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Banda News: चार दिन और तीन रात नहीं सोए, हर पल बेचैनी भरा गुजरा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 10 May 2026 11:57 PM IST
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फोटो - 14 पुलिस लाइन नवीन सभागार में एएसपी के बगल में बैठा मामा के चंगुल से मुक्त हुआ हर्षित, उ
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बांदा। टूट चुके थे हम, पुलिस बंधाती थी धैर्य, बच्चे के जिंदा होने का विश्वास दिलाती थी, चार दिन और तीन रात नहीं सोए, एक-एक पल पहाड़ जैसा लगता था, जब बच्चा मिला तो दिल को सुकून आया। अपहरण कांड में पुलिस टीम के साथ पूरे ऑपरेशन में शामिल पिता ने यह बात रविवार को कही। बच्चे से मिलकर उन्हें उत्सव जैसा लगा। घर में भी उत्सव सा माहौल है, बस टीस है कि अपने ने ही दगा किया।
बबेरू कोतवाली क्षेत्र के कृष्णा नगर मोहल्ला निवासी एल्यूमिनियम दरवाजा व्यापारी अनिल कुमार, उनकी पत्नी रश्मि देवी व दोनों बच्चे हर्षित (10) और गायत्री (4) रविवार को पुलिस लाइन स्थित नवीन सभागार पहुंचे। हर्षित के पिता व्यापारी अनिल कुमार ने बताया कि वह बृहस्पतिवार सात मई को दोपहर 12 बजे उसके बेटे का अपहरण किया गया था।
शाम छह बजे उन्हें यह जानकारी हो सकी कि उनके बेटे का अपहरण कर लिया गया है। बृहस्पतिवार की पूरी रात, शुक्रवार का पूरा दिन, रात, शनिवार का दिन और पूरी रात से वह लगातार जाग रहे हैं। एक पल को भी उन्हें नींद नहीं आई। अनिल का कहना है कि वह पूरी तरह से टूट चुके थे। अपहरणकर्ताओं का पीछा करते हुए पुलिस टीम के साथ जब आगरा पहुंची तो वहां अपहरणकर्ताओं की लोकेशन मिलनी बंद हुई तो दिल कांप गया था। ऐसे में साथ चल रही पुलिस टीम उन्हें धैर्य बंधाती, बच्चे के सकुशल होने का प्रमाण देती। तब जाकर उनकी बेचैनी कुछ कम होती।
इस बीच घर में बैठी पत्नी रश्मि से भी बीच-बीच में बात होती, उनका रोना सुनकर और दिल बैठ जाता। हालांकि सतत प्रयास और पुलिस की तत्परता से उनका बेटा उन्हें सकुशल मिल गया लेकिन मन में एक टीस जरूर है कि अपने ने ही उनके साथ दगा किया।
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20 अप्रैल को बनाई थी भांजे के अपहरण की योजना
बांदा। पुलिस गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी महोबा के सूपा गांव निवासी रामजी ने बताया कि उनका मकसद सिर्फ रुपये लेना था। रुपया मिल जाता तो वह बच्चे को मुक्त कर देते। रामजी के मुताबिक, जीजा अनिल कुमार के शिक्षक पिता हर प्रसाद शिक्षक को रिटायरमेंट का करीब 40 लाख रुपये मिलना था। इसकी जानकारी उसे हो गई थी। उत्तराखंड के देहरादून और ऋषिकेश में घूमने के दौरान 20 अप्रैल को उसने अपने साथी सुमित और अनीस से यह चर्चा की थी।
चर्चा में भांजे का अपहरण करने की शैतानी सोच उस पर हावी हो गई थी। साथियों ने भी कहा कि किसी को शक नहीं होगा कि तुमने अपहरण किया है। रुपये मिलते ही बच्चा लौटा देंगे, इसके लिए रामजी ने ही मनगढ़ंत कहानी भी रची थी। अपनी बहन रश्मि को फोन करके कहा था कि उसने एक ज्योतिष से दिखवाया है कि हर्षित को कुछ लोग उठा ले गए हैं, वह पंजाब में हैं।
