{"_id":"69c42d418a2ce898720c8b84","slug":"thali-became-expensive-samosa-of-eight-became-10-and-bread-pakora-of-15-became-20-rupees-banda-news-c-212-1-bnd1017-143446-2026-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: थाली हुई महंगी, आठ का समोसा 10 और 15 का ब्रेड पकौड़ा 20 रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: थाली हुई महंगी, आठ का समोसा 10 और 15 का ब्रेड पकौड़ा 20 रुपये
विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो 14-शक्ति रसोई में चूल्हे में खाना बनातीं महिलाएं। संवाद
फोटो 15- कचहरी परिसर में स्थित शक्ति रसोई। संवाद
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
-ईधन अधिक खर्च होने से कीमतें भी बढ़ी, कर्मचारियों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल
-अब कचहरी, विकास भवन सहित पुलिस लाइन में कैंटीनों में भी दिखने लगा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। गैस की किल्लत का असर अब कचहरी, विकास भवन सहित पुलिस लाइन में कर्मचारियों व आने वाले लोगों की सुविधा के लिए खुली सरकारी कैंटीनों में भी दिखने लगा है। गैस सिलिंडर न मिलने से चूल्हे में नाश्ता व खाना बन रहा है। देर से तैयार होने वाले कुछ आइटमों में कटौती भी की गई है। चूल्हे में ईंधन खर्च अधिक आने से अब आठ का समोसा 10 रुपये और 15 का ब्रेड पकौड़ा 20 रुपये का बेचा जा रहा है।
खाने की थाली भी 40 रुपये की जगह 50 की हो गई है। हालांकि कर्मचारी चूल्हे के नाश्ता व खाना से खुश हैं। लेकिन जेब ज्यादा ढीली करने के बाद खाने की गुणवत्ता में कमी आई है। कचहरी स्थित स्वयं सहायता समूह की शक्ति रसोई ने नाश्ता बनाना पूरी तरह से बंद कर दिया है। यहां पर सिर्फ खाने की ही व्यवस्था है। एलपीजी गैस न मिलने से संचालक समूह ने 40 रुपये की थाली को 50 रुपये की कर दी है। थाली में छह रोटी, सब्जी व सलाद आदि ही दिया जा रहा है। पहले थाली में दो सब्जी रहती थी।
कर्मचारी शांति का कहना है कि गैस न मिलने से चूल्हे में खाना बनाना पड़ रहा है। चूल्हे में ईंधन अधिक खर्च होता है। पहले एक गैस सिलिंडर में दो दिन काम चलता था। लेकिन अब एक हजार की लकड़ी एक ही दिन चलती है। खाना बनाने वाले बर्तनों को भी साफ करने में एक पैकेट 500 ग्राम का डिटर्जेंट पाउडर व दो 10-10 रुपये की डिटर्जेंट साबुन लग रहा है।
पहले गैस में ज्यादा बर्तन खराब नहीं होते थे। डिटर्जेंट पाउडर से काम चल जाता था। कमोवेश यही स्थिति विकास भवन में स्थित कैंटीन की है। यहां पर एलपीजी गैस संकट के चलते देर से तैयार होने वाले नाश्ता के कुछ आइटमों में कटौती की गई है। समोसा आठ की जगह 10 रुपये का व ब्रेड पकौड़ा 15 की जगह 20 रुपये का बिक रहा है। खाना के आइटमों में कटौती की गई है।
पुलिस लाइन कैंटीन में गैस व चूल्हा दोनों में नाश्ता व खाना बन रहा है। यहां पर्याप्त गैस उपलब्ध नहीं है। उधर, कर्मचारियों का कहना है कि चूल्हे में खाना बनना तो बेहतर है लेकिन गुणवत्ता में कमी आई है। सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला का कहना है कि कैंटीन संचालक आते हैं तो उनको नियमानुसार गैस सिलिंडर उपलब्ध कराया जाएगा। गैस किल्लत का संकट देश भर में है।
222222222
