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Banda News: आभा आईडी व इंडिकेटरों में खराब प्रगति पर वेतन रोका
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 11 Jan 2026 11:32 PM IST
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बांदा। बाल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और खराब प्रगति पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है। बबेरू की मुख्य सेविका का जनवरी माह का वेतन अवरुद्ध कर दिया गया है, वहीं तिंदवारी और कमासिन परियोजनाओं में आभा आईडी सहित अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों में प्रगति को बेहद चिंताजनक बताते हुए संबंधित मुख्य सेविकाओं और बाल विकास परियोजना अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
कलक्ट्रेट में आयोजित जिला पोषण समिति की बैठक में जिलाधिकारी जे रीभा ने बच्चों के वजन, गृह भ्रमण, वीएचएसएनडी दिवस पर होने वाले कार्यकलाप और पोषाहार वितरण की प्रगति की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि पुष्टाहार का वितरण चेहरा प्रमाणीकरण के माध्यम से मात्र 68 फीसदी ही हो पाया है, जिस पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिया कि शत-प्रतिशत लाभार्थियों का चेहरा प्रमाणीकरण सुनिश्चित किया जाए।जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि आंगनबाड़ी केंद्र समय पर खुलने चाहिए और शासन की मंशा के अनुरूप कार्य किए जाने चाहिए। केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति कम पाए जाने पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जन सुनवाई के बाद वे स्वयं फील्ड में निकलकर निरीक्षण करें ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत का पता चल सके।
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कलक्ट्रेट में आयोजित जिला पोषण समिति की बैठक में जिलाधिकारी जे रीभा ने बच्चों के वजन, गृह भ्रमण, वीएचएसएनडी दिवस पर होने वाले कार्यकलाप और पोषाहार वितरण की प्रगति की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि पुष्टाहार का वितरण चेहरा प्रमाणीकरण के माध्यम से मात्र 68 फीसदी ही हो पाया है, जिस पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
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उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिया कि शत-प्रतिशत लाभार्थियों का चेहरा प्रमाणीकरण सुनिश्चित किया जाए।जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि आंगनबाड़ी केंद्र समय पर खुलने चाहिए और शासन की मंशा के अनुरूप कार्य किए जाने चाहिए। केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति कम पाए जाने पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जन सुनवाई के बाद वे स्वयं फील्ड में निकलकर निरीक्षण करें ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत का पता चल सके।