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Barabanki News: जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बेड फुल, ओपीडी में बेतहाशा भीड़
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में फुल वार्ड।
- फोटो : जिला अस्पताल की इमरजेंसी में फुल वार्ड।
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बाराबंकी। जिला अस्पताल की इमरजेंसी मरीजों से भरी पड़ी है। यहां पर एक भी बेड खाली नहीं है। इसके चलते ट्राॅमा सेंटर में इलाज के लिए आने वाले ज्यादातर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया जाता है या रेफर का परचा थमा दिया जाता है। इससे मरीज बेहाल हैं। शुक्रवार को ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। इससे इलाज कराने में सांस फूल गई। वहीं, प्रशिक्षु चिकित्सकों के छुट्टी पर होने के एक भी मरीज का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में 30 बेड हैं। इस समय यहां एक भी बेड खाली नहीं है। इमरजेंसी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को इलाज कराने आए दीपक मिश्रा की हालत गंभीर देख उन्हें भर्ती कर लिया गया, जबकि रामकुमार, साहिल और नृपेंद्र को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक आनंद ने बताया कि होली के बाद सबसे ज्यादा बुखार, पेटदर्द के अलावा सड़क हादसों में घायल हुए लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
उधर, ओपीडी में करीब 1747 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें सर्दी, जुकाम, बुखार और पेटदर्द के अलावा हड्डी रोग और त्वचारोग के मरीज सबसे ज्यादा रहे। इस दौरान हारून, प्रवेश, मालती, राकेश ने बताया कि सुबह नौ बजे से लाइन में लगे रहे। करीब सवा घंटे बाद परचा बन सका। वहीं, डेढ़ घंटे इंतजार के बाद चिकित्सक ने देखा। इसके बाद एक घंटे लाइन में लगे, तब दवा मिल सकी।
रोजाना होता है 100 अल्ट्रासाउंड
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने की वजह से प्रशिक्षु आने वाले मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं। यहां पर प्रतिदिन 90 से 100 मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं, लेकिन यहां पर तैनात प्रशिक्षु चिकित्सक के अवकाश पर चले जाने की वजह से शुक्रवार को एक भी मरीज का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। इसकी वजह से कई मरीजों को बाहर से महंगे शुल्क पर जांच करानी पड़ी। वहीं, पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए पहुंचे मरीजों को समय समाप्त हो गया कहकर अगले दिन बुलाया गया।
मौसम में बदलाव की वजह से मरीजों की संख्या बढ़ी है। लगातार बढ़ रहे मरीजों की वजह से ट्राॅमा इमरजेंसी के सभी बेड मरीजों से भर गए हैं। मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर सभी को इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. जेपी मौर्य, सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में 30 बेड हैं। इस समय यहां एक भी बेड खाली नहीं है। इमरजेंसी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को इलाज कराने आए दीपक मिश्रा की हालत गंभीर देख उन्हें भर्ती कर लिया गया, जबकि रामकुमार, साहिल और नृपेंद्र को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक आनंद ने बताया कि होली के बाद सबसे ज्यादा बुखार, पेटदर्द के अलावा सड़क हादसों में घायल हुए लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
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उधर, ओपीडी में करीब 1747 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें सर्दी, जुकाम, बुखार और पेटदर्द के अलावा हड्डी रोग और त्वचारोग के मरीज सबसे ज्यादा रहे। इस दौरान हारून, प्रवेश, मालती, राकेश ने बताया कि सुबह नौ बजे से लाइन में लगे रहे। करीब सवा घंटे बाद परचा बन सका। वहीं, डेढ़ घंटे इंतजार के बाद चिकित्सक ने देखा। इसके बाद एक घंटे लाइन में लगे, तब दवा मिल सकी।
रोजाना होता है 100 अल्ट्रासाउंड
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने की वजह से प्रशिक्षु आने वाले मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं। यहां पर प्रतिदिन 90 से 100 मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं, लेकिन यहां पर तैनात प्रशिक्षु चिकित्सक के अवकाश पर चले जाने की वजह से शुक्रवार को एक भी मरीज का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। इसकी वजह से कई मरीजों को बाहर से महंगे शुल्क पर जांच करानी पड़ी। वहीं, पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए पहुंचे मरीजों को समय समाप्त हो गया कहकर अगले दिन बुलाया गया।
मौसम में बदलाव की वजह से मरीजों की संख्या बढ़ी है। लगातार बढ़ रहे मरीजों की वजह से ट्राॅमा इमरजेंसी के सभी बेड मरीजों से भर गए हैं। मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर सभी को इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. जेपी मौर्य, सीएमएस जिला अस्पताल