उपभोक्ता बोले, नियम कुछ भी बनें, लगानी पड़ रही लाइन
फोटो 4- सिलिंडर के लिए धूप में छाता लगाए खड़ीं महिला उपभोक्ता। संवाद
फोटो 5- सिलिंडर के लिए पुराने आरटीओ ऑफिस के पास मैदान में लाइन लगाए उपभोक्ता। संवाद
फोटो 6- उपभोक्ता को बुकिंग नंबर समझाते एजेंसी संचालक। संवाद
-आराधना गैस एजेंसी में आई 702 सिलिंडरों की खेप, सब बंट गए, धूप में लाइन लगाकर सिलिंडर ले रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय की नई व्यवस्था के तहत रसोई गैस सिलिंडर की बुकिंग अवधि का समय श्रेणीवार उपभोक्ताओं के हिसाब से तय किया गया है। अब उज्ज्वला योजना वाले कनेक्शन धारकों को बुकिंग के लिए 45 दिन, एकल कनेक्शन वालों को 25 दिन और दोहरे (डीबीसी) कनेक्शनधारक को 35 दिन के अंतराल में बुकिंग करनी होगी। अभी तक सभी के लिए 25 दिन के अंतराल पर बुकिंग की सुविधा थी?
नई नियमावली को लेकर रसोई गैस सिलिंडर के लिए धूप में कतारबद्ध खड़ी महिलाएं व पुरुष बोले, नियम चाहे जो भी बनाए जाएं, हम वर्तमान परिस्थिति में भी लाइन में लगकर सिलिंडर ले रहे हैं। नियम बदलने पर भी लाइन में लगकर सिलिंडर लेना पड़ेगा। नए नियम के तहत अब सिलिंडर की बुकिंग पहले से करनी होगी ताकि समय से सिलिंडर मिल सके।
शहर के पुराने आरटीओ ऑफिस के पास बुधवार को भी आराधना गैस एजेंसी वितरण केंद्र में लंबी लाइन का नजारा रहा। यहां धूप में सिलिंडर लिए छाता लगाए मर्दननाका की सलमा खातून ने बताया कि उन्होंने सिलिंडर बुक कराया था। मैसेज भी आ गया लेकिन सिलिंडर नहीं मिला था इसलिए वह सिलिंडर लेने आईं हैं।
नई नियमावली पर उन्होंने कहा कि पहले भी लाइन में लगना पड़ता था अब भी लाइन में लगे हैं। इसी तरह से आवास विकास मोहल्ले से सिलिंडर लेने आईं ममता रैकवार ने बताया कि नई नियमावली से उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं मिलने वाली। इन दिनों सिलिंडर का संकट चल रहा है। लाइन में लगकर सिलिंडर लेना मजबूरी है। इंदिरा नगर के अनिल आदि ने भी नई नियमावली पर कोई टिप्पणी न करते हुए बताया कि सुबह से धूप में खड़े होकर सिलिंडर ले रहे हैं। आराधना गैस एजेंसी में बुधवार को 702 सिलिंडरों की खेप मिली। सभी उपभोक्ताओं को लाइन में लगवाकर सिलिंडर दिए गए।
घरेलू गैस बुकिंग की नई नियमावली
उज्ज्वला कनेक्शन धारक को 45 दिन का अंतराल।
सामान्य उपभोक्ता एकल कनेक्शन को 25 दिन का अंतराल।
दोहरा कनेक्शन को 35 का अनिवार्य अंतराल।
111111111
जिले में टोटल एजेंसी- 41
उज्ज्वला कनेक्शन धारक- ढाई लाख।
सामान्य कनेक्शनधारक- डेढ़ लाख।
जिले में गैस सिलिंडर उपभोक्ता-चार लाख।
यह आंकड़े जिला पूर्ति विभाग के हैं।
वर्जन
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से घरेलू गैस सिलिंडर को लेकर बुकिंग के नियमों में बदलाव किया गया है। घरों में स्टोर करके सिलिंडर रखने की दिशा में यह बेहतर कदम है। जिले में सिलिंडर की आपूर्ति पर्याप्त की जा रही है।-क्यामुद्दीन अंसारी, जिला पूर्ति अधिकारी, बांदा।
Trending Videos
फोटो 15- कचहरी परिसर में स्थित शक्ति रसोई। संवाद
-ईधन अधिक खर्च होने से कीमतें भी बढ़ी, कर्मचारियों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल
