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Banda News: मोहल्ले वालों को खबर ही नहीं और साफ हो गईं पानी की टंकियां
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 11 Jan 2026 11:31 PM IST
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फोटो- 10 गूलरनाका टंकी में अंकित मई में हुई सफाई।
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बांदा। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से मौतों के बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। शहर में 56 हजार परिवारों को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के दावे जमीनी सच्चाई के सामने तालमेल नहीं खा रहे। केन नदी व नलकूपों से पानी स्टोर करने के लिए बनी पानी की टंकियां सालों से साफ नहीं हुई। हालांकि किसी टंकी में मई तो किसी में अप्रैल महीने में सफाई का उल्लेख किया गया है।
पड़ताल की तो मोहल्ले के लोगों ने इसे कागजी बताया। कहा कि टंकी की कभी सफाई होते नहीं देखा। टंकी की सफाई होती तो सप्लाई बंद की जाती है। टंकियों की सफाई न होने से अक्सर नलों में शुरुआत में 10 से 15 मिनट तक मटमैला व गंदा पानी आता है। जो पीने योग्य नहीं है। पीने के लिए पानी को उबाल कर इस्तेमाल करते है अन्यथा पेट खराब हो जाता है। दर्द होने लगता है।
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शहर में पानी की मांग व उपलब्धता (एमएलडी में)
जनसंख्या कनेक्शन जरूरत उपलब्धता
195362 56000 21 19
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शहर को जल स्रोतों से उपलब्ध पानी (एमएलडी में)
केन नदी नलकूप, ओपेन बोरवेल
05 12 02
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हैंडपंप ओवरहेड टैंक सीडब्लूआर
1070 09 06
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पुलिस लाइन तिराहा निवासी क्षत्रपाल का कहना है कि जेल के पास वाले सीडब्लूआर से पानी की आपूर्ति होती है। शुरुआत में 10 मिनट गंदा व बदबूदार पानी आता है। जो पीने योग्य नहीं है। पानी की टंकी में सफाई की सिर्फ तिथि बदल दी जाती है।
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छिपटहरी निवासी फैजान का कहना है कि पानी की आपूर्ति टेलीफोन टावर वाली पानी की टंकी से होती है। टंकी जब से बनी है आजतक साफ होते नहीं देखा। टंकी में सिर्फ तिथि लिखा जरूर देखा है। टंकी यदि कभी साफ की जाती तो सप्लाई बंद होती।
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मर्दन नाका निवासी इमरान का कहना है कि पानी की आपूर्ति गूलर नाका की पानी की टंकी से होती है। पीले रंग का गंदा पानी आ रहा है। पानी की टंकी की सफाई आज तक होते नहीं देखा। सिर्फ कागजी खानापूरी हो रही है।
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छावनी निवासी फहीम कहना है कि यहां पानी की टंकी व कुएं से पानी की आपूर्ति होती है। शुरूआत में 10 से 15 मिनट गंदा पानी आता है। कुआं व पानी की टंकी की सालों साल सफाई नहीं होती है। सिर्फ खाना पूरी की जाती है।
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वर्जन-
शहर में गंदे पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। टंकियों की हर साल सफाई होती है। लीकेज की शिकायत मिलने पर तत्काल ठीक कराया जाता है।
शिवराज वर्मा, अधिशासी अभियंता
जल संस्थान, बांदा
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पड़ताल की तो मोहल्ले के लोगों ने इसे कागजी बताया। कहा कि टंकी की कभी सफाई होते नहीं देखा। टंकी की सफाई होती तो सप्लाई बंद की जाती है। टंकियों की सफाई न होने से अक्सर नलों में शुरुआत में 10 से 15 मिनट तक मटमैला व गंदा पानी आता है। जो पीने योग्य नहीं है। पीने के लिए पानी को उबाल कर इस्तेमाल करते है अन्यथा पेट खराब हो जाता है। दर्द होने लगता है।
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शहर में पानी की मांग व उपलब्धता (एमएलडी में)
जनसंख्या कनेक्शन जरूरत उपलब्धता
195362 56000 21 19
शहर को जल स्रोतों से उपलब्ध पानी (एमएलडी में)
केन नदी नलकूप, ओपेन बोरवेल
05 12 02
हैंडपंप ओवरहेड टैंक सीडब्लूआर
1070 09 06
पुलिस लाइन तिराहा निवासी क्षत्रपाल का कहना है कि जेल के पास वाले सीडब्लूआर से पानी की आपूर्ति होती है। शुरुआत में 10 मिनट गंदा व बदबूदार पानी आता है। जो पीने योग्य नहीं है। पानी की टंकी में सफाई की सिर्फ तिथि बदल दी जाती है।
छिपटहरी निवासी फैजान का कहना है कि पानी की आपूर्ति टेलीफोन टावर वाली पानी की टंकी से होती है। टंकी जब से बनी है आजतक साफ होते नहीं देखा। टंकी में सिर्फ तिथि लिखा जरूर देखा है। टंकी यदि कभी साफ की जाती तो सप्लाई बंद होती।
मर्दन नाका निवासी इमरान का कहना है कि पानी की आपूर्ति गूलर नाका की पानी की टंकी से होती है। पीले रंग का गंदा पानी आ रहा है। पानी की टंकी की सफाई आज तक होते नहीं देखा। सिर्फ कागजी खानापूरी हो रही है।
छावनी निवासी फहीम कहना है कि यहां पानी की टंकी व कुएं से पानी की आपूर्ति होती है। शुरूआत में 10 से 15 मिनट गंदा पानी आता है। कुआं व पानी की टंकी की सालों साल सफाई नहीं होती है। सिर्फ खाना पूरी की जाती है।
वर्जन-
शहर में गंदे पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। टंकियों की हर साल सफाई होती है। लीकेज की शिकायत मिलने पर तत्काल ठीक कराया जाता है।
शिवराज वर्मा, अधिशासी अभियंता
जल संस्थान, बांदा

फोटो- 10 गूलरनाका टंकी में अंकित मई में हुई सफाई।