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Banda News: 11 साल पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में तीन आरोपियों को सजा
Sat, 13 Jun 2026 01:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 13 Jun 2026 01:07 AM IST
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बांदा। अपर सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट श्रीपाल सिंह की अदालत ने शुक्रवार को 11 साल पुराने गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में तीन आरोपियों को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जिसे अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक को एक-एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
यह मामला 14 जून 2014 को थाना बिसंडा के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह द्वारा दर्ज कराया गया था। मामले में गिरवां थाना क्षेत्र के जखनी गांव निवासी कुलदीप, बदौसा थाना क्षेत्र के दुबरियां पुरवा निवासी तैयब और हसीबुद्दीन को आरोपी बनाया गया था। इन तीनों पर एक संगठित गिरोह बनाकर अपराध करने और जनता में भय का माहौल बनाने का आरोप था। कुलदीप को गिरोह का लीडर और अन्य दो को सक्रिय सदस्य बताया गया था। आरोपियों के विरुद्ध कई आपराधिक प्राथमिकी दर्ज पंजीकृत थे और वे संगठित रूप से अपराध कर आर्थिक व भौतिक लाभ अर्जित करते थे।
उनके भय से जनता आतंकित थी और क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ था। मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक हरिशरण सिंह द्वारा की गई थी। विवेचना के दौरान आरोपियों का आपराधिक इतिहास, एफआईआर, गैंगचार्ट और अन्य दस्तावेज साक्ष्य के रूप में संकलित कर तीनों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। 25 जून 2015 को न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप विरचित किए थे। सुनवाई के दौरान छह गवाह पेश किए गए। गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने अपने 32 पृष्ठ के फैसले में कुलदीप, तैयब और हसीबुद्दीन को दोषी करार देते हुए उपरोक्त सजा सुनाई।
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यह मामला 14 जून 2014 को थाना बिसंडा के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह द्वारा दर्ज कराया गया था। मामले में गिरवां थाना क्षेत्र के जखनी गांव निवासी कुलदीप, बदौसा थाना क्षेत्र के दुबरियां पुरवा निवासी तैयब और हसीबुद्दीन को आरोपी बनाया गया था। इन तीनों पर एक संगठित गिरोह बनाकर अपराध करने और जनता में भय का माहौल बनाने का आरोप था। कुलदीप को गिरोह का लीडर और अन्य दो को सक्रिय सदस्य बताया गया था। आरोपियों के विरुद्ध कई आपराधिक प्राथमिकी दर्ज पंजीकृत थे और वे संगठित रूप से अपराध कर आर्थिक व भौतिक लाभ अर्जित करते थे।
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उनके भय से जनता आतंकित थी और क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ था। मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक हरिशरण सिंह द्वारा की गई थी। विवेचना के दौरान आरोपियों का आपराधिक इतिहास, एफआईआर, गैंगचार्ट और अन्य दस्तावेज साक्ष्य के रूप में संकलित कर तीनों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। 25 जून 2015 को न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप विरचित किए थे। सुनवाई के दौरान छह गवाह पेश किए गए। गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने अपने 32 पृष्ठ के फैसले में कुलदीप, तैयब और हसीबुद्दीन को दोषी करार देते हुए उपरोक्त सजा सुनाई।
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