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Banda News: चार घंटे तक चली अब तक की सर्जरी से बच गई मरीज की जान
Thu, 11 Jun 2026 11:27 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Thu, 11 Jun 2026 11:27 PM IST
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फोटो - 11 रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भर्ती सर्जरी के बाद मरीज। स्रोत- मेडिकल कॉलेज।
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बांदा। पेड़ काटने वाली आरा मशीन का ब्लेड पेट में घुसने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। मेडिकल कॉलेज में करीब चार घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद मरीज की जान बचाई जा सकी। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि ब्लेड से उसका सीना, खाने की थैली दो जगह से और तीन पसलियां कट गईं थीं। इतना सब होने के बाद भी रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के सर्जन डॉ. आरसी अरुण और उनकी टीम ने मरीज की सर्जरी करके मरीज की जान बचा ली।
डॉ. आरसी अरुण ने बताया कि बबेरू के भदेहदू गांव निवासी कल्लू प्रजापति (49) मजदूरी करता है। कल्लू बीते दो जून को हैंड आरा मशीन लेकर गांव में ही किसी के यहां पेड़ काटने गया था। पेड़ काटते समय पेड़ की एक डाल कल्लू के ऊपर गिर गई। जिससे कल्लू हैंड आरा मशीन सहित नीचे गिर गया और कल्लू के पेट में और सीने में आरा मशीन का ब्लेड चल गई। जिससे कल्लू गंभीर घायल हो गया था। कल्लू को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां सर्जन डॉ. आरसी अरुण और उनकी टीम ने लगभग चार घंटे की सफल सर्जरी के बाद कल्लू की जान बचा ली। डॉ. आरसी अरुण ने बताया कि वह बांदा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में लगभग 17-18 वर्षों से सर्जरी कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में बांदा में इतनी बड़ी सर्जरी कभी नहीं हुई है। अगर ये सर्जरी किसी प्राइवेट अस्पताल में होती तो लाखों खर्च हो जाते। जबकि मेडिकल कॉलेज में सिर्फ सरकारी फीस में ही यह सर्जरी हो गई।
कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एसके कौशल ने कहा कि बांदा की ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी इतनी बड़ी सर्जरी संभव नहीं थी। यह कॉलेज के लिए गर्व की बात है। सर्जरी में डॉ. आरसी अरुण के अलावा, डॉ. तन्मय अग्रवाल, डॉ. यशराज छिल्लर, डॉक्टर पुष्पम, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. पंकज, डॉ. विनीत, डॉ. अजीत आदि रहे।
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डॉ. आरसी अरुण ने बताया कि बबेरू के भदेहदू गांव निवासी कल्लू प्रजापति (49) मजदूरी करता है। कल्लू बीते दो जून को हैंड आरा मशीन लेकर गांव में ही किसी के यहां पेड़ काटने गया था। पेड़ काटते समय पेड़ की एक डाल कल्लू के ऊपर गिर गई। जिससे कल्लू हैंड आरा मशीन सहित नीचे गिर गया और कल्लू के पेट में और सीने में आरा मशीन का ब्लेड चल गई। जिससे कल्लू गंभीर घायल हो गया था। कल्लू को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां सर्जन डॉ. आरसी अरुण और उनकी टीम ने लगभग चार घंटे की सफल सर्जरी के बाद कल्लू की जान बचा ली। डॉ. आरसी अरुण ने बताया कि वह बांदा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में लगभग 17-18 वर्षों से सर्जरी कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में बांदा में इतनी बड़ी सर्जरी कभी नहीं हुई है। अगर ये सर्जरी किसी प्राइवेट अस्पताल में होती तो लाखों खर्च हो जाते। जबकि मेडिकल कॉलेज में सिर्फ सरकारी फीस में ही यह सर्जरी हो गई।
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कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एसके कौशल ने कहा कि बांदा की ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी इतनी बड़ी सर्जरी संभव नहीं थी। यह कॉलेज के लिए गर्व की बात है। सर्जरी में डॉ. आरसी अरुण के अलावा, डॉ. तन्मय अग्रवाल, डॉ. यशराज छिल्लर, डॉक्टर पुष्पम, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. पंकज, डॉ. विनीत, डॉ. अजीत आदि रहे।
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