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Banda News: लॉकडाउन से कम नहीं पटरी दुकानदारों के लिए गैस की किल्लत

संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Tue, 24 Mar 2026 12:32 AM IST
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Gas shortage is no less severe than lockdown for street vendors
फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद - फोटो : काम बंदी के बाद शहर की एक कांच चूड़ी इकाई में पसरा सन्नाटा। संवाद
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बांदा। कोरोना महामारी के बाद एक बार फिर गैस की किल्लत ने जिले के रेहड़ी और पटरी दुकानदारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत ऋण लेकर बड़ी मुश्किल से अपने कारोबार को पटरी पर लौटाने वाले ये छोटे व्यापारी अब गैस सिलिंडर न मिलने से बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि लगभग 20 फीसद खाने-पीने के ठेले और दुकानें एक महीने से बंद पड़ी हैं। दुकानदार हताश हैं और कह रहे हैं कि कोरोना के बाद यह उनकी दूसरी बड़ी बर्बादी है।
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कोरोना काल में लॉकडाउन ने छोटे दुकानदारों की कमर तोड़ दी थी। दुकानें बंद रहने से सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं वर्गों को हुआ था, जिनकी पूंजी ही उनका व्यवसाय थी। लॉकडाउन खत्म होने के बाद, जब उनके पास दुकान में सामान खरीदने के लिए भी रुपये नहीं बचे थे, तब सरकार ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की शुरुआत की। इस योजना के माध्यम से मामूली ब्याज दर पर छोटे दुकानदारों को तीन किस्तों में 80 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया गया।
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जिले में 31 हजार से अधिक छोटे दुकानदारों ने इस योजना का लाभ उठाया और अपना कारोबार फिर से शुरू किया, पूंजी जुटाई लेकिन, हाल के दिनों में गैस सिलिंडरों की किल्लत ने इन छोटे कारोबारियों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। पिछले एक महीने से गैस सिलिंडर न मिलने के कारण खाने-पीने के ठेले और छोटी दुकानें बंद पड़ी हैं। इससे दुकानदारों की जमा-पूंजी अब घर के खर्चों को चलाने में इस्तेमाल हो रही है, जिससे भविष्य की चिंता बढ़ गई है।
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कर्ज लेकर शुरू किया धंध, अब हुआ बंद
राधिका चाट विक्रेता छोटू उर्फ पप्पू का कहना है कि कोरोना के बाद स्वनिधि योजना से कर्ज लेकर चाट का ठेला लगाना शुरू किया। अब गैस सिलिंडर न मिलने से ठेला बंद हो गया है। 15 दिन से एक रुपये नहीं कमाया।

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कोरोना के बाद दूसरी बार देखे बुरे दिन
साईं कचौड़ी सेंटर के मालिक भूरा का कहना है कि कोरोना के बाद दूसरी बार ऐसे बुरे दिन देखे हैं। गैस न मिलने से धंधा पूरी तरह से बंद है। घर के खाने पीने में पूंजी भी खर्च हो रही है।

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ब्लैक में मिल रहा सिलिंडर
संतोष साहू का कहना है कि पराठे बेचकर घर का खर्च चला रहे हैं। गैस सिलिंडर न मिलने से कई दिन तक ठेला बंद रहा। अब घर से चूल्हे में सब्जी बनाकर ले आते हैं। यहां पर ब्लैक में गैस लेकर पराठे बना रहे हैं।
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फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद

फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद- फोटो : काम बंदी के बाद शहर की एक कांच चूड़ी इकाई में पसरा सन्नाटा। संवाद

फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद

फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद- फोटो : काम बंदी के बाद शहर की एक कांच चूड़ी इकाई में पसरा सन्नाटा। संवाद

फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद

फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद- फोटो : काम बंदी के बाद शहर की एक कांच चूड़ी इकाई में पसरा सन्नाटा। संवाद

फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद

फोटो - 20 गैस एजेंसी के बाहर लगा वितरण न होने का बैनर। संवाद- फोटो : काम बंदी के बाद शहर की एक कांच चूड़ी इकाई में पसरा सन्नाटा। संवाद

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