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Banda News: जमीन के विवाद के दो मामलों में आठ दोषी, अलग-अलग सजा
Sat, 16 May 2026 12:41 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 16 May 2026 12:41 AM IST
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बांदा। जिले में एक ही जमीन विवाद से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में विशेष न्यायाधीश डकैती गगन कुमार भारती की अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया है। इन फैसलों में कुल आठ लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
पहला मामला 6 अक्टूबर 2005 को कोतवाली देहात के पचनेही गांव में फसल बोआई के दौरान मारपीट और धमकी से संबंधित था। इस मामले में नकुल सिंह, मनोज, राकेश सिंह और मोरध्वज सिंह को दोषी पाया गया। जिन्हें तीन-तीन साल के कारावास सुनाया गया है। अदालत ने इन चारों पर सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जिसका भुगतान न करने पर तीन-तीन महीने की अतिरिक्त कैद होगी। यह मामला विजय सिंह की तहरीर पर दर्ज हुआ था, जिसमें फायरिंग के दौरान विजय सिंह को छर्रे लगे थे। छीना-झपटी में नकुल सिंह द्वारा चलाई गई गोली मोरध्वज सिंह के पेट में लगी थी। अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए थे।
उसी 6 अक्टूबर 2005 की घटना से जुड़े दूसरे मामले में जसपुरा थाना क्षेत्र के तरौड़ा गांव में लूटपाट, जानलेवा हमला और धमकी देने के आरोप थे। अदालत ने उत्तम सिंह, निर्मल सिंह, शत्रुघ्न सिंह और विजय सिंह को दोषी ठहराते हुए उन्हें सात-सात साल के कठोर कारावास सुनाया है। इन चारों दोषियों पर पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे जमा न करने पर सात-सात माह की अतिरिक्त जेल भुगतनी होगी। यह मामला विनोद सिंह की प्राथमिकी से जुड़ा था, जिसमें मोरध्वज सिंह को पेट में गोली लगी थी और रामखिलावन की राइफल छीन ली गई थी। पुलिस ने आरोपियों से तमंचे और बंदूक बरामद किए थे और सुनवाई के दौरान छह गवाह पेश किए गए।
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पहला मामला 6 अक्टूबर 2005 को कोतवाली देहात के पचनेही गांव में फसल बोआई के दौरान मारपीट और धमकी से संबंधित था। इस मामले में नकुल सिंह, मनोज, राकेश सिंह और मोरध्वज सिंह को दोषी पाया गया। जिन्हें तीन-तीन साल के कारावास सुनाया गया है। अदालत ने इन चारों पर सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जिसका भुगतान न करने पर तीन-तीन महीने की अतिरिक्त कैद होगी। यह मामला विजय सिंह की तहरीर पर दर्ज हुआ था, जिसमें फायरिंग के दौरान विजय सिंह को छर्रे लगे थे। छीना-झपटी में नकुल सिंह द्वारा चलाई गई गोली मोरध्वज सिंह के पेट में लगी थी। अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए थे।
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उसी 6 अक्टूबर 2005 की घटना से जुड़े दूसरे मामले में जसपुरा थाना क्षेत्र के तरौड़ा गांव में लूटपाट, जानलेवा हमला और धमकी देने के आरोप थे। अदालत ने उत्तम सिंह, निर्मल सिंह, शत्रुघ्न सिंह और विजय सिंह को दोषी ठहराते हुए उन्हें सात-सात साल के कठोर कारावास सुनाया है। इन चारों दोषियों पर पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे जमा न करने पर सात-सात माह की अतिरिक्त जेल भुगतनी होगी। यह मामला विनोद सिंह की प्राथमिकी से जुड़ा था, जिसमें मोरध्वज सिंह को पेट में गोली लगी थी और रामखिलावन की राइफल छीन ली गई थी। पुलिस ने आरोपियों से तमंचे और बंदूक बरामद किए थे और सुनवाई के दौरान छह गवाह पेश किए गए।
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