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Balrampur News: लखनऊ जाना 179 रुपये महंगा, 70 किलोमीटर दूरी भी बढ़ गई
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 12 Apr 2026 11:07 PM IST
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बलरामपुर। लखनऊ मार्ग पर संजय सेतु के मरम्मत के चलते 16 अप्रैल से दो महीने के लिए बंद कर दिया जाएगा। इस कारण बलरामपुर से राजधानी लखनऊ की दूरी, समय और खर्च तीनों में बड़ा इजाफा होगा, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ना तय है। रोडवेज से 18 बसें लखनऊ और कानपुर रोज जाती हैं। इसके साथ ही सिद्धार्थनगर, बढ़नी से भी बसें आती हैं। इस पर भी बंदी का असर होने की संभावना है।
इसके साथ ही निजी और व्यापारिक वाहन भी हर दिन दो से तीन हजार लखनऊ और कानपुर जाते हैं। इनकी भी दूरी बढ़ेगी। अब तक बलरामपुर से गोंडा होते हुए लखनऊ की दूरी करीब 165 किलोमीटर थी, जिसे लोग चार घंटे के भीतर तय कर लेते थे। किराया भी 216 से 221 रुपये के बीच पड़ता था। अब सेतु बंद होने के बाद लोगों को अयोध्या या चहलारी घाट होकर जाना पड़ेगा। इससे दूरी बढ़कर करीब 230 किलोमीटर हो जाएगी और किराया लगभग 400 रुपये तक पहुंच सकता है। यानी एक तरफ का सफर ही करीब 179 रुपये महंगा हो जाएगा।
जिले से रोजाना बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को लखनऊ रेफर किया जाता है। खासकर हेड इंजरी और हृदय रोगियों के लिए समय बेहद अहम होता है। ऐसे में दूरी और समय बढ़ने से उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ट्रामा सेंटर जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर न होने से लखनऊ ही एकमात्र विकल्प है।
रोजाना सफर करने वालों की बढ़ेगी दिक्कत
जिले से प्रतिदिन दो हजार से अधिक लोग किसी न किसी काम से लखनऊ जाते हैं। इनमें नौकरीपेशा, छात्र और व्यापारी शामिल हैं। ट्रेन सेवाएं सीमित होने के कारण अधिकांश लोग रोडवेज बसों पर निर्भर रहते हैं। अब रूट डायवर्जन के चलते बसों का किराया किलोमीटर के हिसाब से बढ़ेगा, जिससे जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
व्यापारियों का कहना है कि दूरी बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे कारोबार प्रभावित होगा। समय ज्यादा लगने से सप्लाई चेन भी धीमी पड़ सकती है। व्यापारी गंगा शर्मा ने बताया कि इससे सामग्री का मूल्य भी बढ़ सकता है। दो महीने का समय काफी ज्यादा है।
वैकल्पिक रूट पर बढ़ेगा दबाव
परिवहन विभाग के अनुसार बसों को अब श्रावस्ती-बहराइच-चहलारी घाट या गोंडा-अयोध्या मार्ग से चलाने की तैयारी है। इससे इन मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा और जाम की समस्या भी सामने आ सकती है।
संजय सेतु की बंदी केवल एक पुल का बंद होना नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ने वाला है। शहर के सर्वेश सिंह ने कहाकि संजय सेतु की मरम्मत भी जरूरी है, बेहतर होगा कि समय से कार्य पूरा हो जाए।
किलोमीटर के हिसाब से लगेगा किराया
एआरएम गोपीनाथ दीक्षित ने बताया कि रूट डायवर्जन होने पर रोडवेज बसों को बलरामपुर से श्रावस्ती-बहराइच से चहलारीघाट और गोंडा-अयोध्या होकर लखनऊ, कानपुर भेजा जाएगा। किलोमीटर के हिसाब से रोडवेज बसों में किराया लगेगा।
