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Balrampur News: कागजों में 137 करोड़ की सफाई, गांवों में कचरे का अंबार
Wed, 12 Aug 2026 11:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 12 Aug 2026 11:53 PM IST
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फोटो-23-बलरामपुर के श्रीनगर में बदहाल आरआरसी सेंटर ।-संवाद
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बलरामपुर। गांवों को स्वच्छ रखने और घरों से निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) बनवाए, लेकिन धरातल पर व्यवस्था बदहाल है। जिले के 503 गांवों में करीब 137 करोड़ रुपये की लागत से बने आरआरसी केंद्रों का संचालन प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। कई गांवों में घरों से नियमित कूड़ा उठान नहीं होने के कारण सड़कों, गलियों और आबादी वाले क्षेत्रों में कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से आरआरसी केंद्रों का निर्माण कराया गया था। योजना के अनुसार घरों, स्कूलों, पंचायत भवन, ग्राम सचिवालय, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले कचरे को एकत्र कर आरआरसी केंद्रों तक पहुंचाना था। इसके लिए ई-रिक्शा के माध्यम से घर-घर कूड़ा उठाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कई स्थानों पर यह व्यवस्था नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही है।
मुख्यालय क्षेत्र की पंचायतों में ही बदहाल मिले केंद्र
सदर विकासखंड की ग्राम पंचायत श्रीनगर, भीखपुर, गनवरिया और नंदनगर ठठिया में आरआरसी केंद्रों की स्थिति भी व्यवस्था की पोल खोल रही है। इन केंद्रों के आसपास कूड़ा-करकट फैला मिला। कई जगह केंद्रों के मुख्य गेट बंद मिले और नियमित उपयोग के संकेत नहीं दिखे। जिन केंद्रों पर गांवों से एकत्र कचरे का पृथक्करण और निस्तारण होना था, वहां अव्यवस्था दिखाई दी।
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न सूखे और गीले कचरे का पृथक्करण, न बन रही खाद
आरआरसी केंद्रों पर गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था की गई थी। गीले कचरे से खाद तैयार कर उसका उपयोग अथवा बिक्री कर ग्राम पंचायत की आय बढ़ाने की योजना थी। वहीं, घरों से कूड़ा उठाने के बदले निर्धारित शुल्क लेने का भी प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद कई गांवों में न तो नियमित कूड़ा उठान हो रहा है और न ही कचरे के पृथक्करण की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से लागू हो सकी है।
मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गुप्ता ने बताया कि गांवों में बनाए गए कूड़ा निस्तारण केंद्रों का हर हाल में उपयोग किया जाना है। संबंधित अधिकारियों को आरआरसी केंद्रों का संचालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। कूड़ा उठान और निस्तारण व्यवस्था में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से आरआरसी केंद्रों का निर्माण कराया गया था। योजना के अनुसार घरों, स्कूलों, पंचायत भवन, ग्राम सचिवालय, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले कचरे को एकत्र कर आरआरसी केंद्रों तक पहुंचाना था। इसके लिए ई-रिक्शा के माध्यम से घर-घर कूड़ा उठाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कई स्थानों पर यह व्यवस्था नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही है।
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मुख्यालय क्षेत्र की पंचायतों में ही बदहाल मिले केंद्र
सदर विकासखंड की ग्राम पंचायत श्रीनगर, भीखपुर, गनवरिया और नंदनगर ठठिया में आरआरसी केंद्रों की स्थिति भी व्यवस्था की पोल खोल रही है। इन केंद्रों के आसपास कूड़ा-करकट फैला मिला। कई जगह केंद्रों के मुख्य गेट बंद मिले और नियमित उपयोग के संकेत नहीं दिखे। जिन केंद्रों पर गांवों से एकत्र कचरे का पृथक्करण और निस्तारण होना था, वहां अव्यवस्था दिखाई दी।
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न सूखे और गीले कचरे का पृथक्करण, न बन रही खाद
आरआरसी केंद्रों पर गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था की गई थी। गीले कचरे से खाद तैयार कर उसका उपयोग अथवा बिक्री कर ग्राम पंचायत की आय बढ़ाने की योजना थी। वहीं, घरों से कूड़ा उठाने के बदले निर्धारित शुल्क लेने का भी प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद कई गांवों में न तो नियमित कूड़ा उठान हो रहा है और न ही कचरे के पृथक्करण की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से लागू हो सकी है।
मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गुप्ता ने बताया कि गांवों में बनाए गए कूड़ा निस्तारण केंद्रों का हर हाल में उपयोग किया जाना है। संबंधित अधिकारियों को आरआरसी केंद्रों का संचालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। कूड़ा उठान और निस्तारण व्यवस्था में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

फोटो-23-बलरामपुर के श्रीनगर में बदहाल आरआरसी सेंटर ।-संवाद

फोटो-23-बलरामपुर के श्रीनगर में बदहाल आरआरसी सेंटर ।-संवाद