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Balrampur News: अधूरे भवन में 12 वीं तक की पढ़ाई, 150 छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 28 Apr 2026 11:08 PM IST
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फोटो-14-बलरामपुर के गैसड़ी में बना कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय ।-संवाद
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गैसड़ी। संसाधनों के अभाव में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की 150 छात्राओं को अधूरे और मानकविहीन भवन में शिफ्ट किए जाने से बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वर्ष 2009 से पचपेड़वा नगर में संचालित विद्यालय को विभाग ने जल्दबाजी में उच्चीकृत कस्तूरबा विद्यालय रेहराचौकी में स्थानांतरित कर दिया, जबकि नया भवन पिछले 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है। यहां कक्षा छह से 12 वीं तक की पढ़ाई होनी है।
स्थिति यह है कि भवन में न फर्श पूरा है, न शौचालय, न ही खिड़की-दरवाजे लगे हैं। सुरक्षा के नाम पर न बाउंड्रीवाल है, न सीसीटीवी कैमरे। सोलर पैनल और नेटवर्क की सुविधा भी नहीं है, जिससे स्मार्ट क्लास की पढ़ाई ठप है। सबसे गंभीर बात यह है कि विद्यालय में शिक्षकों की भी कमी है। हिंदी, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं। पूरे छात्रावास की जिम्मेदारी एक ही प्रभारी अध्यापक के भरोसे है। स्थानीय लोगों शेखर पांडेय, विमल कुमार, राजकुमार, राकेश कुमार व रहमतुल्लाह ने इसे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बताया। व्यवस्था सुधारने की मांग की है। बताया कि नवीन भवन में संसाधनों का अभाव है सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में यहां पचपेड़वा, परशुरामपुर मड़नी, भूसहर उचवा, भूसहर पुरई, चिलकहना जीतपुर वीरपुर सेमरा मनोहरपुर रजडेरवा थारू दूर-दराज जंगली क्षेत्र के जनजातीय छात्राओं का नामांकन कर दिया गया है।
परिसर में देखा जा चुका है तेंदुआ
ग्रामीणों के अनुसार छात्रावास के सामने जंगल है। विद्यालय परिसर में स्थित पुराने स्वास्थ्य उपकेंद्र में कई बार तेंदुआ देखा गया है। जिससे छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में डर बना हुआ है। दूर-दराज आई जनजातीय छात्राएं ऐसे माहौल में रहने को मजबूर हैं। खंड शिक्षा अधिकारी घनश्याम वर्मा ने बताया कि समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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स्थिति यह है कि भवन में न फर्श पूरा है, न शौचालय, न ही खिड़की-दरवाजे लगे हैं। सुरक्षा के नाम पर न बाउंड्रीवाल है, न सीसीटीवी कैमरे। सोलर पैनल और नेटवर्क की सुविधा भी नहीं है, जिससे स्मार्ट क्लास की पढ़ाई ठप है। सबसे गंभीर बात यह है कि विद्यालय में शिक्षकों की भी कमी है। हिंदी, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं। पूरे छात्रावास की जिम्मेदारी एक ही प्रभारी अध्यापक के भरोसे है। स्थानीय लोगों शेखर पांडेय, विमल कुमार, राजकुमार, राकेश कुमार व रहमतुल्लाह ने इसे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बताया। व्यवस्था सुधारने की मांग की है। बताया कि नवीन भवन में संसाधनों का अभाव है सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में यहां पचपेड़वा, परशुरामपुर मड़नी, भूसहर उचवा, भूसहर पुरई, चिलकहना जीतपुर वीरपुर सेमरा मनोहरपुर रजडेरवा थारू दूर-दराज जंगली क्षेत्र के जनजातीय छात्राओं का नामांकन कर दिया गया है।
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परिसर में देखा जा चुका है तेंदुआ
ग्रामीणों के अनुसार छात्रावास के सामने जंगल है। विद्यालय परिसर में स्थित पुराने स्वास्थ्य उपकेंद्र में कई बार तेंदुआ देखा गया है। जिससे छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में डर बना हुआ है। दूर-दराज आई जनजातीय छात्राएं ऐसे माहौल में रहने को मजबूर हैं। खंड शिक्षा अधिकारी घनश्याम वर्मा ने बताया कि समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

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