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Banda News: होली से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्ती, 20 नमूने जांच को भेजे
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 28 Feb 2026 11:17 PM IST
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-खोया, पनीर, तेल, मसाले समेत कई उत्पाद जांच के दायरे में, रिपोर्ट आने के बाद होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। होली पर्व को लेकर मिलावट पर रोक लगाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विशेष अभियान तेज कर दिया है। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ एवं जिलाधिकारी बांदा के निर्देशों के अनुपालन में जनपद में लगातार नमूने भरने और प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है।
शनिवार को शहर के छोटी बाजार स्थित एक डेयरी से पनीर का नमूना, जिला अस्पताल परिसर में संचालित एक चाय प्रतिष्ठान से भैंस के दूध का नमूना जांच के लिए लिया गया। इसके अलावा आश्रम पद्धति विद्यालय, हरदौली में बच्चों को परोसे जाने वाले तैयार भोजन दाल, रोटी, सब्जी और चावल के नमूने भी परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
सहायक आयुक्त खाद्य जेपी तिवारी ने बताया कि कुल 20 नमूने जांच के लिए एकत्र किए जा चुके हैं। इनमें खोआ, दूध, पनीर, पेड़ा, रंगीन कचरी, सरसों का तेल, सब्जी मसाला, मैदा, नमकीन, सूखी इमरती, माइक्रोनी, रिफाइंड सोयाबीन तेल और बेसन आदि शामिल हैं। सभी नमूनों को राजकीय प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि संदिग्ध खाद्य पदार्थों की सूचना तुरंत दें, ताकि त्योहार के अवसर पर शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
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पांच वर्षों में बड़ी संख्या में नमूने फेल, कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल
बांदा। खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। बीते पांच सालों में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूनों में बड़ी संख्या मानकों पर खरी नहीं उतरी। रिपोर्ट आने में देरी के दौरान वही संदिग्ध उत्पाद खुलेआम बाजार में बिकते रहे, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा मंडराता रहा।
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आंकड़ों में सच्चाई
विभागीय अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक कुल 828 नमूने जांच के लिए भेजे गए। इनमें से 368 नमूने फेल पाए गए, जबकि कई मामलों में रिपोर्ट आने में लंबा समय लगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट में देरी से मिलावटी सामान की बिक्री पर समय रहते रोक नहीं लग पाती।त्योहारों के दौरान मिठाइयों, दूध, खोआ, मसाले और खाद्य तेलों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट का जोखिम भी बढ़ जाता है। विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर दुकानों से नमूने लिए जाते हैं लेकिन कार्रवाई की गति और दंड प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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कैसे हो रही है मिलावट
सहायक खाद्य आयुक्त जेपी तिवारी बताते हैं कि निरीक्षण में सामने आया है कि मावा में सिंथेटिक तत्व, मसालों में रंग, सरसों तेल में अन्य सस्ते तेलों की मिलावट और मिठाइयों में कृत्रिम रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट, लीवर और किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
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उपभोक्ताओं के लिए सलाह :
- खुला और सस्ता खाद्य पदार्थ खरीदने से बचें।
- पैकेजिंग पर लाइसेंस नंबर और निर्माण तिथि अवश्य जांचें।
- स्वाद, रंग या गंध में असामान्यता लगे तो शिकायत करें।
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बांदा। होली पर्व को लेकर मिलावट पर रोक लगाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विशेष अभियान तेज कर दिया है। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ एवं जिलाधिकारी बांदा के निर्देशों के अनुपालन में जनपद में लगातार नमूने भरने और प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है।
शनिवार को शहर के छोटी बाजार स्थित एक डेयरी से पनीर का नमूना, जिला अस्पताल परिसर में संचालित एक चाय प्रतिष्ठान से भैंस के दूध का नमूना जांच के लिए लिया गया। इसके अलावा आश्रम पद्धति विद्यालय, हरदौली में बच्चों को परोसे जाने वाले तैयार भोजन दाल, रोटी, सब्जी और चावल के नमूने भी परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
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सहायक आयुक्त खाद्य जेपी तिवारी ने बताया कि कुल 20 नमूने जांच के लिए एकत्र किए जा चुके हैं। इनमें खोआ, दूध, पनीर, पेड़ा, रंगीन कचरी, सरसों का तेल, सब्जी मसाला, मैदा, नमकीन, सूखी इमरती, माइक्रोनी, रिफाइंड सोयाबीन तेल और बेसन आदि शामिल हैं। सभी नमूनों को राजकीय प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि संदिग्ध खाद्य पदार्थों की सूचना तुरंत दें, ताकि त्योहार के अवसर पर शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
पांच वर्षों में बड़ी संख्या में नमूने फेल, कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल
बांदा। खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। बीते पांच सालों में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूनों में बड़ी संख्या मानकों पर खरी नहीं उतरी। रिपोर्ट आने में देरी के दौरान वही संदिग्ध उत्पाद खुलेआम बाजार में बिकते रहे, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा मंडराता रहा।
आंकड़ों में सच्चाई
विभागीय अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक कुल 828 नमूने जांच के लिए भेजे गए। इनमें से 368 नमूने फेल पाए गए, जबकि कई मामलों में रिपोर्ट आने में लंबा समय लगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट में देरी से मिलावटी सामान की बिक्री पर समय रहते रोक नहीं लग पाती।त्योहारों के दौरान मिठाइयों, दूध, खोआ, मसाले और खाद्य तेलों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट का जोखिम भी बढ़ जाता है। विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर दुकानों से नमूने लिए जाते हैं लेकिन कार्रवाई की गति और दंड प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कैसे हो रही है मिलावट
सहायक खाद्य आयुक्त जेपी तिवारी बताते हैं कि निरीक्षण में सामने आया है कि मावा में सिंथेटिक तत्व, मसालों में रंग, सरसों तेल में अन्य सस्ते तेलों की मिलावट और मिठाइयों में कृत्रिम रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट, लीवर और किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह :
- खुला और सस्ता खाद्य पदार्थ खरीदने से बचें।
- पैकेजिंग पर लाइसेंस नंबर और निर्माण तिथि अवश्य जांचें।
- स्वाद, रंग या गंध में असामान्यता लगे तो शिकायत करें।