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Banda News: शिक्षक की बेटी ने दूसरे प्रयास में पाई 46वीं रैंक, घर में खुशियां
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फोटो- 12 सांभवी तिवारी। स्त्रोत : परिजन
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फोटो- 12 शांभवी तिवारी। स्त्रोत : परिजन
फोटो- 13 सफलता पर खुश बाबा शिव सहाय,चाचा अनूप तिवारी। स्रोत: स्वयं
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तिंदवारी। कस्बे में शुक्रवार को खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षक की बेटी शांभवी तिवारी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में 46वीं रैंक हासिल की है। यह उनकी दूसरी सफलता है, जिससे परिवार में उत्साह का माहौल है।
सांभवी के बाबा शिव सहाय और चाचा अनूप तिवारी को दोपहर में यह सूचना मिली। उन्होंने अपनी पौत्री की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। बीते वर्ष 2024 में सांभवी ने 445वीं रैंक प्राप्त की थी। भुजरख गांव निवासी सांभवी के पिता सुशील तिवारी उत्तराखंड में एक प्राइवेट शिक्षक हैं। सांभवी का बचपन और प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड में ही हुई। उन्होंने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से हाईस्कूल से लेकर बीटेक तक की पढ़ाई की। उन्होंने घर पर रहकर, बिना किसी कोचिंग के, दूसरे प्रयास में यह प्रतिष्ठित परीक्षा पास की। उनकी मां निवेदिता इस यात्रा में महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत रहीं।
परिवार की खुशी और समर्थन
बाबा शिव सहाय को पहले अपनी पौत्री के आईएएस बनने की बात पर विश्वास नहीं हुआ। शांभवी ने फोन पर अपनी रैंक बताई तो उनकी खुशी की सीमाएं टूट गईं। इस अवसर पर चचेरे बाबा विद्यासागर तिवारी, चाचा अनूप तिवारी, गोविंद तिवारी और सुनील तिवारी सहित कई शुभचिंतक घर पहुंचे। उन्होंने सांभवी को इस उपलब्धि पर बधाई दी।
सफलता का मंत्र और अध्ययन शैली
सांभवी ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अध्ययन और स्पष्ट लक्ष्य को दिया है। बीटेक के बाद उन्होंने आईएएस बनने का लक्ष्य तय किया। पिछले एक वर्ष से वह घर पर प्रतिदिन आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। उन्होंने ई-पुस्तकों का सहारा लिया और मोबाइल फोन का उपयोग केवल तैयारी तक सीमित रखा। शांभवी ने युवा छात्र-छात्राओं को लगन और समर्पण से तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
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फोटो- 13 सफलता पर खुश बाबा शिव सहाय,चाचा अनूप तिवारी। स्रोत: स्वयं
तिंदवारी। कस्बे में शुक्रवार को खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षक की बेटी शांभवी तिवारी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में 46वीं रैंक हासिल की है। यह उनकी दूसरी सफलता है, जिससे परिवार में उत्साह का माहौल है।
सांभवी के बाबा शिव सहाय और चाचा अनूप तिवारी को दोपहर में यह सूचना मिली। उन्होंने अपनी पौत्री की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। बीते वर्ष 2024 में सांभवी ने 445वीं रैंक प्राप्त की थी। भुजरख गांव निवासी सांभवी के पिता सुशील तिवारी उत्तराखंड में एक प्राइवेट शिक्षक हैं। सांभवी का बचपन और प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड में ही हुई। उन्होंने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से हाईस्कूल से लेकर बीटेक तक की पढ़ाई की। उन्होंने घर पर रहकर, बिना किसी कोचिंग के, दूसरे प्रयास में यह प्रतिष्ठित परीक्षा पास की। उनकी मां निवेदिता इस यात्रा में महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत रहीं।
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परिवार की खुशी और समर्थन
बाबा शिव सहाय को पहले अपनी पौत्री के आईएएस बनने की बात पर विश्वास नहीं हुआ। शांभवी ने फोन पर अपनी रैंक बताई तो उनकी खुशी की सीमाएं टूट गईं। इस अवसर पर चचेरे बाबा विद्यासागर तिवारी, चाचा अनूप तिवारी, गोविंद तिवारी और सुनील तिवारी सहित कई शुभचिंतक घर पहुंचे। उन्होंने सांभवी को इस उपलब्धि पर बधाई दी।
सफलता का मंत्र और अध्ययन शैली
सांभवी ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अध्ययन और स्पष्ट लक्ष्य को दिया है। बीटेक के बाद उन्होंने आईएएस बनने का लक्ष्य तय किया। पिछले एक वर्ष से वह घर पर प्रतिदिन आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। उन्होंने ई-पुस्तकों का सहारा लिया और मोबाइल फोन का उपयोग केवल तैयारी तक सीमित रखा। शांभवी ने युवा छात्र-छात्राओं को लगन और समर्पण से तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।

फोटो- 12 सांभवी तिवारी। स्त्रोत : परिजन
