{"_id":"69fb8026206b7c726f0a425a","slug":"salary-withheld-by-showing-living-employee-as-dead-balrampur-news-c-99-1-slko1019-147720-2026-05-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: जिंदा कर्मचारी को ‘मृत’ दिखाकर रोका वेतन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: जिंदा कर्मचारी को ‘मृत’ दिखाकर रोका वेतन
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 06 May 2026 11:23 PM IST
विज्ञापन
फोटो-36-अनुरुद्ध प्रताप तिवारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बलरामपुर। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रांतीय खंड में भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग के कुछ बाबू कर्मचारियों के रिकॉर्ड में जानबूझकर गड़बड़ी कर अवैध वसूली का खेल चला रहे हैं। ताजा मामला मेट अनिरुद्ध प्रताप तिवारी का है, जिन्हें विभागीय अभिलेखों में “मृत” दिखा दिया गया, जबकि वह सेवा में कार्यरत हैं और तीन माह बाद सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
इस गड़बड़ी के चलते उनका वेतन भी रोक दिया गया। जब उन्हें इस बात की जानकारी हुई तो वह हैरान रह गए। आरोप है कि रिकॉर्ड में सुधार कराने के नाम पर उनसे अवैध धन की मांग की गई। अनिरुद्ध तिवारी पीडब्ल्यूडी नियमित वर्क चार्ज कर्मचारी संघ के जिला महामंत्री भी हैं। उन्होंने डीडीओ सहायक के पद पर तैनात बाबू और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाया है। कहा कि विभाग में एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है, जो मानव संपदा पोर्टल पर कर्मचारियों के रिकॉर्ड में त्रुटियां डालता है और फिर उन्हें ठीक करने के नाम पर वसूली करता है। कई कर्मचारियों ने इस संबंध में अधिशासी अभियंता से शिकायत की है, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद अवैध वसूली का सिलसिला जारी है। लंबे समय से एक ही पटल पर जमे कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
वेतन न मिलने पर ऑनलाइन डेटा में मिला फर्जीवाड़ा
वेतन न मिलने पर कर्मचारी अनिरुद्ध ने विभाग में संपर्क किया। कुछ दिनों तक विभाग का एक बाबू आजकल कहते हुए टरकाता रहा। बाद में किसी अन्य कर्मचारी ने पूर्व में ऐसे ही वेतन फंसने की बात कहते हुए ऑनलाइन डेटा देखने को कहा। अनिरुद्ध बताते हैं कि जब उन्होंने मानव संपदा पोर्टल पर अपना ब्योरा चेक किया तो उसमें मृत लिखा मिला। इसके बाद भी उन्हें अंधेरे में रखा गया, इसके बाद भी जब वेतन नहीं आया तो उन्होंने अधिकारियों को पूरी बात बताई।
विज्ञापन
अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड कुमार शैलेंद्र ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। कर्मचारी के रिकार्ड में कोषागार स्तर से कुछ त्रुटि हुई थी, जिसे ठीक करा दिया गया है।
इस गड़बड़ी के चलते उनका वेतन भी रोक दिया गया। जब उन्हें इस बात की जानकारी हुई तो वह हैरान रह गए। आरोप है कि रिकॉर्ड में सुधार कराने के नाम पर उनसे अवैध धन की मांग की गई। अनिरुद्ध तिवारी पीडब्ल्यूडी नियमित वर्क चार्ज कर्मचारी संघ के जिला महामंत्री भी हैं। उन्होंने डीडीओ सहायक के पद पर तैनात बाबू और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाया है। कहा कि विभाग में एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है, जो मानव संपदा पोर्टल पर कर्मचारियों के रिकॉर्ड में त्रुटियां डालता है और फिर उन्हें ठीक करने के नाम पर वसूली करता है। कई कर्मचारियों ने इस संबंध में अधिशासी अभियंता से शिकायत की है, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद अवैध वसूली का सिलसिला जारी है। लंबे समय से एक ही पटल पर जमे कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
वेतन न मिलने पर ऑनलाइन डेटा में मिला फर्जीवाड़ा
वेतन न मिलने पर कर्मचारी अनिरुद्ध ने विभाग में संपर्क किया। कुछ दिनों तक विभाग का एक बाबू आजकल कहते हुए टरकाता रहा। बाद में किसी अन्य कर्मचारी ने पूर्व में ऐसे ही वेतन फंसने की बात कहते हुए ऑनलाइन डेटा देखने को कहा। अनिरुद्ध बताते हैं कि जब उन्होंने मानव संपदा पोर्टल पर अपना ब्योरा चेक किया तो उसमें मृत लिखा मिला। इसके बाद भी उन्हें अंधेरे में रखा गया, इसके बाद भी जब वेतन नहीं आया तो उन्होंने अधिकारियों को पूरी बात बताई।
अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड कुमार शैलेंद्र ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। कर्मचारी के रिकार्ड में कोषागार स्तर से कुछ त्रुटि हुई थी, जिसे ठीक करा दिया गया है।