बताए समाप्त कर दी गईं, जो कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है। वहीं, राज्य पक्ष की ओर से बार-बार समय लेकर निर्देश प्राप्त करने की बात कही जाती रही।
न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने 20 नवंबर 2025 को ही मामले में आवश्यक निर्देश दिए थे। इसके बाद 27 नवंबर, 5 दिसंबर, 12 दिसंबर, 19 दिसंबर 2025 तथा 9 जनवरी से 13 मार्च 2026 तक कई तिथियां तय हुईं, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए गए। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर लापरवाही माना।
कोर्ट ने कहा कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद जवाब न देना न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी है। ऐसे में सीडीओ बलरामपुर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताना होगा कि आखिर आदेश के बाद भी निर्देश क्यों नहीं दिए गए। अदालत ने राज्य के अधिवक्ता को आदेश से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं सीडीओ हिमांशु गुप्त ने मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की बात कहते हुए कुछ कहने से इन्कार किया।
मनरेगा घोटाले में हुई थी कार्रवाई
पचपेड़वा ब्लॉक के विशुनपुर टनटनवा गांव में मनरेगा घोटाला उजागर होने पर कार्रवाई हुई थी। इसमें प्रधान अब्दुल वहाब, ग्राम पंचायत सचिव गिरजाशंकर के साथ ही अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा अतुल कुमार मिश्र व ग्राम रोजगार सेवक जुबेर खान पर घपले के आरोप लगे थे। मार्च 2025 में बीडीओ पचपेड़वा मोहित दुबे ने 58 लाख 34 हजार 466 रुपये के घाेटाले के आरोप की एफआईआर दर्ज कराई थी। डीएम पवन अग्रवाल के निर्देश पर पीडी राघवेंद्र तिवारी की अध्यक्षता में गठित तकनीकी टीम की जांच में मनरेगा में घोटाले की पुष्टि की थी। इसी मामले में संविदा पर कार्यरत एपीओ की सेवा समाप्त कर दी गई थी, जिसके खिलाफ एपीओ ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। बताया जा रहा है कि पूरे मामले में तत्कालीन बीडीओ का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया गया, जबकि डीएम ने 4 मार्च 2025 को कार्रवाई की संस्तुति में बीडीओ का नाम लिखा था।
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न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने 20 नवंबर 2025 को ही मामले में आवश्यक निर्देश दिए थे। इसके बाद 27 नवंबर, 5 दिसंबर, 12 दिसंबर, 19 दिसंबर 2025 तथा 9 जनवरी से 13 मार्च 2026 तक कई तिथियां तय हुईं, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए गए। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर लापरवाही माना।
कोर्ट ने कहा कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद जवाब न देना न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी है। ऐसे में सीडीओ बलरामपुर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताना होगा कि आखिर आदेश के बाद भी निर्देश क्यों नहीं दिए गए। अदालत ने राज्य के अधिवक्ता को आदेश से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं सीडीओ हिमांशु गुप्त ने मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की बात कहते हुए कुछ कहने से इन्कार किया।
मनरेगा घोटाले में हुई थी कार्रवाई
पचपेड़वा ब्लॉक के विशुनपुर टनटनवा गांव में मनरेगा घोटाला उजागर होने पर कार्रवाई हुई थी। इसमें प्रधान अब्दुल वहाब, ग्राम पंचायत सचिव गिरजाशंकर के साथ ही अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा अतुल कुमार मिश्र व ग्राम रोजगार सेवक जुबेर खान पर घपले के आरोप लगे थे। मार्च 2025 में बीडीओ पचपेड़वा मोहित दुबे ने 58 लाख 34 हजार 466 रुपये के घाेटाले के आरोप की एफआईआर दर्ज कराई थी। डीएम पवन अग्रवाल के निर्देश पर पीडी राघवेंद्र तिवारी की अध्यक्षता में गठित तकनीकी टीम की जांच में मनरेगा में घोटाले की पुष्टि की थी। इसी मामले में संविदा पर कार्यरत एपीओ की सेवा समाप्त कर दी गई थी, जिसके खिलाफ एपीओ ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। बताया जा रहा है कि पूरे मामले में तत्कालीन बीडीओ का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया गया, जबकि डीएम ने 4 मार्च 2025 को कार्रवाई की संस्तुति में बीडीओ का नाम लिखा था।