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Banda News: खेला में मिला दुर्लभ भारतीय तारा कछुआ, विभाग ने किया संरक्षित
Wed, 20 May 2026 12:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 20 May 2026 12:12 AM IST
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फोटो - 10 मेज पर बैठा दुर्लभ कछुआ। स्त्रोत : वन विभाग
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करतल (बांदा)। उत्तर वन मंडल के अंतर्गत पन्ना के देवेंद्र नगर में एक अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का कछुआ मिला है। जिसे भारतीय तारा कछुआ के नाम से जाना जाता है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित और संकटग्रस्त श्रेणी में आती है। स्थानीय निवासी महेंद्र प्रजापति ने अपने खेत में इस कछुए को देखा और तुरंत इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिषेक जैन को दी। डॉ. जैन ने तत्काल वन विभाग के बीट प्रभारी शारदा प्रसाद राय को अवगत कराया।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कछुए को अपने कब्जे में ले लिया। भारतीय तारा कछुआ अपनी पीठ पर बने तारे जैसी चमकदार पीली धारियों के कारण आकर्षक होता है। इसका वैज्ञानिक नाम जियोकलोन इलिगेंस है।
भारतीय तारा कछुआ मुख्य रूप से सूखे घास के मैदानों, झाड़ीदार क्षेत्रों और जंगलों में पाया जाता है। भारत में इसके प्रमुख आवास मध्य भारत, दक्षिण भारत और राजस्थान के कुछ हिस्से हैं। यह कछुआ मुख्य रूप से घास, पत्तियां, फल और फूल खाता है और इसकी अनुमानित आयु 30 से 50 वर्ष तक होती है।
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अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार, यह प्रजाति संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे रेड लिस्ट में शामिल किया गया है। इस कार्रवाई में वन विभाग के बीट प्रभारी शारदा प्रसाद राय, वन सुरक्षा श्रमिक रघुवीर सिंह, विश्राम सिंह, राजेश यादव, राम सिंह शामिल रहे।
देवेंद्र नगर के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिषेक जैन ने इस अवसर पर नागरिकों से अपील की कि यदि किसी भी स्थान पर दुर्लभ या जंगली प्राणी दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत वन विभाग को देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। रेंजर शुभम तिवारी ने बताया कि वन विभाग को सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर स्टाफ भेजकर संरक्षित प्रजाति के कछुए को सुरक्षित कर लिया गया है।
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सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कछुए को अपने कब्जे में ले लिया। भारतीय तारा कछुआ अपनी पीठ पर बने तारे जैसी चमकदार पीली धारियों के कारण आकर्षक होता है। इसका वैज्ञानिक नाम जियोकलोन इलिगेंस है।
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भारतीय तारा कछुआ मुख्य रूप से सूखे घास के मैदानों, झाड़ीदार क्षेत्रों और जंगलों में पाया जाता है। भारत में इसके प्रमुख आवास मध्य भारत, दक्षिण भारत और राजस्थान के कुछ हिस्से हैं। यह कछुआ मुख्य रूप से घास, पत्तियां, फल और फूल खाता है और इसकी अनुमानित आयु 30 से 50 वर्ष तक होती है।
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अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार, यह प्रजाति संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे रेड लिस्ट में शामिल किया गया है। इस कार्रवाई में वन विभाग के बीट प्रभारी शारदा प्रसाद राय, वन सुरक्षा श्रमिक रघुवीर सिंह, विश्राम सिंह, राजेश यादव, राम सिंह शामिल रहे।
देवेंद्र नगर के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिषेक जैन ने इस अवसर पर नागरिकों से अपील की कि यदि किसी भी स्थान पर दुर्लभ या जंगली प्राणी दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत वन विभाग को देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। रेंजर शुभम तिवारी ने बताया कि वन विभाग को सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर स्टाफ भेजकर संरक्षित प्रजाति के कछुए को सुरक्षित कर लिया गया है।