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Balrampur News: देवीपाटन के चारो जिलों की तस्वीर बदलने का मास्टर प्लान लागू
Wed, 22 Jul 2026 11:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 22 Jul 2026 11:08 PM IST
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फोटो-29-बलरामपुर के शक्तिपीठ देवीपाटन स्थित गौशाला में गोवंशों को चारा खिलाते सीएम योगी आद
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बलरामपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार देर शाम शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में देवीपाटन मंडल के समग्र विकास की रूपरेखा की समीक्षा की। इस दौरान मंडल के लिए तैयार विशेष मास्टर प्लान पर विस्तार से चर्चा हुई। इस कार्ययोजना के लागू होने पर बलरामपुर, गोंडा, बहराइच और श्रावस्ती के लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मुख्यमंत्री के समक्ष विकास संबंधी कार्ययोजना प्रस्तुत की। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए चार प्रमुख पहल शामिल हैं।
मिशन गो-अर्थ से बायोगैस को बढ़ावा
''मिशन गो-अर्थ'' के तहत गोबर आधारित चक्रीय अर्थव्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत दो गाय रखने वाले परिवारों के लिए घरेलू बायोगैस संयंत्र का मॉडल तैयार किया गया है। लगभग 12 से 15 हजार रुपये की लागत से संयंत्र स्थापित होगा, जिससे परिवार को एलपीजी पर होने वाले करीब आठ हजार रुपये के वार्षिक खर्च से राहत मिल सकेगी।
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गोशालाओं में 30 घनमीटर क्षमता की बायोगैस इकाई करीब छह लाख रुपये की लागत से स्थापित की जाएगी। एक इकाई से 20 से 24 परिवारों को गैस उपलब्ध कराई जा सकेगी।
वाद-मुक्त गांव और अतिक्रमण मुक्त चकरोड
मंडल के चारों जिलों के 500 गांवों में सामुदायिक मध्यस्थता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में लेखपाल, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, महिला प्रतिनिधि और वरिष्ठ ग्रामीण को शामिल करते हुए पांच सदस्यीय मध्यस्थता पैनल बनाया जाएगा। यह पैनल छोटे राजस्व, पारिवारिक और सामाजिक विवादों का गांव स्तर पर आपसी सहमति से निस्तारण करेगा।
वहीं किसान चकरोड मुक्त अभियान के तहत पूरे मंडल में 2,456 चकरोड अतिक्रमण मुक्त कराए गए हैं। इनमें से 948 स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। बलरामपुर जिले में 167 चकरोड अतिक्रमण मुक्त कराए गए, जबकि 75 स्थानों पर मिट्टी पटाई और इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा हो चुका है।
बाढ़ प्रबंधन की विशेष तैयारी
नेपाल सीमा से सटे देवीपाटन मंडल को हर वर्ष बाढ़ का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए बाढ़ प्रभावित गांवों में 29,947 गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया गया है, जिनमें अकेले बलरामपुर जिले की 8,410 महिलाएं शामिल हैं।
मंडल के 568 बाढ़ प्रभावित गांवों में 1,83,944 पशुओं का टीकाकरण और कृमिनाशक दवाओं का वितरण कराया गया है। बलरामपुर के 214 गांवों में 15,800 पशुओं का टीकाकरण पूरा हो चुका है। जिले के 80 बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए नावों की व्यवस्था पहले ही कर दी गई है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से बाढ़ से पहले फसलों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है।
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देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मुख्यमंत्री के समक्ष विकास संबंधी कार्ययोजना प्रस्तुत की। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए चार प्रमुख पहल शामिल हैं।
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मिशन गो-अर्थ से बायोगैस को बढ़ावा
''मिशन गो-अर्थ'' के तहत गोबर आधारित चक्रीय अर्थव्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत दो गाय रखने वाले परिवारों के लिए घरेलू बायोगैस संयंत्र का मॉडल तैयार किया गया है। लगभग 12 से 15 हजार रुपये की लागत से संयंत्र स्थापित होगा, जिससे परिवार को एलपीजी पर होने वाले करीब आठ हजार रुपये के वार्षिक खर्च से राहत मिल सकेगी।
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गोशालाओं में 30 घनमीटर क्षमता की बायोगैस इकाई करीब छह लाख रुपये की लागत से स्थापित की जाएगी। एक इकाई से 20 से 24 परिवारों को गैस उपलब्ध कराई जा सकेगी।
वाद-मुक्त गांव और अतिक्रमण मुक्त चकरोड
मंडल के चारों जिलों के 500 गांवों में सामुदायिक मध्यस्थता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में लेखपाल, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, महिला प्रतिनिधि और वरिष्ठ ग्रामीण को शामिल करते हुए पांच सदस्यीय मध्यस्थता पैनल बनाया जाएगा। यह पैनल छोटे राजस्व, पारिवारिक और सामाजिक विवादों का गांव स्तर पर आपसी सहमति से निस्तारण करेगा।
वहीं किसान चकरोड मुक्त अभियान के तहत पूरे मंडल में 2,456 चकरोड अतिक्रमण मुक्त कराए गए हैं। इनमें से 948 स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। बलरामपुर जिले में 167 चकरोड अतिक्रमण मुक्त कराए गए, जबकि 75 स्थानों पर मिट्टी पटाई और इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा हो चुका है।
बाढ़ प्रबंधन की विशेष तैयारी
नेपाल सीमा से सटे देवीपाटन मंडल को हर वर्ष बाढ़ का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए बाढ़ प्रभावित गांवों में 29,947 गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया गया है, जिनमें अकेले बलरामपुर जिले की 8,410 महिलाएं शामिल हैं।
मंडल के 568 बाढ़ प्रभावित गांवों में 1,83,944 पशुओं का टीकाकरण और कृमिनाशक दवाओं का वितरण कराया गया है। बलरामपुर के 214 गांवों में 15,800 पशुओं का टीकाकरण पूरा हो चुका है। जिले के 80 बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए नावों की व्यवस्था पहले ही कर दी गई है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से बाढ़ से पहले फसलों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है।