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Barabanki News: अब एआई बताएगा कौन सा तालाब मछली पालन के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:43 AM IST
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बाराबंकी। जिले के तालाबों और नदियों की सेहत पर अब इंसानों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भी नजर रहेगी। जिले के 10566 तालाबों और गोमती सहित प्रमुख नदियों का सर्वे कर उनका डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा। इतना ही नहीं सेंसर, ड्रोन, जीपीएस, जीआईएस आधारित व्यवस्था से जल गुणवत्ता की रियल टाइम निगरानी होगी।
इसके जरिये यह भी पता लगाया जाएगा कि कौन सा तालाब मछली पालन के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त है और किस जलाशय में उत्पादन बढ़ाने की संभावना है। जिले में वर्तमान समय में 5500 से अधिक तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। अधिकांश तालाब पट्टे पर आवंटित हैं।
हालांकि कई स्थानों पर पानी की गुणवत्ता, गहराई या अन्य कारणों से उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिल पा रहा है। इसी को लेकर सरकार ने नई योजना बनाई है। मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार तालाबों का सर्वे सैटेलाइट बेसलाइन और जीआईएस मैपिंग तकनीक से किया जाएगा।
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इससे यह आकलन होगा कि किसी तालाब में कितनी जल क्षमता है, उसका वास्तविक क्षेत्रफल कितना है और वहां मत्स्य पालन की कितनी संभावना है। 0.2 हेक्टेयर या उससे बड़े तालाबों के पानी के नमूने लेकर वैज्ञानिक जांच भी कराई जाएगी। जल परीक्षण में पानी का पीएच स्तर, घुलित ऑक्सीजन, प्रदूषण और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की जांच होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि संबंधित तालाब में किस प्रजाति की मछलियां बेहतर उत्पादन दे सकती हैं। (संवाद)
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पहली बार नदियों की जल गुणवत्ता का बनेगा डाटा
तीन साल की इस योजना के तहत लखनऊ सीमा से अमेठी सीमा तक जिले से गुजरने वाली करीब 50 किलोमीटर लंबी गोमती नदी का भी विस्तृत डिजिटल सर्वे होगा। इसके अलावा कल्याणी समेत अन्य प्रमुख नदियों को भी इसमें शामिल किया गया है। पहली बार नदियों की जल गुणवत्ता और मत्स्य संसाधनों का एकीकृत डिजिटल डाटा तैयार किया जाएगा।
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प्रभावी रणनीति होगी तैयार
यह बेहद महत्वपूर्ण योजना है। डिजिटल सर्वे से यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन से तालाब मत्स्य पालन के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं और कितने ऐसे हैं, जिनमें सुधार की जरूरत है। इससे मत्स्य उत्पादन को लेकर प्रभावी रणनीति तैयार की जा सकेगी।
- अच्छेलाल, ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक
इसके जरिये यह भी पता लगाया जाएगा कि कौन सा तालाब मछली पालन के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त है और किस जलाशय में उत्पादन बढ़ाने की संभावना है। जिले में वर्तमान समय में 5500 से अधिक तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। अधिकांश तालाब पट्टे पर आवंटित हैं।
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हालांकि कई स्थानों पर पानी की गुणवत्ता, गहराई या अन्य कारणों से उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिल पा रहा है। इसी को लेकर सरकार ने नई योजना बनाई है। मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार तालाबों का सर्वे सैटेलाइट बेसलाइन और जीआईएस मैपिंग तकनीक से किया जाएगा।
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पहली बार नदियों की जल गुणवत्ता का बनेगा डाटा
तीन साल की इस योजना के तहत लखनऊ सीमा से अमेठी सीमा तक जिले से गुजरने वाली करीब 50 किलोमीटर लंबी गोमती नदी का भी विस्तृत डिजिटल सर्वे होगा। इसके अलावा कल्याणी समेत अन्य प्रमुख नदियों को भी इसमें शामिल किया गया है। पहली बार नदियों की जल गुणवत्ता और मत्स्य संसाधनों का एकीकृत डिजिटल डाटा तैयार किया जाएगा।
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प्रभावी रणनीति होगी तैयार
यह बेहद महत्वपूर्ण योजना है। डिजिटल सर्वे से यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन से तालाब मत्स्य पालन के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं और कितने ऐसे हैं, जिनमें सुधार की जरूरत है। इससे मत्स्य उत्पादन को लेकर प्रभावी रणनीति तैयार की जा सकेगी।
- अच्छेलाल, ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक