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Balrampur News: पेट्रोल पंपों पर कम हुआ दबाव, पटरी पर लौट रही व्यवस्था
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बलरामपुर में स्थित पेट्रोल पंप पर जुटी उपभोक्ताओं की भीड़ ।-संवाद
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बलरामपुर। जिला प्रशासन की सख्ती व निगरानी से पेट्रोल-डीजल भराने की मारामारी कम हुई है। ग्राहकों की भीड़ कम होने से पंपों पर दबाव भी कम हो गया है। धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल आपूर्ति व वितरण व्यवस्था में सुधार हो रहा है। सोमवार को अधिकतर पंपों पर भीड़ कम रही। हालांकि गैलन-डिब्बे में तेल न देने की सख्ती से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। सिंचाई के लिए किसानों को डीजल नहीं मिल पा रहा है।
सोमवार को नगर के वीर विनय चौराहा, संतोषी माता मंदिर, चुंगीनाका व पहलवारा में सामान्य भीड़ देखने को मिली। ग्राहकों को आसानी से पेट्रोल-डीजल मिल रहा था। पेट्रोल भराने आए कासिम व सुलेमान ने बताया कि आज भीड़ नहीं है। 200 रुपये का नियम लागू होने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है। इसी तरह तुलसीपुर, उतरौला, श्रीदत्तगंज व रेहरा बाजार में भी पंपों पर भीड़ कम रही।
जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि जनपद में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है तथा आपूर्ति भी हो रही है। 30 मार्च को जिले के 88 पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल का कुल स्टॉक 4,51,823 लीटर और डीजल का 4,79,400 लीटर उपलब्ध है, जो सामान्य दैनिक जरूरत से अधिक है।
डीएम विपिन कुमार जैन ने बताया कि 24 मार्च तक पेट्रोल की औसत खपत 91,180 लीटर और डीजल की 1,40,400 लीटर थी, लेकिन 25 मार्च को अफवाहों के कारण पैनिक बाइंग से पेट्रोल की खपत 2,47,000 लीटर और डीजल 3,60,050 लीटर तक पहुंच गई। 26 व 27 मार्च को भी खपत अधिक रही, जबकि 28 मार्च से मांग घटने लगी। 29 मार्च को पेट्रोल की खपत 1,22,260 लीटर और डीजल 2,54,665 लीटर दर्ज की गई, जो स्थिति सामान्य होने का संकेत है। डीएम ने कहाकि अफवाहों पर ध्यान न देने से स्थिति में सुधार हो रहा है। लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है, स्टॉक पर्याप्त है।
पंपिंग सेट लाद खुद बैलगाड़ी धकेलकर पेट्रोल पंप तक पहुंचे भाई
फोटो - 19
गौरा चौराहा। डिब्बे में डीजल देने पर लगी रोक से किसान परेशान हैं। तेल लेने के लिए रविवार की रात ग्राम मुडिला निवासी सगे भाई किसान सालिकराम और राकेश ने अनोखा रास्ता अपनाया। दोनों ने अपने पंपिंग सेट को बैलगाड़ी पर लादा और पेट्रोल पंप की ओर चल पड़े। बैल उपलब्ध न होने पर दोनों भाइयों ने खुद ही बैलगाड़ी खींची और पसीना बहाते हुए किसी तरह पेट्रोल पंप तक पहुंचे। किसानों ने बताया कि उन्होंने भिंडी और लौकी की सब्जी की फसल लगाई है। इसके अलावा गन्ने की पेड़ी भी खेत में तैयार है, जिसमें इस समय सिंचाई बेहद जरूरी है। यदि समय से पानी नहीं मिला तो सब्जी की फसल सूख जाएगी और गन्ने की बढ़वार भी रुक जाएगी। दोनों किसानों ने कहाकि डिब्बे में डीजल न मिलने से पंपिंग सेट तक ईंधन पहुंचाना मुश्किल हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि छोटे किसानों के लिए डिब्बे में सीमित मात्रा में डीजल देने की व्यवस्था की जाए, ताकि सिंचाई प्रभावित न हो और फसल सूखने से बच सके।
सतत निगरानी से आया सुधार
अफवाह को लेकर लोग बेवजह तेल भरा रहे थे, इसलिए अचानक मांग में वृद्धि देखी गई। जिला प्रशासन की सख्ती के बाद स्थिति में सुधार आया है।
- कुमार निर्मलेंदु, जिला पूर्ति अधिकारी बलरामपुर
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सोमवार को नगर के वीर विनय चौराहा, संतोषी माता मंदिर, चुंगीनाका व पहलवारा में सामान्य भीड़ देखने को मिली। ग्राहकों को आसानी से पेट्रोल-डीजल मिल रहा था। पेट्रोल भराने आए कासिम व सुलेमान ने बताया कि आज भीड़ नहीं है। 200 रुपये का नियम लागू होने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है। इसी तरह तुलसीपुर, उतरौला, श्रीदत्तगंज व रेहरा बाजार में भी पंपों पर भीड़ कम रही।
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जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि जनपद में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है तथा आपूर्ति भी हो रही है। 30 मार्च को जिले के 88 पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल का कुल स्टॉक 4,51,823 लीटर और डीजल का 4,79,400 लीटर उपलब्ध है, जो सामान्य दैनिक जरूरत से अधिक है।
डीएम विपिन कुमार जैन ने बताया कि 24 मार्च तक पेट्रोल की औसत खपत 91,180 लीटर और डीजल की 1,40,400 लीटर थी, लेकिन 25 मार्च को अफवाहों के कारण पैनिक बाइंग से पेट्रोल की खपत 2,47,000 लीटर और डीजल 3,60,050 लीटर तक पहुंच गई। 26 व 27 मार्च को भी खपत अधिक रही, जबकि 28 मार्च से मांग घटने लगी। 29 मार्च को पेट्रोल की खपत 1,22,260 लीटर और डीजल 2,54,665 लीटर दर्ज की गई, जो स्थिति सामान्य होने का संकेत है। डीएम ने कहाकि अफवाहों पर ध्यान न देने से स्थिति में सुधार हो रहा है। लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है, स्टॉक पर्याप्त है।
पंपिंग सेट लाद खुद बैलगाड़ी धकेलकर पेट्रोल पंप तक पहुंचे भाई
फोटो - 19
गौरा चौराहा। डिब्बे में डीजल देने पर लगी रोक से किसान परेशान हैं। तेल लेने के लिए रविवार की रात ग्राम मुडिला निवासी सगे भाई किसान सालिकराम और राकेश ने अनोखा रास्ता अपनाया। दोनों ने अपने पंपिंग सेट को बैलगाड़ी पर लादा और पेट्रोल पंप की ओर चल पड़े। बैल उपलब्ध न होने पर दोनों भाइयों ने खुद ही बैलगाड़ी खींची और पसीना बहाते हुए किसी तरह पेट्रोल पंप तक पहुंचे। किसानों ने बताया कि उन्होंने भिंडी और लौकी की सब्जी की फसल लगाई है। इसके अलावा गन्ने की पेड़ी भी खेत में तैयार है, जिसमें इस समय सिंचाई बेहद जरूरी है। यदि समय से पानी नहीं मिला तो सब्जी की फसल सूख जाएगी और गन्ने की बढ़वार भी रुक जाएगी। दोनों किसानों ने कहाकि डिब्बे में डीजल न मिलने से पंपिंग सेट तक ईंधन पहुंचाना मुश्किल हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि छोटे किसानों के लिए डिब्बे में सीमित मात्रा में डीजल देने की व्यवस्था की जाए, ताकि सिंचाई प्रभावित न हो और फसल सूखने से बच सके।
सतत निगरानी से आया सुधार
अफवाह को लेकर लोग बेवजह तेल भरा रहे थे, इसलिए अचानक मांग में वृद्धि देखी गई। जिला प्रशासन की सख्ती के बाद स्थिति में सुधार आया है।
- कुमार निर्मलेंदु, जिला पूर्ति अधिकारी बलरामपुर