जिले से वाहनों को डायवर्ट करने की कोई जरूरत नहीं
एआरटीओ बृजेश ने बताया कि संजय सेतु के बंद होने से जिले में वाहनों को किसी तरफ डायवर्ट करने की कोई जरूरत नहीं हैं। वाहन गोंडा, बहराइच और अयोध्या से ही आगे जाएंगी। वहां की व्यवस्था के अनुसार ही वाहनों का संचालन होगा।
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इसके साथ ही निजी और व्यापारिक वाहन भी हर दिन दो से तीन हजार लखनऊ और कानपुर जाते हैं। इनकी भी दूरी बढ़ेगी। अब तक बलरामपुर से गोंडा होते हुए लखनऊ की दूरी करीब 165 किलोमीटर थी, जिसे लोग चार घंटे के भीतर तय कर लेते थे। किराया भी 216 से 221 रुपये के बीच पड़ता था। अब सेतु बंद होने के बाद लोगों को अयोध्या या चहलारी घाट होकर जाना पड़ेगा। इससे दूरी बढ़कर करीब 230 किलोमीटर हो जाएगी और किराया लगभग 400 रुपये तक पहुंच सकता है। यानी एक तरफ का सफर ही करीब 179 रुपये महंगा हो जाएगा।
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जिले से रोजाना बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को लखनऊ रेफर किया जाता है। खासकर हेड इंजरी और हृदय रोगियों के लिए समय बेहद अहम होता है। ऐसे में दूरी और समय बढ़ने से उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ट्रामा सेंटर जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर न होने से लखनऊ ही एकमात्र विकल्प है।
रोजाना सफर करने वालों की बढ़ेगी दिक्कत
जिले से प्रतिदिन दो हजार से अधिक लोग किसी न किसी काम से लखनऊ जाते हैं। इनमें नौकरीपेशा, छात्र और व्यापारी शामिल हैं। ट्रेन सेवाएं सीमित होने के कारण अधिकांश लोग रोडवेज बसों पर निर्भर रहते हैं। अब रूट डायवर्जन के चलते बसों का किराया किलोमीटर के हिसाब से बढ़ेगा, जिससे जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
व्यापारियों का कहना है कि दूरी बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे कारोबार प्रभावित होगा। समय ज्यादा लगने से सप्लाई चेन भी धीमी पड़ सकती है। व्यापारी गंगा शर्मा ने बताया कि इससे सामग्री का मूल्य भी बढ़ सकता है। दो महीने का समय काफी ज्यादा है।
वैकल्पिक रूट पर बढ़ेगा दबाव
परिवहन विभाग के अनुसार बसों को अब श्रावस्ती-बहराइच-चहलारी घाट या गोंडा-अयोध्या मार्ग से चलाने की तैयारी है। इससे इन मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा और जाम की समस्या भी सामने आ सकती है।
संजय सेतु की बंदी केवल एक पुल का बंद होना नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ने वाला है। शहर के सर्वेश सिंह ने कहाकि संजय सेतु की मरम्मत भी जरूरी है, बेहतर होगा कि समय से कार्य पूरा हो जाए।
किलोमीटर के हिसाब से लगेगा किराया
एआरएम गोपीनाथ दीक्षित ने बताया कि रूट डायवर्जन होने पर रोडवेज बसों को बलरामपुर से श्रावस्ती-बहराइच से चहलारीघाट और गोंडा-अयोध्या होकर लखनऊ, कानपुर भेजा जाएगा। किलोमीटर के हिसाब से रोडवेज बसों में किराया लगेगा।
जिले से वाहनों को डायवर्ट करने की कोई जरूरत नहीं
एआरटीओ बृजेश ने बताया कि संजय सेतु के बंद होने से जिले में वाहनों को किसी तरफ डायवर्ट करने की कोई जरूरत नहीं हैं। वाहन गोंडा, बहराइच और अयोध्या से ही आगे जाएंगी। वहां की व्यवस्था के अनुसार ही वाहनों का संचालन होगा।