{"_id":"6a08c04ddf401bb4550bcfba","slug":"bundles-of-beedis-in-the-first-aid-box-instead-of-medicines-banda-news-c-212-1-bnd1017-146560-2026-05-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: दवा की जगह फर्स्ट एड बाॅक्स में बीडी के बंडल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: दवा की जगह फर्स्ट एड बाॅक्स में बीडी के बंडल
विज्ञापन
फोटो - 04 यात्री के खोलने पर फर्स्ट एड बाक्स से निकला कपड़ा। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। रोडवेज बसों में सफर के दाैरान जरूरी दवाएं और मरहम पट्टी साथ लेकर चलें। दरअसल तमाम बसों में फर्स्ट एड बॉक्स लगे ही नहीं हैं। जिन बसों में यह लगे हैं उनमें दवाएं और मरहम पट्टी नहीं है। शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल के दौरान जब बसों के फर्स्ट एड बॉक्सों को खोला गया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। इनमें दवा की जगह गाड़ी पोछने वाला कपड़ा और बीडी के बंडल मिले।
बसों के परिचालकों ने बताया कि दवा चोरी न हो जाए इसलिए वह घर ले जाते हैं। आज लाना भूल गए हैं। कुछ ने कहा कि जब किसी बड़े अधिकारी का निरीक्षण या कोई बड़ा कार्यक्रम होता है तब दवा दी जाती है। बाद में वापस ले ली जाती है। दवाओं में पैरासिटामोल गोली, बीटाडीन मरहम और पट्टी ही रहती है। बस में यात्रा कर रहीं उमा गुप्ता, संतोष कुमार, बलबीर व सुशांत ने बताया कि यात्रा के दौरान बस में दवा तो दूर पानी भी नसीब नहीं हुआ। बोतल खरीद कर प्यास बुझानी पड़ी।
-- -- --
बांदा-बिंदकी-कानपुर
शुक्रवार समय करीब 11 बजे बस स्टैंड में बांदा डिपो की बांदा-बिंदकी-कानपुर जाने वाली बस खड़ी थी। यात्रियों की मौजूदगी में बस का फर्स्ट एड बाॅक्स खोला तो खाली पड़ा था। महिला कंडक्टर ने बताया कि दवाएं मेरे पास हैं जब दिखाने के लिए कहा तो बोली घर में भूल आए हैं। कल जरूर ले आएंगे।
विज्ञापन
-- -- --
बांदा-फतेहपुर-कानपुर
समय करीब 11:15 बजे बांदा डिपो की बांदा-फतेहपुर कानपुर बस स्टैंड पर खड़ी थी। बस में फर्स्ट एड बाक्स टूटा पड़ा था। कंडक्टर विवेक ने बताया कि दवाएं बहुत पहले मिली थीं। अब एक्सपायर हो गई थीं जिन्हें फेंक दिया। पिछले छह महीने से कोई दवा नहीं मिली है।
-- -- -- -
बांदा-इटावा राजधानी एक्सप्रेस
समय करीब 12 बजे स्टैंड पर बांदा-कानपुर-इटावा राजधानी एक्सप्रेस की स्थिति देखी गई। बस में यात्री सवार थे। फर्स्ट एड बाक्स लगा था। इसे खोलने पर गाड़ी पोछने वाला कपड़ा और बीड़ी का बंडल मिला। कंडक्टर ने बताया कि साहब दवा मिलती ही नहीं तो बाॅक्स में क्या रखें। कभी कभार मरहम-पट्टी मिली भी तो वह खराब हो गई।
-- -- -- -
उरई-हमीरपुर-बांदा
समय 12:10 बजे स्टैंड में उरई डिपो की उरई-हमीरपुर-बांदा बस खड़ी थी। बस में फर्स्ट एड बाॅक्स टूटा पड़ा था। कंडक्टर बलबीर ने बताया कि कि कभी दवाएं दी ही नहीं जाती हैं। कोई बड़े अधिकारी का निरीक्षण होता है तो दवाएं मिल जाती है लेकिन बाद में इन्हें वापस लिया जाता है।
-- -- -- --
ओआरएस भी नहीं दिए, खिंचवा ली फोटो
बांदा। राजाराम, रामभजन सहित अन्य परिचालकों ने बताया कि मुख्यालय से गर्मी में कंडक्टर को पानी और ओआरएस के पैकेट देने के आदेश हैं। एआरएम व कुछ कर्मचारियों ने दो चार कंडक्टरों को पानी और ओआरएस के पैकेट देकर फोटो खिंचवाकर मुख्यालय भेज दी। 98 फीसदी कंडक्टरों को ओआरएस के पैकेट नहीं दिए गए हैं। यात्री तो दूर गर्मी में कंडक्टर की सुरक्षा के प्रति भी विभाग लापरवाह है। (संवाद)
