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Banda News: खामनेई की मौत पर शिया मुस्लिमों में तीन दिन का मातम
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 03 Mar 2026 02:09 AM IST
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फोटो - 02 मातमी मजलिस में शामिल शिया मुस्लिम। स्रोत - स्वयं
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बांदा। ईरान के सुप्रीम धर्म गुरु और रहबरे आला आयतउल्ला अली खामनेई की इस्राइल-अमेरिकी हमले में हुई मौत पर विशेषकर शिया मुस्लिमों में गम और गुस्सा देखा जा रहा है। शिया मुस्लिमों ने तीन दिन का शोक घोषित करते हुए मातमी मजलिसें शुरू कर दी हैं। मंगलवार को मजलिस के बाद कैंडल श्रद्धांजलि जुलूस निकाला जाएगा।
ईरानी सुप्रीम रहनुमा की मौत की खबर का सबसे ज्यादा असर शिया मुस्लिम वर्ग में नजर आ रहा है। मातमी मजलिसें (शोक सभाएं) रविवार की शाम से शहर की काजी नूरुद्दीन शिया जामा मस्जिद में शुरू हो गईं। इसमें शामिल हर शख्स की आंखों में आंसू और चेहरे पर गुस्सा नजर आ रहा था।
मजलिस की सदारत शिया धर्म गुरु और इमाम मौलाना रजा गदीरी ने की। उन्होंने कहा कि खामनेई उम्मते मुस्लिमा की जान और शान होने के साथ इंसानियत के पैरोकार थे। उनकी शहादत से इंसानियत को बड़ा नुकसान हुआ है। मौलाना ने बताया कि मंगलवार तीन मार्च को शाम मजलिस के बाद मस्जिद परिसर से छोटी करबला तक कैंडल जुलूस निकालकर श्रद्धांजलि दी जाएगी।
मजलिस में अली अकबर, शोएब रिजवी, इमाम अली आब्दी, शजर हसन, मो. रजा, अजहर शामिल रहे।
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हिंदुस्तान से बहुत मोहब्बत करते थे खामनेई
फोटो - 03 शिया धर्म गुरु इमाम मौलाना रजा गदीरी। स्रोत - स्वयं
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बांदा। ईरान के सुप्रीम रहनुमा अयातउल्ला, अली खामनेई को हिंदुस्तान से बहुत मोहब्बत और प्यार था। भारत से तालीम हासिल करने ईरान गए भारतीय युवाओं को वह नाम या मजहब पूछे बगैर मदद करते थे। वह इल्म के दोस्त थे। यह बात यहां प्रमुख शिया धर्म गुरु इमाम मौलाना रजा गदीरी ने कही।
उन्होंने कहा कि खामनेई जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले शख्स थे। अमेरिका और इजराइल की यह कायरता है कि एक 86 वर्षीय बुजुर्ग को नमाजे शब के दौरान धोखे से हमला करके कत्ल कर दिया। मौलाना गदीरी ने भारत सरकार से मांग की है कि अमेरिका व इसराइल के जुल्म के खिलाफ आलमी (विश्व स्तरीय) दबाव बनाए। यह दोनों मुल्क सिर्फ फौजियों पर ही नहीं बल्कि आम नागरिकों और स्कूली बालिकाओं पर हमले कर उन्हें मार रहे हैं। हम इसकी सख्त निंदा करते हैं।
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ईरानी सुप्रीम रहनुमा की मौत की खबर का सबसे ज्यादा असर शिया मुस्लिम वर्ग में नजर आ रहा है। मातमी मजलिसें (शोक सभाएं) रविवार की शाम से शहर की काजी नूरुद्दीन शिया जामा मस्जिद में शुरू हो गईं। इसमें शामिल हर शख्स की आंखों में आंसू और चेहरे पर गुस्सा नजर आ रहा था।
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मजलिस की सदारत शिया धर्म गुरु और इमाम मौलाना रजा गदीरी ने की। उन्होंने कहा कि खामनेई उम्मते मुस्लिमा की जान और शान होने के साथ इंसानियत के पैरोकार थे। उनकी शहादत से इंसानियत को बड़ा नुकसान हुआ है। मौलाना ने बताया कि मंगलवार तीन मार्च को शाम मजलिस के बाद मस्जिद परिसर से छोटी करबला तक कैंडल जुलूस निकालकर श्रद्धांजलि दी जाएगी।
मजलिस में अली अकबर, शोएब रिजवी, इमाम अली आब्दी, शजर हसन, मो. रजा, अजहर शामिल रहे।
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हिंदुस्तान से बहुत मोहब्बत करते थे खामनेई
फोटो - 03 शिया धर्म गुरु इमाम मौलाना रजा गदीरी। स्रोत - स्वयं
बांदा। ईरान के सुप्रीम रहनुमा अयातउल्ला, अली खामनेई को हिंदुस्तान से बहुत मोहब्बत और प्यार था। भारत से तालीम हासिल करने ईरान गए भारतीय युवाओं को वह नाम या मजहब पूछे बगैर मदद करते थे। वह इल्म के दोस्त थे। यह बात यहां प्रमुख शिया धर्म गुरु इमाम मौलाना रजा गदीरी ने कही।
उन्होंने कहा कि खामनेई जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले शख्स थे। अमेरिका और इजराइल की यह कायरता है कि एक 86 वर्षीय बुजुर्ग को नमाजे शब के दौरान धोखे से हमला करके कत्ल कर दिया। मौलाना गदीरी ने भारत सरकार से मांग की है कि अमेरिका व इसराइल के जुल्म के खिलाफ आलमी (विश्व स्तरीय) दबाव बनाए। यह दोनों मुल्क सिर्फ फौजियों पर ही नहीं बल्कि आम नागरिकों और स्कूली बालिकाओं पर हमले कर उन्हें मार रहे हैं। हम इसकी सख्त निंदा करते हैं।

फोटो - 02 मातमी मजलिस में शामिल शिया मुस्लिम। स्रोत - स्वयं
