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Banda News: कारागार के गैस गोदाम में बंदी ने फंदा लगाया, मौत
Sat, 13 Jun 2026 01:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 13 Jun 2026 01:14 AM IST
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बांदा। मंडल कारागार में पॉक्सो और दुष्कर्म के आरोप में निरुद्ध एक बंदी द्वारा फंदा लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बंदी ने जिस गैस गोदाम में फंदा लगाया, वहां सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था। ऐसे में घटना की जानकारी तब हुई, जब काफी देर बाद एक अन्य बंदी किसी काम से वहां पहुंचा।
पॉक्सो और दुष्कर्म के मामले में निरुद्ध अतर्रा थाना क्षेत्र के गुमाई गांव के अंश अरखन पुरवा निवासी 28 वर्षीय बंदी अभिषेक सिंह बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे जेल के भंडारे में ड्यूटी कर रहा था। इसी दौरान वह भंडारे के पास स्थित गैस गोदाम में पहुंचा और गमछे के सहारे फंदा लगाकर जान दे दी। कुछ देर बाद एक अन्य बंदी गैस की आंच धीमी करने के लिए गोदाम में पहुंचा तो उसने अभिषेक को फंदे पर लटका देखा। सूचना मिलते ही जेल परिसर में हड़कंप मच गया। आनन फानन बंदी को नीचे उतारकर जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जिस स्थान पर बंदियों का आना-जाना था, वहां निगरानी के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे। यदि वहां सीसीटीवी कैमरा लगा होता तो संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय रहते मिल सकती थी और शायद बंदी की जान बचाई जा सकती थी। जेलर रामरती ने बताया कि अभिषेक को 11 मार्च को जेल लाया गया था। तब से उससे मिलने न तो उसके माता-पिता आए और न ही कोई अन्य रिश्तेदार। परिजनों के न आने से वह मानसिक रूप से परेशान रहता था। फिलहाल मामले की जांच कराई जा रही है।
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पॉक्सो और दुष्कर्म के मामले में निरुद्ध अतर्रा थाना क्षेत्र के गुमाई गांव के अंश अरखन पुरवा निवासी 28 वर्षीय बंदी अभिषेक सिंह बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे जेल के भंडारे में ड्यूटी कर रहा था। इसी दौरान वह भंडारे के पास स्थित गैस गोदाम में पहुंचा और गमछे के सहारे फंदा लगाकर जान दे दी। कुछ देर बाद एक अन्य बंदी गैस की आंच धीमी करने के लिए गोदाम में पहुंचा तो उसने अभिषेक को फंदे पर लटका देखा। सूचना मिलते ही जेल परिसर में हड़कंप मच गया। आनन फानन बंदी को नीचे उतारकर जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जिस स्थान पर बंदियों का आना-जाना था, वहां निगरानी के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे। यदि वहां सीसीटीवी कैमरा लगा होता तो संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय रहते मिल सकती थी और शायद बंदी की जान बचाई जा सकती थी। जेलर रामरती ने बताया कि अभिषेक को 11 मार्च को जेल लाया गया था। तब से उससे मिलने न तो उसके माता-पिता आए और न ही कोई अन्य रिश्तेदार। परिजनों के न आने से वह मानसिक रूप से परेशान रहता था। फिलहाल मामले की जांच कराई जा रही है।
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