सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Balrampur News ›   Now, studies in Kasturba will move from books to laboratories

Balrampur News: अब किताबों से निकलकर प्रयोगशाला तक पहुंचेगी कस्तूरबा में पढ़ाई

संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Mon, 11 May 2026 11:04 PM IST
विज्ञापन
Now, studies in Kasturba will move from books to laboratories
फोटो-21-बलरामपुर के केजीबीवी उतरौला में मौजूद छात्राएं ।-संवाद
विज्ञापन
बलरामपुर। जिले के 11 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में अब पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। अब छात्राएं केवल किताबों में विज्ञान और गणित के सिद्धांत पढ़कर याद नहीं करेंगी, बल्कि प्रयोगों और गतिविधियों के जरिए उन्हें समझेंगी भी। केजीबीवी में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ कार्यक्रम लागू किया गया है। इसके तहत विज्ञान और गणित विषयों को व्यावहारिक और अनुभव आधारित बनाया जाएगा।
Trending Videos




जिले के प्रत्येक विद्यालय में लगभग 100 छात्राएं अध्ययनरत हैं। इस प्रकार करीब 1100 छात्राओं को नई शिक्षण पद्धति का सीधा लाभ मिलेगा। शासन की ओर से प्रत्येक विद्यालय को कार्यक्रम संचालन के लिए 43,250 रुपये तक की धनराशि स्थानीय स्तर पर खर्च करने की अनुमति दी गई है। इस धनराशि से प्रयोगात्मक टूल्स, मॉडल, विज्ञान एवं गणित सामग्री तथा कंज्यूमेबल्स खरीदे जाएंगे। जिला समन्वयक मोहित देव त्रिपाठी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत छात्राओं को प्रयोगों, गतिविधियों और मॉडल्स के माध्यम से कठिन विषयों को आसान तरीके से समझाया जाएगा। गणित के सूत्र अब केवल ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि छात्राएं उन्हें गतिविधियों के जरिए व्यवहार में उतारेंगी। विज्ञान के सिद्धांतों को प्रयोगों के माध्यम से समझने का अवसर मिलने से उनमें विषय के प्रति रुचि भी बढ़ेगी। बीएसए शुभम शुक्ल ने कहा कि इससे छात्राओं की तर्कशक्ति, समस्या समाधान क्षमता, वैज्ञानिक सोच और आत्मविश्वास मजबूत होगा। खास बात यह है कि यह कार्यक्रम केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्राओं के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन




अब ‘कौशल और समझ की प्रयोगशाला’ बनेंगे केजीबीवी



केजीबीवी को केवल आवासीय विद्यालय तक सीमित न रखकर उन्हें कौशल और समझ की प्रयोगशाला के रूप में विकसित करना है। ग्रामीण और वंचित वर्ग की छात्राओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिक्षक नीलम का कहना है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि की कई छात्राओं को विज्ञान और गणित जैसे विषय कठिन लगते हैं, लेकिन प्रयोग आधारित शिक्षा उन्हें इन विषयों से जोड़ने में मदद करेगी। इससे छात्राओं में आत्मनिर्भरता और नई चीजें सीखने की उत्सुकता भी बढ़ेगी।



शिक्षक होंगे प्रशिक्षित, छात्राओं के लिए बेहतर अवसर



कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें गतिविधि आधारित शिक्षण तकनीकों से परिचित कराया जाएगा ताकि वे छात्राओं को बेहतर तरीके से प्रयोगात्मक शिक्षा दे सकें। यह पहल ग्रामीण, गरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग की छात्राओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी। प्रयोगात्मक शिक्षा के माध्यम से छात्राएं केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं और तकनीकी दुनिया के लिए भी तैयार होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed