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Balrampur News: महिला की पिटाई में ललिया के तत्कालीन एसओ के साथ राजस्व निरीक्षक व लेखपाल तलब
Sat, 27 Jun 2026 11:04 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 27 Jun 2026 11:04 PM IST
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बलरामपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनूप कुमार पांडेय की अदालत ने गर्भवती महिला की पिटाई, गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में कार्रवाई शुरु की है। मामले में ललिया के तत्कालीन थानाध्यक्ष बृजानंद सिंह, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक सुरेश कुमार यादव, और लेखपाल महराज नारायण के विरुद्ध समन जारी किया है। अदालत ने तीनों को 20 जुलाई को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
कोडरी बाजार थाना ललिया निवासी कुसुम ने वर्ष 2025 में न्यायालय में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया था कि भूमि विवाद को लेकर उसके परिवार की राजस्व निरीक्षक सुरेश कुमार यादव से रंजिश चल रही थी। उसके ससुर ने भूमि प्रकरण में उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी, जिसमें राजस्व निरीक्षक को फटकार लगने के बाद आरोपी परिवार से रंजिश रखने लगे। आरोप है कि 22 फरवरी 2025 की शाम तीनों आरोपी उसके घर पहुंचे, पति और ससुर के बारे में पूछताछ की और उनके घर पर न मिलने पर गाली-गलौज, पिटाई तथा फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। पिटाई के दौरान उसके पेट पर लात मारी गई, जिससे बाद में उसका तीन माह का गर्भ गिर गया। न्यायालय ने परिवादिनी, उसके गवाहों और प्रस्तुत अभिलेखों का परीक्षण किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पिटाई, गाली-गलौज और धमकी के आरोपों के संबंध में प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जबकि गर्भपात के आरोप के समर्थन में इस स्तर पर पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। न्यायालय ने तीनों आरोपियों को समन जारी किया है।
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कोडरी बाजार थाना ललिया निवासी कुसुम ने वर्ष 2025 में न्यायालय में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया था कि भूमि विवाद को लेकर उसके परिवार की राजस्व निरीक्षक सुरेश कुमार यादव से रंजिश चल रही थी। उसके ससुर ने भूमि प्रकरण में उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी, जिसमें राजस्व निरीक्षक को फटकार लगने के बाद आरोपी परिवार से रंजिश रखने लगे। आरोप है कि 22 फरवरी 2025 की शाम तीनों आरोपी उसके घर पहुंचे, पति और ससुर के बारे में पूछताछ की और उनके घर पर न मिलने पर गाली-गलौज, पिटाई तथा फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। पिटाई के दौरान उसके पेट पर लात मारी गई, जिससे बाद में उसका तीन माह का गर्भ गिर गया। न्यायालय ने परिवादिनी, उसके गवाहों और प्रस्तुत अभिलेखों का परीक्षण किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पिटाई, गाली-गलौज और धमकी के आरोपों के संबंध में प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जबकि गर्भपात के आरोप के समर्थन में इस स्तर पर पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। न्यायालय ने तीनों आरोपियों को समन जारी किया है।
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