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Barabanki News: बड़े भाग्य से मिलता है मानव का शरीर
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 05 Apr 2026 12:25 AM IST
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बाराबंकी। समर्थ साहेब जगजीवन दास की निर्वाण सप्तमी के मौके पर कोटवाधाम मंदिर प्रांगण में आयोजित अघविनास महापुराण कथा सुनाते हुए पं. आदित्य दास ने कहा कि चौरासी लाख योनि में भटकने के बाद बड़े भाग्य से मानव का शरीर मिलता है। इसके बाद लोग अपना पराया में जीवन बिता देते है। ईश्वर का सुमिरन और भजन पर ध्यान नही देते है।
उन्होंने कहा कि जब अंत समय आता है तो सब यहीं पर छूट जाता है और इंसान खाली हाथ चला जाता है। इसीलिए समर्थ साहेब जगजीवन दास ने लिखा है कि अगर मनुष्य को अंत में मोक्ष चाहिए तो वह अपने कर्म पर विचार करें। साथ ही श्री राम और भगवान कृष्ण का भजन करे। क्योंकि बाबा ने भी सत्यनाम को ही जीवन का सार माना है। अघविनास महापुराण की कथा सुनने के लिए अनेकों लोग मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि जब अंत समय आता है तो सब यहीं पर छूट जाता है और इंसान खाली हाथ चला जाता है। इसीलिए समर्थ साहेब जगजीवन दास ने लिखा है कि अगर मनुष्य को अंत में मोक्ष चाहिए तो वह अपने कर्म पर विचार करें। साथ ही श्री राम और भगवान कृष्ण का भजन करे। क्योंकि बाबा ने भी सत्यनाम को ही जीवन का सार माना है। अघविनास महापुराण की कथा सुनने के लिए अनेकों लोग मौजूद रहे।
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