-अब कचहरी, विकास भवन सहित पुलिस लाइन में कैंटीनों में भी दिखने लगा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। गैस की किल्लत का असर अब कचहरी, विकास भवन सहित पुलिस लाइन में कर्मचारियों व आने वाले लोगों की सुविधा के लिए खुली सरकारी कैंटीनों में भी दिखने लगा है। गैस सिलिंडर न मिलने से चूल्हे में नाश्ता व खाना बन रहा है। देर से तैयार होने वाले कुछ आइटमों में कटौती भी की गई है। चूल्हे में ईंधन खर्च अधिक आने से अब आठ का समोसा 10 रुपये और 15 का ब्रेड पकौड़ा 20 रुपये का बेचा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
खाने की थाली भी 40 रुपये की जगह 50 की हो गई है। हालांकि कर्मचारी चूल्हे के नाश्ता व खाना से खुश हैं। लेकिन जेब ज्यादा ढीली करने के बाद खाने की गुणवत्ता में कमी आई है। कचहरी स्थित स्वयं सहायता समूह की शक्ति रसोई ने नाश्ता बनाना पूरी तरह से बंद कर दिया है। यहां पर सिर्फ खाने की ही व्यवस्था है। एलपीजी गैस न मिलने से संचालक समूह ने 40 रुपये की थाली को 50 रुपये की कर दी है। थाली में छह रोटी, सब्जी व सलाद आदि ही दिया जा रहा है। पहले थाली में दो सब्जी रहती थी।
कर्मचारी शांति का कहना है कि गैस न मिलने से चूल्हे में खाना बनाना पड़ रहा है। चूल्हे में ईंधन अधिक खर्च होता है। पहले एक गैस सिलिंडर में दो दिन काम चलता था। लेकिन अब एक हजार की लकड़ी एक ही दिन चलती है। खाना बनाने वाले बर्तनों को भी साफ करने में एक पैकेट 500 ग्राम का डिटर्जेंट पाउडर व दो 10-10 रुपये की डिटर्जेंट साबुन लग रहा है।
पहले गैस में ज्यादा बर्तन खराब नहीं होते थे। डिटर्जेंट पाउडर से काम चल जाता था। कमोवेश यही स्थिति विकास भवन में स्थित कैंटीन की है। यहां पर एलपीजी गैस संकट के चलते देर से तैयार होने वाले नाश्ता के कुछ आइटमों में कटौती की गई है। समोसा आठ की जगह 10 रुपये का व ब्रेड पकौड़ा 15 की जगह 20 रुपये का बिक रहा है। खाना के आइटमों में कटौती की गई है।
पुलिस लाइन कैंटीन में गैस व चूल्हा दोनों में नाश्ता व खाना बन रहा है। यहां पर्याप्त गैस उपलब्ध नहीं है। उधर, कर्मचारियों का कहना है कि चूल्हे में खाना बनना तो बेहतर है लेकिन गुणवत्ता में कमी आई है। सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला का कहना है कि कैंटीन संचालक आते हैं तो उनको नियमानुसार गैस सिलिंडर उपलब्ध कराया जाएगा। गैस किल्लत का संकट देश भर में है।
222222222
उपभोक्ता बोले, नियम कुछ भी बनें, लगानी पड़ रही लाइन
फोटो 4- सिलिंडर के लिए धूप में छाता लगाए खड़ीं महिला उपभोक्ता। संवाद
फोटो 5- सिलिंडर के लिए पुराने आरटीओ ऑफिस के पास मैदान में लाइन लगाए उपभोक्ता। संवाद
फोटो 6- उपभोक्ता को बुकिंग नंबर समझाते एजेंसी संचालक। संवाद
-आराधना गैस एजेंसी में आई 702 सिलिंडरों की खेप, सब बंट गए, धूप में लाइन लगाकर सिलिंडर ले रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय की नई व्यवस्था के तहत रसोई गैस सिलिंडर की बुकिंग अवधि का समय श्रेणीवार उपभोक्ताओं के हिसाब से तय किया गया है। अब उज्ज्वला योजना वाले कनेक्शन धारकों को बुकिंग के लिए 45 दिन, एकल कनेक्शन वालों को 25 दिन और दोहरे (डीबीसी) कनेक्शनधारक को 35 दिन के अंतराल में बुकिंग करनी होगी। अभी तक सभी के लिए 25 दिन के अंतराल पर बुकिंग की सुविधा थी?