मुझे आरएम का प्रभार लिए डेढ़ माह हुए हैं। पूर्व में परिचालकों को दवाएं किट दिए जाने की बात बताई जा रही है। इस मामले की जानकारी की जाएगी। यदि कंडक्टरों को दवाएं नहीं दी गई है तो किट दिलवाई जाएगी। -रामलवट औलट, प्रभारी क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम, चित्रकूटधाम मंडल बांदा
विज्ञापन
बसों के परिचालकों ने बताया कि दवा चोरी न हो जाए इसलिए वह घर ले जाते हैं। आज लाना भूल गए हैं। कुछ ने कहा कि जब किसी बड़े अधिकारी का निरीक्षण या कोई बड़ा कार्यक्रम होता है तब दवा दी जाती है। बाद में वापस ले ली जाती है। दवाओं में पैरासिटामोल गोली, बीटाडीन मरहम और पट्टी ही रहती है। बस में यात्रा कर रहीं उमा गुप्ता, संतोष कुमार, बलबीर व सुशांत ने बताया कि यात्रा के दौरान बस में दवा तो दूर पानी भी नसीब नहीं हुआ। बोतल खरीद कर प्यास बुझानी पड़ी।
विज्ञापन
बांदा-बिंदकी-कानपुर
शुक्रवार समय करीब 11 बजे बस स्टैंड में बांदा डिपो की बांदा-बिंदकी-कानपुर जाने वाली बस खड़ी थी। यात्रियों की मौजूदगी में बस का फर्स्ट एड बाॅक्स खोला तो खाली पड़ा था। महिला कंडक्टर ने बताया कि दवाएं मेरे पास हैं जब दिखाने के लिए कहा तो बोली घर में भूल आए हैं। कल जरूर ले आएंगे।
विज्ञापन
बांदा-फतेहपुर-कानपुर
समय करीब 11:15 बजे बांदा डिपो की बांदा-फतेहपुर कानपुर बस स्टैंड पर खड़ी थी। बस में फर्स्ट एड बाक्स टूटा पड़ा था। कंडक्टर विवेक ने बताया कि दवाएं बहुत पहले मिली थीं। अब एक्सपायर हो गई थीं जिन्हें फेंक दिया। पिछले छह महीने से कोई दवा नहीं मिली है।
बांदा-इटावा राजधानी एक्सप्रेस
समय करीब 12 बजे स्टैंड पर बांदा-कानपुर-इटावा राजधानी एक्सप्रेस की स्थिति देखी गई। बस में यात्री सवार थे। फर्स्ट एड बाक्स लगा था। इसे खोलने पर गाड़ी पोछने वाला कपड़ा और बीड़ी का बंडल मिला। कंडक्टर ने बताया कि साहब दवा मिलती ही नहीं तो बाॅक्स में क्या रखें। कभी कभार मरहम-पट्टी मिली भी तो वह खराब हो गई।
उरई-हमीरपुर-बांदा
समय 12:10 बजे स्टैंड में उरई डिपो की उरई-हमीरपुर-बांदा बस खड़ी थी। बस में फर्स्ट एड बाॅक्स टूटा पड़ा था। कंडक्टर बलबीर ने बताया कि कि कभी दवाएं दी ही नहीं जाती हैं। कोई बड़े अधिकारी का निरीक्षण होता है तो दवाएं मिल जाती है लेकिन बाद में इन्हें वापस लिया जाता है।
ओआरएस भी नहीं दिए, खिंचवा ली फोटो
बांदा। राजाराम, रामभजन सहित अन्य परिचालकों ने बताया कि मुख्यालय से गर्मी में कंडक्टर को पानी और ओआरएस के पैकेट देने के आदेश हैं। एआरएम व कुछ कर्मचारियों ने दो चार कंडक्टरों को पानी और ओआरएस के पैकेट देकर फोटो खिंचवाकर मुख्यालय भेज दी। 98 फीसदी कंडक्टरों को ओआरएस के पैकेट नहीं दिए गए हैं। यात्री तो दूर गर्मी में कंडक्टर की सुरक्षा के प्रति भी विभाग लापरवाह है। (संवाद)
मुझे आरएम का प्रभार लिए डेढ़ माह हुए हैं। पूर्व में परिचालकों को दवाएं किट दिए जाने की बात बताई जा रही है। इस मामले की जानकारी की जाएगी। यदि कंडक्टरों को दवाएं नहीं दी गई है तो किट दिलवाई जाएगी। -रामलवट औलट, प्रभारी क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम, चित्रकूटधाम मंडल बांदा

फोटो - 04 यात्री के खोलने पर फर्स्ट एड बाक्स से निकला कपड़ा। संवाद

फोटो - 04 यात्री के खोलने पर फर्स्ट एड बाक्स से निकला कपड़ा। संवाद

फोटो - 04 यात्री के खोलने पर फर्स्ट एड बाक्स से निकला कपड़ा। संवाद