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Banda News: काम के अधिक दबाव से बीएलओ को हार्ट अटैक, ग्वालियर रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 18 Feb 2026 12:46 AM IST
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फोटो - 21 ग्वालियर में भर्ती बीएलओ। स्त्रोत : परिजन
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बांदा। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के बढ़ते दबाव के चलते बीएलओ (मतदाता सूची का सत्यापन करने वाली महिला कर्मचारी) को हार्ट अटैक आ गया। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल से ग्वालियर रेफर किया गया है। जहां वे आईसीयू में भर्ती हैं। अनीता रावत प्राथमिक विद्यालय गंछा में तैनात शिक्षा मित्र हैं औरसदर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कहला की बीएलओ हैं।
अनीता रावत के देवर सुरेश रावत ने बताया कि लक्ष्य के सापेक्ष पुनरीक्षण का काम पूरा न होने पर अधिकारियों ने अनीता को अलग-अलग तिथियों में तीन बार कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बैठकों में भी उन्हें अपमानित किया जाता था, जिससे वे काफी तनाव में थीं। सोमवार शाम को उनके सीने में तेज दर्द उठा, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए ग्वालियर रेफर कर दिया। सुरेश रावत ने आरोप लगाया कि अनीता ने कुछ दिनों पहले काम के अत्यधिक दबाव और बीमारी को लेकर बीआरसी (खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय) में प्रार्थनापत्र दिया था लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं दी गई। इसके बजाय, खंड शिक्षा अधिकारी ने उन्हें अपमानित किया और काम का दबाव बनाए रखा। एईआरओ (सहायक निर्वाचन अधिकारी) ने भी काम को सही तरीके से और समय पर पूरा न करने पर नोटिस जारी किया था।
एसडीएम नमन मेहता ने कहा कि यदि बीएलओ की तबीयत खराब थी तो उन्हें अधिकारियों को बताना चाहिए था। उनकी मदद की जाती। वहीं, बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) अव्यक्तराम तिवारी का कहना है कि उन्हें अनीता की बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है और उन्होंने कभी भी बीमारी से संबंधित कोई प्रार्थनापत्र नहीं दिया।
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अनीता रावत के देवर सुरेश रावत ने बताया कि लक्ष्य के सापेक्ष पुनरीक्षण का काम पूरा न होने पर अधिकारियों ने अनीता को अलग-अलग तिथियों में तीन बार कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बैठकों में भी उन्हें अपमानित किया जाता था, जिससे वे काफी तनाव में थीं। सोमवार शाम को उनके सीने में तेज दर्द उठा, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए ग्वालियर रेफर कर दिया। सुरेश रावत ने आरोप लगाया कि अनीता ने कुछ दिनों पहले काम के अत्यधिक दबाव और बीमारी को लेकर बीआरसी (खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय) में प्रार्थनापत्र दिया था लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं दी गई। इसके बजाय, खंड शिक्षा अधिकारी ने उन्हें अपमानित किया और काम का दबाव बनाए रखा। एईआरओ (सहायक निर्वाचन अधिकारी) ने भी काम को सही तरीके से और समय पर पूरा न करने पर नोटिस जारी किया था।
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एसडीएम नमन मेहता ने कहा कि यदि बीएलओ की तबीयत खराब थी तो उन्हें अधिकारियों को बताना चाहिए था। उनकी मदद की जाती। वहीं, बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) अव्यक्तराम तिवारी का कहना है कि उन्हें अनीता की बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है और उन्होंने कभी भी बीमारी से संबंधित कोई प्रार्थनापत्र नहीं दिया।