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Barabanki News: फर्जी जमानत पर कसा शिकंजा, एआई से हर केस की पड़ताल
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 13 Apr 2026 02:05 AM IST
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बाराबंकी। जिले में फर्जी दस्तावेजों के जरिये जमानत दिलाने वाले गिरोहों पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है। एक ही व्यक्ति की ओर से कई आरोपियों की जमानत लेने और एक ही संपर्क के जरिये जमानत कराने के मामलों के खुलासे के बाद पुलिस और अभियोजन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है।
एआई तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस को उम्मीद है कि इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर पूरे रैकेट का खुलासा किया जा सकेगा। बीते तीन वर्षों के सभी जमानत मामलों की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि जिले में जमानत कराने वाले संगठित गिरोह सक्रिय हैं। ये गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार कर अदालत को गुमराह करते हैं और आरोपियों को आसानी से जमानत दिला देते हैं। शहर कोतवाली और देवा क्षेत्र में सामने आए जमानत फर्जीवाड़े के मामलों ने पुलिस महकमे की चिंता बढ़ा दी है।
इसी के मद्देनजर एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने मॉनिटरिंग सेल को विशेष जिम्मेदारी सौंपते हुए व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। मॉनिटरिंग सेल अब अभियोजन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर हर एक जमानत केस का सत्यापन कर रही है। खासतौर पर उन मामलों पर फोकस किया जा रहा है, जहां एक ही व्यक्ति ने कई आरोपियों की जमानत ली है या एक ही मोबाइल नंबर और संपर्क के जरिए जमानत कराई गई है।
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केस एक- 26 अक्तूबर 2024 को शहर कोतवाली में सब इंस्पेक्टर की तहरीर पर 23 लोगों के खिलाफ जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया था।
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केस दो- दो दिसंबर 2024 को देवा कोतवाली के सब इंस्पेक्टर घनश्याम वर्मा की ओर से 11 लोगों पर फर्जी कागजात के जरिए जमानत लेने का मामला दर्ज कराया गया। इसमें संगीन मामलों में जमानत ली गई थी।
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केस तीन -24 नवंबर 2025 को को देवा कोतवाली पुलिस ने पिंटू नामक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसने 15 मामलों में कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अपराधियों की जमानत कराई गई थी।
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रिपोर्ट दर्ज कर भेजेंगे जेल
संगीन मामलों व शातिर अपराधियों की जमानत के सभी मामलों के निगरानी नियमित की जा रही है। मॉनिटरिंग सेल संदिग्ध जमानतदारों की पहचान कर सूची तैयार कर रही है। फर्जीवाड़ा का खुलासा होने पर रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई होगी।
- अर्पित विजयवर्गीय, एसपी
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एआई तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस को उम्मीद है कि इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर पूरे रैकेट का खुलासा किया जा सकेगा। बीते तीन वर्षों के सभी जमानत मामलों की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि जिले में जमानत कराने वाले संगठित गिरोह सक्रिय हैं। ये गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार कर अदालत को गुमराह करते हैं और आरोपियों को आसानी से जमानत दिला देते हैं। शहर कोतवाली और देवा क्षेत्र में सामने आए जमानत फर्जीवाड़े के मामलों ने पुलिस महकमे की चिंता बढ़ा दी है।
इसी के मद्देनजर एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने मॉनिटरिंग सेल को विशेष जिम्मेदारी सौंपते हुए व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। मॉनिटरिंग सेल अब अभियोजन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर हर एक जमानत केस का सत्यापन कर रही है। खासतौर पर उन मामलों पर फोकस किया जा रहा है, जहां एक ही व्यक्ति ने कई आरोपियों की जमानत ली है या एक ही मोबाइल नंबर और संपर्क के जरिए जमानत कराई गई है।
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केस एक- 26 अक्तूबर 2024 को शहर कोतवाली में सब इंस्पेक्टर की तहरीर पर 23 लोगों के खिलाफ जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया था।
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केस दो- दो दिसंबर 2024 को देवा कोतवाली के सब इंस्पेक्टर घनश्याम वर्मा की ओर से 11 लोगों पर फर्जी कागजात के जरिए जमानत लेने का मामला दर्ज कराया गया। इसमें संगीन मामलों में जमानत ली गई थी।
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केस तीन -24 नवंबर 2025 को को देवा कोतवाली पुलिस ने पिंटू नामक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसने 15 मामलों में कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अपराधियों की जमानत कराई गई थी।
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रिपोर्ट दर्ज कर भेजेंगे जेल
संगीन मामलों व शातिर अपराधियों की जमानत के सभी मामलों के निगरानी नियमित की जा रही है। मॉनिटरिंग सेल संदिग्ध जमानतदारों की पहचान कर सूची तैयार कर रही है। फर्जीवाड़ा का खुलासा होने पर रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई होगी।
- अर्पित विजयवर्गीय, एसपी