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Banda News: मेडिकल रिपोर्ट की दलील बेअसर, दुष्कर्म आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
Thu, 09 Jul 2026 11:08 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Thu, 09 Jul 2026 11:08 PM IST
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बांदा। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी रामदेव कुशवाहा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों और शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। ऐसे में आरोपी को जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता है।
कोतवाली नगर थाना क्षेत्र में वर्ष 2025 में रामदेव कुशवाहा के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी और पीड़िता रिश्तेदार हैं। आरोप लगाया गया कि शादी के लिए दिए गए 50 हजार वापस मांगने पर विवाद हुआ और इसी रंजिश में झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
वहीं मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया कि पीड़िता बालिग है इसलिए पॉक्सो एक्ट लागू नहीं होता। अभियोजन ने अदालत को बताया कि विवेचना के दौरान पीड़िता के शैक्षिक अभिलेखों की जांच की गई।
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इससे जन्मतिथि 20 जून 2009 दर्ज है। ऐसे में घटना के समय उसकी आयु करीब 15 वर्ष 8 माह 12 दिन थी। विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
अदालत ने आदेश में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद इस स्तर पर शैक्षिक अभिलेखों में दर्ज आयु को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। इस पर रामदेव की जमानत अर्जी निरस्त कर दी गई।
कोतवाली नगर थाना क्षेत्र में वर्ष 2025 में रामदेव कुशवाहा के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी और पीड़िता रिश्तेदार हैं। आरोप लगाया गया कि शादी के लिए दिए गए 50 हजार वापस मांगने पर विवाद हुआ और इसी रंजिश में झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
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वहीं मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया कि पीड़िता बालिग है इसलिए पॉक्सो एक्ट लागू नहीं होता। अभियोजन ने अदालत को बताया कि विवेचना के दौरान पीड़िता के शैक्षिक अभिलेखों की जांच की गई।
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इससे जन्मतिथि 20 जून 2009 दर्ज है। ऐसे में घटना के समय उसकी आयु करीब 15 वर्ष 8 माह 12 दिन थी। विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
अदालत ने आदेश में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद इस स्तर पर शैक्षिक अभिलेखों में दर्ज आयु को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। इस पर रामदेव की जमानत अर्जी निरस्त कर दी गई।