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Barabanki News: 200 क्विंटल से अधिक काला सोना देगा बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 31 Jan 2026 12:34 AM IST
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बाराबंकी। देशभर में अफीम यानी काला सोने की खेती के लिए पहचाने जाने वाले बाराबंकी जिले की धरती इस बार भी रिकॉर्ड उत्पादन की ओर बढ़ रही है। जिले और मंडल से जुड़े छह जिलों में इस बार करीब 200 क्विंटल से अधिक अफीम केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी। खास बात यह है कि अफीम की खेती करने वाले किसानों में करीब 97 प्रतिशत किसान अकेले बाराबंकी जिले के हैं। अफीम की यह खेती भारत सरकार के केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की कड़ी निगरानी में प्रदेश की 13 तहसीलों में कराई जा रही है।
बाराबंकी डिवीजन के कार्यालय से कुल छह जिलो लखनऊ, रायबरेली, अयोध्या, मऊ, गाजीपुर व बाराबंकी के किसानों के कुल् 5029 किसानों को अफीम खेती के लाइसेंस मिले हैं। इनमें से 4854 किसान सिर्फ बाराबंकी जिले के हैं। जिले में सबसे अधिक लाइसेंस नवाबगंज तहसील में जारी किए गए हैं, जहां 2988 किसानों को अफीम की खेती की अनुमति मिली है। वहीं हैदरगढ़ तहसील में 1380 किसानों को लाइसेंस दिए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक बाराबंकी जिला वर्षों से अफीम उत्पादन में अग्रणी रहा है, यही वजह है कि प्रदेश के छह जिले बाराबंकी स्थित जिला अफीम कार्यालय से जुड़े हुए हैं। इस बार विभाग ने 760 किसानों को स्वयं अफीम निकालकर विभाग को सौंपने का लाइसेंस दिया है, जबकि 4269 किसानों को जीपीएस आधारित लाइसेंस जारी किए गए हैं। स्वयं अफीम निकालने वाले किसानों को 10 एरी क्षेत्रफल से करीब सात किलो अफीम विभाग को सौंपनी होगी, जबकि अन्य किसानों सीपीएस श्रेणी का लाइसेंस मिला है जिसमें वह अफीम नहीं निकालकर सीधा डोडा जमा करेंगे। यानी यह सात किलो का आधी अफीम पैदा करेंगे।
फिलहाल अफीम की फसल अपने किशोरावस्था में है। नवंबर में बोई जाने वाली यह फसल अप्रैल तक पूरी तरह तैयार हो जाती है। खेतों में लहलहाती फसल को देखकर किसान उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यदि मौसम ने साथ दिया तो इस बार उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर रहेगा। (संवाद)
बाराबंकी दे रहा सबसे अधिक 12 से 14 प्रतिशत मार्फीन
अफीम की गुधवत्ता उसके अंदर से निकलने वाली मार्फीन पर तय होती है। जिला अफीम अधिकारी करुण बिलग्रामी ने बताया कि पूरे देश की बात करें तो गुणवत्ता के मामले में बाराबंकी की अफीम सबसे अच्छी है। पिछले सत्र में हुई खेती के बाद परीक्षण में यहां की अफीम में 12 से 14 प्रतिशत मार्फीन निकली है। जबकि अन्य डिवीजन में यह 10 प्रतिशत से कम है।
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अधिकारियों के मुताबिक बाराबंकी जिला वर्षों से अफीम उत्पादन में अग्रणी रहा है, यही वजह है कि प्रदेश के छह जिले बाराबंकी स्थित जिला अफीम कार्यालय से जुड़े हुए हैं। इस बार विभाग ने 760 किसानों को स्वयं अफीम निकालकर विभाग को सौंपने का लाइसेंस दिया है, जबकि 4269 किसानों को जीपीएस आधारित लाइसेंस जारी किए गए हैं। स्वयं अफीम निकालने वाले किसानों को 10 एरी क्षेत्रफल से करीब सात किलो अफीम विभाग को सौंपनी होगी, जबकि अन्य किसानों सीपीएस श्रेणी का लाइसेंस मिला है जिसमें वह अफीम नहीं निकालकर सीधा डोडा जमा करेंगे। यानी यह सात किलो का आधी अफीम पैदा करेंगे।
फिलहाल अफीम की फसल अपने किशोरावस्था में है। नवंबर में बोई जाने वाली यह फसल अप्रैल तक पूरी तरह तैयार हो जाती है। खेतों में लहलहाती फसल को देखकर किसान उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यदि मौसम ने साथ दिया तो इस बार उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर रहेगा। (संवाद)
बाराबंकी दे रहा सबसे अधिक 12 से 14 प्रतिशत मार्फीन
अफीम की गुधवत्ता उसके अंदर से निकलने वाली मार्फीन पर तय होती है। जिला अफीम अधिकारी करुण बिलग्रामी ने बताया कि पूरे देश की बात करें तो गुणवत्ता के मामले में बाराबंकी की अफीम सबसे अच्छी है। पिछले सत्र में हुई खेती के बाद परीक्षण में यहां की अफीम में 12 से 14 प्रतिशत मार्फीन निकली है। जबकि अन्य डिवीजन में यह 10 प्रतिशत से कम है।