10 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। बहन को विश्वास दिलाने के लिए उसने बच्चे का पांच सेकेंड का वीडियो भी बनाकर भेजा था कि उसकी बहन यह समझे कि मैं सच बोल रहा हूं लेकिन उसे पता नहीं था कि पुलिस इतनी जल्दी सक्रिय हो जाएगी और उन तक पहुंच जाएगी। कार सुमित चला रहा था। वह लोग ऋषिकेश से हरिद्वार वहां से बरेली, सीतापुर होते हुए बबेरू पहुंचे थे लेकिन उनकी मंशा पर पुलिस ने पानी फेर दिया।
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मामा ने पराठा खिलाया, कपड़े दिलाने की कही बात
बांदा। मामा के चंगुल से मुक्त हुआ मासूम हर्षित बोला, मामा घुमाने ले गए थे। रास्ते में पराठा भी खिलाया। कपड़े दिलाकर और कार में घुमाकर वापस घर छोड़ने की कही थी बात। रास्ते में पूछा, मामा कहां ले जा रहे हो, तो बताया कि तुम्हें घुमाने ले जा रहे हैं, मम्मी-पापा को बता दिया है। कार में ही उसने कहा कि छोटी बहन गायत्री की याद आ रही है, तो कहा कि उसे भी ले आएंगे। अब तुम आराम करो। बीच-बीच में कार रोककर बिस्कुट, पानी, चाय भी पिलाई थी। पुलिस सभागार में मासूम हर्षित की बहन गायत्री बोली, भैया को मामा ले गया था।
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सगे भाई की करतूत से व्यथित दिखीं रश्मि
बांदा। सगे भाई की करतूत से व्यथित हर्षित की मां रश्मि देवी ने बताया कि उनके पांच भाई हैं। रामजी उनका चौथे नंबर का भाई है। पहले यह सही था, चार साल से गलत संगत में पड़ गया। तीन साल पहले इसने चोरी से उनके शिक्षक ससुर हरप्रसाद के खाते से साढ़े तीन लाख रुपये पार कर दिए थे। जानकारी होने पर घर में दबाव डालने में रामजी ने डेढ़ लाख लौटा दिए थे, लेकिन दो लाख रुपये नहीं लौटा रहा था। रामजी की हरकतों से आजिज होकर जीजा अनिल ने रामजी पर घर आने-जाने में प्रतिबंध लगा दिया था। वह अपने सगे भाई की हरकत में थोड़ा शर्मिंदा भी दिखाई दीं, लेकिन बच्चा मिलने की खुशी भी झलक रही थी।
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बच्चे को तलाश लिया गया है। पुलिस टीम को पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल की ओर से बबेरू कोतवाल राजेंद्र सिंह राजावत, उपनिरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी, अरविंद, एसओजी व सर्विलांस की टीम को 25 हजार का इनाम दिया गया है।
शिवराज
अपर पुलिस अधीक्षक, बांदा।
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बबेरू कोतवाली क्षेत्र के कृष्णा नगर मोहल्ला निवासी एल्यूमिनियम दरवाजा व्यापारी अनिल कुमार, उनकी पत्नी रश्मि देवी व दोनों बच्चे हर्षित (10) और गायत्री (4) रविवार को पुलिस लाइन स्थित नवीन सभागार पहुंचे। हर्षित के पिता व्यापारी अनिल कुमार ने बताया कि वह बृहस्पतिवार सात मई को दोपहर 12 बजे उसके बेटे का अपहरण किया गया था।
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शाम छह बजे उन्हें यह जानकारी हो सकी कि उनके बेटे का अपहरण कर लिया गया है। बृहस्पतिवार की पूरी रात, शुक्रवार का पूरा दिन, रात, शनिवार का दिन और पूरी रात से वह लगातार जाग रहे हैं। एक पल को भी उन्हें नींद नहीं आई। अनिल का कहना है कि वह पूरी तरह से टूट चुके थे। अपहरणकर्ताओं का पीछा करते हुए पुलिस टीम के साथ जब आगरा पहुंची तो वहां अपहरणकर्ताओं की लोकेशन मिलनी बंद हुई तो दिल कांप गया था। ऐसे में साथ चल रही पुलिस टीम उन्हें धैर्य बंधाती, बच्चे के सकुशल होने का प्रमाण देती। तब जाकर उनकी बेचैनी कुछ कम होती।
इस बीच घर में बैठी पत्नी रश्मि से भी बीच-बीच में बात होती, उनका रोना सुनकर और दिल बैठ जाता। हालांकि सतत प्रयास और पुलिस की तत्परता से उनका बेटा उन्हें सकुशल मिल गया लेकिन मन में एक टीस जरूर है कि अपने ने ही उनके साथ दगा किया।
