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बहानेबाजी : दर्द से 10 कदम चलना मुश्किल, मोतियाबिंद पक गया है दिखाई नहीं देता
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 10 May 2026 12:22 AM IST
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बांदा। जनगणना 2027 के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगते ही सरकारी कार्यालयों में बीमारियों की बाढ़ सी आ गई है। कई कर्मचारी घुटनों के दर्द या मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का हवाला देकर अपनी ड्यूटी कटवाने के लिए प्रयासरत हैं। इस मामले में मेडिकल बोर्ड ने 132 कर्मचारियों के प्रार्थना पत्रों का परीक्षण किया, जिसमें 99 को जनगणना ड्यूटी के लिए पूरी तरह फिट पाया गया।
जनगणना के लिए विभिन्न विभागों, विशेषकर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ड्यूटी की जानकारी मिलते ही कई कर्मचारियों ने बीमारियों का बहाना बनाकर इससे बचने की कोशिश की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 से अधिक कर्मचारियों ने घुटनों के दर्द का हवाला देते हुए कहा कि वे चल-फिर नहीं सकते, जबकि अन्य ने आंखों में मोतियाबिंद होने और साफ न दिखने की बात कही।
इन कर्मचारियों ने पहले स्थानीय अधिकारियों जैसे एसडीएम, ईओ नगर पालिका, बीएसए को आवेदन दिए लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने सीधे जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से संपर्क साधा।
मेडिकल बोर्ड के हस्तक्षेप और निर्णय
जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी ने ऐसे 132 आवेदन मेडिकल बोर्ड को भेजे, ताकि कर्मचारियों की बीमारी की वास्तविकता का परीक्षण किया जा सके और यह पता लगाया जा सके कि वे जनगणना ड्यूटी करने के लिए फिट हैं या नहीं। मेडिकल बोर्ड ने गहन परीक्षण के उपरांत 132 में से 99 कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी करने के योग्य पाया। वहीं 33 कर्मचारियों को अनफिट पाया है।
मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों को मेडिकल बोर्ड ने अनफिट पाया है, उनकी ड्यूटी काटने और उनके स्थान पर दूसरे कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जनगणना एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है और इसमें किसी भी कर्मचारी की बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कामचोर कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जनगणना का कार्य नियत समय पर पूरा किया जाएगा।
अंकीय जनगणना में देना होगा घर-परिवार का पूरा चिट्ठा
बांदा। देश की पहली अंकीय जनगणना में घर के चौके से लेकर शौचालय तक की जानकारी ली जाएगी। गृह स्वामियों को मुख्य अनाज और शौचालय के प्रकार सहित कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे।
गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार के मुखिया से मुख्य अनाज, शौचालय का प्रकार (देशी या विदेशी शैली), मकान का निर्माण सामग्री, मालिक, विवाहित सदस्यों की संख्या, रसोई गैस या पाइप वाली प्राकृतिक गैस का उपयोग, दूरदर्शन, आकाशवाणी, लैपटॉप, संगणक, दो या चार पहिया वाहन की उपलब्धता, पानी-बिजली के स्रोत और जाति जैसी जानकारी पूछेंगे।
अपर जिलाधिकारी कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि परिवार सात मई से 21 मई, 2026 तक स्वगणना कर सकेंगे। इसके बाद 22 मई से 20 जून, 2026 तक पर्यवेक्षक गणना करेंगे। प्रगणकों व पर्यवेक्षकों को 22 अप्रैल, 2026 से प्रशिक्षण दिया जाएगा और यह कार्य जनगणना अधिनियम 1948 के तहत गोपनीय रखा जाएगा।
जनगणना के लिए विभिन्न विभागों, विशेषकर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ड्यूटी की जानकारी मिलते ही कई कर्मचारियों ने बीमारियों का बहाना बनाकर इससे बचने की कोशिश की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 से अधिक कर्मचारियों ने घुटनों के दर्द का हवाला देते हुए कहा कि वे चल-फिर नहीं सकते, जबकि अन्य ने आंखों में मोतियाबिंद होने और साफ न दिखने की बात कही।
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इन कर्मचारियों ने पहले स्थानीय अधिकारियों जैसे एसडीएम, ईओ नगर पालिका, बीएसए को आवेदन दिए लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने सीधे जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से संपर्क साधा।
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जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी ने ऐसे 132 आवेदन मेडिकल बोर्ड को भेजे, ताकि कर्मचारियों की बीमारी की वास्तविकता का परीक्षण किया जा सके और यह पता लगाया जा सके कि वे जनगणना ड्यूटी करने के लिए फिट हैं या नहीं। मेडिकल बोर्ड ने गहन परीक्षण के उपरांत 132 में से 99 कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी करने के योग्य पाया। वहीं 33 कर्मचारियों को अनफिट पाया है।
मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों को मेडिकल बोर्ड ने अनफिट पाया है, उनकी ड्यूटी काटने और उनके स्थान पर दूसरे कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जनगणना एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है और इसमें किसी भी कर्मचारी की बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कामचोर कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जनगणना का कार्य नियत समय पर पूरा किया जाएगा।
अंकीय जनगणना में देना होगा घर-परिवार का पूरा चिट्ठा
बांदा। देश की पहली अंकीय जनगणना में घर के चौके से लेकर शौचालय तक की जानकारी ली जाएगी। गृह स्वामियों को मुख्य अनाज और शौचालय के प्रकार सहित कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे।
गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार के मुखिया से मुख्य अनाज, शौचालय का प्रकार (देशी या विदेशी शैली), मकान का निर्माण सामग्री, मालिक, विवाहित सदस्यों की संख्या, रसोई गैस या पाइप वाली प्राकृतिक गैस का उपयोग, दूरदर्शन, आकाशवाणी, लैपटॉप, संगणक, दो या चार पहिया वाहन की उपलब्धता, पानी-बिजली के स्रोत और जाति जैसी जानकारी पूछेंगे।
अपर जिलाधिकारी कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि परिवार सात मई से 21 मई, 2026 तक स्वगणना कर सकेंगे। इसके बाद 22 मई से 20 जून, 2026 तक पर्यवेक्षक गणना करेंगे। प्रगणकों व पर्यवेक्षकों को 22 अप्रैल, 2026 से प्रशिक्षण दिया जाएगा और यह कार्य जनगणना अधिनियम 1948 के तहत गोपनीय रखा जाएगा।