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Balrampur News: 15 साल पुराने गबन मामलों की फिर खुलेगी फाइल, मृतकों के वारिसों से भी होगी वसूली
Thu, 06 Aug 2026 11:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:00 PM IST
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बलरामपुर। साधन सहकारी समितियों में वर्ष 2011-12 के दौरान उर्वरक और बीज खरीद में हुए कथित गबन के पुराने मामलों की फाइलें एक बार फिर खुलेंगी। सहकारिता विभाग ने लंबित वसूली की कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग पुराने अभिलेखों की जांच कर आरोपित सचिवों और अन्य जिम्मेदारों को रिकवरी नोटिस जारी करने की तैयारी में है। जिन आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है, उनके उत्तराधिकारियों से नियमानुसार वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
विभाग के अनुसार जिले की 44 साधन सहकारी समितियों में उर्वरक और बीज खरीद के दौरान कुल एक करोड़ 55 हजार रुपये के गबन का मामला सामने आया था। इन मामलों में कई सचिवों और संबंधित कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं। इनमें सहकारी समिति चकवा व सहदेइया के बसंत कुमार, विशुनीपुर के कृष्ण मोहन, गुगौली व सरकहवा की राधिका दुबे, कमदी खुर्द, शिवपुरा, ललिया व सरकहवा के रामायण तिवारी सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है।
इसके अलावा धौरीनगर, नंदमहरा, बिथरिया परसपुर, बंजरहा खम्हरिया, चमरूपुर, टेढ़वा चिताही, विश्रामपुर गुलरहा, उतरौला, राजपुर बरायल, तिलखीनगर समेत अन्य समितियों से जुड़े लोगों के नाम भी जांच में शामिल हैं। कुछ मामलों में पीसीएफ (प्रादेशिक सहकारी संघ) की भूमिका भी दर्ज की गई है।
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सहकारिता विभाग का कहना है कि अधिकांश आरोपित सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है। ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार उनके उत्तराधिकारियों को नोटिस भेजकर रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
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विभाग के अनुसार जिले की 44 साधन सहकारी समितियों में उर्वरक और बीज खरीद के दौरान कुल एक करोड़ 55 हजार रुपये के गबन का मामला सामने आया था। इन मामलों में कई सचिवों और संबंधित कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं। इनमें सहकारी समिति चकवा व सहदेइया के बसंत कुमार, विशुनीपुर के कृष्ण मोहन, गुगौली व सरकहवा की राधिका दुबे, कमदी खुर्द, शिवपुरा, ललिया व सरकहवा के रामायण तिवारी सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है।
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इसके अलावा धौरीनगर, नंदमहरा, बिथरिया परसपुर, बंजरहा खम्हरिया, चमरूपुर, टेढ़वा चिताही, विश्रामपुर गुलरहा, उतरौला, राजपुर बरायल, तिलखीनगर समेत अन्य समितियों से जुड़े लोगों के नाम भी जांच में शामिल हैं। कुछ मामलों में पीसीएफ (प्रादेशिक सहकारी संघ) की भूमिका भी दर्ज की गई है।
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सहकारिता विभाग का कहना है कि अधिकांश आरोपित सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है। ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार उनके उत्तराधिकारियों को नोटिस भेजकर रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।