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Banda News: साक्ष्यों का साबित नहीं कर पाया अभियोजन, हत्यारोपी को अदालत ने किया बरी
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== लोगो अदालत से ==
- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने सुनाया फैसला
- तीन साल पहले मरका थाना क्षेत्र में हुई थी वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम प्रवीण कुमार सिंह द्वितीय ने मरका थाना क्षेत्र के चर्चित हत्या प्रकरण में आरोपी पंकज कुमार गुप्ता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। ऐसे में हत्या का आरोप साबित नहीं होता है।
अभियोजन के अनुसार, 16 सितंबर 2023 की सुबह मरका गांव में पड़ोसी विनोद सिंह पर चाकू से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल विनोद को पहले सीएचसी, फिर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और बाद में लखनऊ रेफर किया गया था, जहां 20 सितंबर 2023 को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मामले में मरका थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था और विवेचना के बाद आरोपी पंकज कुमार गुप्ता के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी, चिकित्सकों, विवेचक समेत नौ गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाते हुए आरोपी को निर्दोष बताया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास है तथा अभियोजन की कहानी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं बनती। बरामदगी और अन्य साक्ष्य भी आरोपी के खिलाफ अपराध को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।
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निर्णय में अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है, जो इस मामले में पूरा नहीं हुआ। इसी आधार पर आरोपी पंकज कुमार गुप्ता को धारा 302 आईपीसी के आरोप से बरी कर दिया गया। साथ ही जमानत बंधपत्र समाप्त करते हुए आरोपी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437-ए के तहत छह माह के लिए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके एवं दो जमानतदार प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
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- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने सुनाया फैसला
- तीन साल पहले मरका थाना क्षेत्र में हुई थी वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम प्रवीण कुमार सिंह द्वितीय ने मरका थाना क्षेत्र के चर्चित हत्या प्रकरण में आरोपी पंकज कुमार गुप्ता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। ऐसे में हत्या का आरोप साबित नहीं होता है।
अभियोजन के अनुसार, 16 सितंबर 2023 की सुबह मरका गांव में पड़ोसी विनोद सिंह पर चाकू से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल विनोद को पहले सीएचसी, फिर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और बाद में लखनऊ रेफर किया गया था, जहां 20 सितंबर 2023 को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मामले में मरका थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था और विवेचना के बाद आरोपी पंकज कुमार गुप्ता के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी, चिकित्सकों, विवेचक समेत नौ गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाते हुए आरोपी को निर्दोष बताया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास है तथा अभियोजन की कहानी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं बनती। बरामदगी और अन्य साक्ष्य भी आरोपी के खिलाफ अपराध को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।
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निर्णय में अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है, जो इस मामले में पूरा नहीं हुआ। इसी आधार पर आरोपी पंकज कुमार गुप्ता को धारा 302 आईपीसी के आरोप से बरी कर दिया गया। साथ ही जमानत बंधपत्र समाप्त करते हुए आरोपी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437-ए के तहत छह माह के लिए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके एवं दो जमानतदार प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।