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Banda News: डेड स्टोर श्रेणी में पहुंचा गंगऊ बांध, आठ बांधों में भी संकट
Sat, 16 May 2026 12:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 16 May 2026 12:05 AM IST
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फोटो - 03 बरियापुर बांध में केन नदी में दिखती चट्टानें। संवाद
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के सभी 10 प्रमुख बांधों में पानी खत्म होने लगा है। इनमें तलहटी की चट्टानें भी दिखाई देने लगी हैं। गंगऊ बांध पूरी तरह खाली होकर डेड स्टोर श्रेणी में आ गया है। बांधों की यह बदहाली मानसूनी बारिश से ही बदल सकेगी। मानसून लेटलतीफ हुआ तो मंडल के चारों जिलों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
जिले की नहरों और तमाम तालाबों को पूरे साल बांधों से ही पानी मिलता है। बांदा को पानी देने वाले गंगऊ और रनगंवा (छतरपुर) बांधों में बचे पानी को सिंचाई विभाग ने पहली मई से 14 मई तक रोस्टर के मुताबिक नहरें चला कर तालाब-पोखर भरने के लिए छोड़ दिया है। इस पानी से खेत सिंचाई की अनुमति नहीं है। केन नदी पर बना गंगऊ बांध डेड स्टोर यानी शून्य हो गया है। रनगंवा बांध में मात्र 28 मिलियन घन मीटर (18 प्रतिशत) पानी शेष है।
इस बांध के भी डेड स्टोर की स्थिति में आ जाने के आसार हैं। मंडल के अन्य आठ बांधों की भी कमोबेश यही स्थिति है। गंगऊ, रनगंवा और बरियारपुर बांधों का कार्य देख रहे सिंचाई विभाग के अवर अभियंता प्रेम प्रकाश वर्मा ने बताया कि रोस्टर के अनुसार रनगंवा से मुख्य कैनाल में पहली से 14 मई तक 1550 क्यूसिक क्षमता से पानी छोड़ा जा चुका है। अब बारिश से ही बांधों में पानी भर सकेगा।
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इनसेट
केन-बेतवा लिंक के लिए गंगऊ खाली किया
केन-बेतवा लिंक परियोजना में दोधन गांव के पास बन रहे बांध व ओरछा (झांसी) तक 222 किमी लंबी नहर निर्माण के लिए गंगऊ बांध का पानी मई माह से पहले ही नहर चला कर जल स्तर घटाया गया है।
चित्रकूटधाम मंडल के बांधों में पानी की स्थिति ( मिलियन घन मीटर) सिंचाई विभाग के अनुसार
बांध पानी प्रतिशत
गंगऊ (छतरपुर) 00 00
रनगंवा (छतरपुर) 28.02 18.01
बरियारपुर (पन्ना) 5.26 41.07
ओहन (चित्रकूट) 09.11 24.01
बरुआ (चित्रकूट) 6.59 28.03
अर्जुन (महोबा) 16.68 28.05
चंद्रावल (महोबा) 11.35 36.08
मझगवा (महोबा) 6.57 25.03
उर्मिल (महोबा) 41.66 36.07
कबरई (महोबा) 14.80 49.08
गंगऊ और रनगंवा बांधों से नहर चला कर पशुओं आदि के लिए पानी छोड़ा गया है। फिलहाल स्थिति गंभीर नहीं है। महोबा में उर्मिल बांध से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। यहां नहर नहीं है।
- सैयद उस्मान अली, मंडल अधीक्षण अभियंता
सिंचाई विभाग, बांदा
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जिले की नहरों और तमाम तालाबों को पूरे साल बांधों से ही पानी मिलता है। बांदा को पानी देने वाले गंगऊ और रनगंवा (छतरपुर) बांधों में बचे पानी को सिंचाई विभाग ने पहली मई से 14 मई तक रोस्टर के मुताबिक नहरें चला कर तालाब-पोखर भरने के लिए छोड़ दिया है। इस पानी से खेत सिंचाई की अनुमति नहीं है। केन नदी पर बना गंगऊ बांध डेड स्टोर यानी शून्य हो गया है। रनगंवा बांध में मात्र 28 मिलियन घन मीटर (18 प्रतिशत) पानी शेष है।
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इस बांध के भी डेड स्टोर की स्थिति में आ जाने के आसार हैं। मंडल के अन्य आठ बांधों की भी कमोबेश यही स्थिति है। गंगऊ, रनगंवा और बरियारपुर बांधों का कार्य देख रहे सिंचाई विभाग के अवर अभियंता प्रेम प्रकाश वर्मा ने बताया कि रोस्टर के अनुसार रनगंवा से मुख्य कैनाल में पहली से 14 मई तक 1550 क्यूसिक क्षमता से पानी छोड़ा जा चुका है। अब बारिश से ही बांधों में पानी भर सकेगा।
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केन-बेतवा लिंक के लिए गंगऊ खाली किया
केन-बेतवा लिंक परियोजना में दोधन गांव के पास बन रहे बांध व ओरछा (झांसी) तक 222 किमी लंबी नहर निर्माण के लिए गंगऊ बांध का पानी मई माह से पहले ही नहर चला कर जल स्तर घटाया गया है।
चित्रकूटधाम मंडल के बांधों में पानी की स्थिति ( मिलियन घन मीटर) सिंचाई विभाग के अनुसार
बांध पानी प्रतिशत
गंगऊ (छतरपुर) 00 00
रनगंवा (छतरपुर) 28.02 18.01
बरियारपुर (पन्ना) 5.26 41.07
ओहन (चित्रकूट) 09.11 24.01
बरुआ (चित्रकूट) 6.59 28.03
अर्जुन (महोबा) 16.68 28.05
चंद्रावल (महोबा) 11.35 36.08
मझगवा (महोबा) 6.57 25.03
उर्मिल (महोबा) 41.66 36.07
कबरई (महोबा) 14.80 49.08
गंगऊ और रनगंवा बांधों से नहर चला कर पशुओं आदि के लिए पानी छोड़ा गया है। फिलहाल स्थिति गंभीर नहीं है। महोबा में उर्मिल बांध से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। यहां नहर नहीं है।
- सैयद उस्मान अली, मंडल अधीक्षण अभियंता
सिंचाई विभाग, बांदा