20 अप्रैल को बनाई थी भांजे के अपहरण की योजना
बांदा। पुलिस गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी महोबा के सूपा गांव निवासी रामजी ने बताया कि उनका मकसद सिर्फ रुपये लेना था। रुपया मिल जाता तो वह बच्चे को मुक्त कर देते। रामजी के मुताबिक, जीजा अनिल कुमार के शिक्षक पिता हर प्रसाद शिक्षक को रिटायरमेंट का करीब 40 लाख रुपये मिलना था। इसकी जानकारी उसे हो गई थी। उत्तराखंड के देहरादून और ऋषिकेश में घूमने के दौरान 20 अप्रैल को उसने अपने साथी सुमित और अनीस से यह चर्चा की थी।
चर्चा में भांजे का अपहरण करने की शैतानी सोच उस पर हावी हो गई थी। साथियों ने भी कहा कि किसी को शक नहीं होगा कि तुमने अपहरण किया है। रुपये मिलते ही बच्चा लौटा देंगे, इसके लिए रामजी ने ही मनगढ़ंत कहानी भी रची थी। अपनी बहन रश्मि को फोन करके कहा था कि उसने एक ज्योतिष से दिखवाया है कि हर्षित को कुछ लोग उठा ले गए हैं, वह पंजाब में हैं।
10 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। बहन को विश्वास दिलाने के लिए उसने बच्चे का पांच सेकेंड का वीडियो भी बनाकर भेजा था कि उसकी बहन यह समझे कि मैं सच बोल रहा हूं लेकिन उसे पता नहीं था कि पुलिस इतनी जल्दी सक्रिय हो जाएगी और उन तक पहुंच जाएगी। कार सुमित चला रहा था। वह लोग ऋषिकेश से हरिद्वार वहां से बरेली, सीतापुर होते हुए बबेरू पहुंचे थे लेकिन उनकी मंशा पर पुलिस ने पानी फेर दिया।
मामा ने पराठा खिलाया, कपड़े दिलाने की कही बात
बांदा। मामा के चंगुल से मुक्त हुआ मासूम हर्षित बोला, मामा घुमाने ले गए थे। रास्ते में पराठा भी खिलाया। कपड़े दिलाकर और कार में घुमाकर वापस घर छोड़ने की कही थी बात। रास्ते में पूछा, मामा कहां ले जा रहे हो, तो बताया कि तुम्हें घुमाने ले जा रहे हैं, मम्मी-पापा को बता दिया है। कार में ही उसने कहा कि छोटी बहन गायत्री की याद आ रही है, तो कहा कि उसे भी ले आएंगे। अब तुम आराम करो। बीच-बीच में कार रोककर बिस्कुट, पानी, चाय भी पिलाई थी। पुलिस सभागार में मासूम हर्षित की बहन गायत्री बोली, भैया को मामा ले गया था।
सगे भाई की करतूत से व्यथित दिखीं रश्मि
बांदा। सगे भाई की करतूत से व्यथित हर्षित की मां रश्मि देवी ने बताया कि उनके पांच भाई हैं। रामजी उनका चौथे नंबर का भाई है। पहले यह सही था, चार साल से गलत संगत में पड़ गया। तीन साल पहले इसने चोरी से उनके शिक्षक ससुर हरप्रसाद के खाते से साढ़े तीन लाख रुपये पार कर दिए थे। जानकारी होने पर घर में दबाव डालने में रामजी ने डेढ़ लाख लौटा दिए थे, लेकिन दो लाख रुपये नहीं लौटा रहा था। रामजी की हरकतों से आजिज होकर जीजा अनिल ने रामजी पर घर आने-जाने में प्रतिबंध लगा दिया था। वह अपने सगे भाई की हरकत में थोड़ा शर्मिंदा भी दिखाई दीं, लेकिन बच्चा मिलने की खुशी भी झलक रही थी।
बच्चे को तलाश लिया गया है। पुलिस टीम को पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल की ओर से बबेरू कोतवाल राजेंद्र सिंह राजावत, उपनिरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी, अरविंद, एसओजी व सर्विलांस की टीम को 25 हजार का इनाम दिया गया है।
शिवराज
अपर पुलिस अधीक्षक, बांदा।

फोटो - 14 पुलिस लाइन नवीन सभागार में एएसपी के बगल में बैठा मामा के चंगुल से मुक्त हुआ हर्षित, उ