नई नियमावली को लेकर रसोई गैस सिलिंडर के लिए धूप में कतारबद्ध खड़ी महिलाएं व पुरुष बोले, नियम चाहे जो भी बनाए जाएं, हम वर्तमान परिस्थिति में भी लाइन में लगकर सिलिंडर ले रहे हैं। नियम बदलने पर भी लाइन में लगकर सिलिंडर लेना पड़ेगा। नए नियम के तहत अब सिलिंडर की बुकिंग पहले से करनी होगी ताकि समय से सिलिंडर मिल सके।
शहर के पुराने आरटीओ ऑफिस के पास बुधवार को भी आराधना गैस एजेंसी वितरण केंद्र में लंबी लाइन का नजारा रहा। यहां धूप में सिलिंडर लिए छाता लगाए मर्दननाका की सलमा खातून ने बताया कि उन्होंने सिलिंडर बुक कराया था। मैसेज भी आ गया लेकिन सिलिंडर नहीं मिला था इसलिए वह सिलिंडर लेने आईं हैं।
नई नियमावली पर उन्होंने कहा कि पहले भी लाइन में लगना पड़ता था अब भी लाइन में लगे हैं। इसी तरह से आवास विकास मोहल्ले से सिलिंडर लेने आईं ममता रैकवार ने बताया कि नई नियमावली से उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं मिलने वाली। इन दिनों सिलिंडर का संकट चल रहा है। लाइन में लगकर सिलिंडर लेना मजबूरी है। इंदिरा नगर के अनिल आदि ने भी नई नियमावली पर कोई टिप्पणी न करते हुए बताया कि सुबह से धूप में खड़े होकर सिलिंडर ले रहे हैं। आराधना गैस एजेंसी में बुधवार को 702 सिलिंडरों की खेप मिली। सभी उपभोक्ताओं को लाइन में लगवाकर सिलिंडर दिए गए।
घरेलू गैस बुकिंग की नई नियमावली
उज्ज्वला कनेक्शन धारक को 45 दिन का अंतराल।
सामान्य उपभोक्ता एकल कनेक्शन को 25 दिन का अंतराल।
दोहरा कनेक्शन को 35 का अनिवार्य अंतराल।
111111111
जिले में टोटल एजेंसी- 41
उज्ज्वला कनेक्शन धारक- ढाई लाख।
सामान्य कनेक्शनधारक- डेढ़ लाख।
जिले में गैस सिलिंडर उपभोक्ता-चार लाख।
यह आंकड़े जिला पूर्ति विभाग के हैं।
वर्जन
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से घरेलू गैस सिलिंडर को लेकर बुकिंग के नियमों में बदलाव किया गया है। घरों में स्टोर करके सिलिंडर रखने की दिशा में यह बेहतर कदम है। जिले में सिलिंडर की आपूर्ति पर्याप्त की जा रही है।-क्यामुद्दीन अंसारी, जिला पूर्ति अधिकारी, बांदा।