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Barabanki News: आज से प्रशासक बन प्रधान संभालेंगे गांवों की कमान
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 27 May 2026 01:27 AM IST
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बाराबंकी। जिले की 1155 ग्राम पंचायतों में साल 2021 में गठित हुई ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल रात 12 बजे समाप्त हो गया। बुधवार सुबह से ही अब प्रशासक बन प्रधान गांवों की कमान संभालेंगे।
अमूमन कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जाता था लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस बार निवर्तमान प्रधानों को ही अगले छह महीने या नए चुनाव होने तक प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है। 27 मई की सुबह से निवर्तमान प्रधान बतौर प्रशासक अपने-अपने गांवों के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
सरकार के इस फैसले से जहां प्रधान संगठनों में भारी उत्साह है। वहीं गांवों में चल रहे विकास कार्यों के अटकने का खतरा भी टल गया है। अब पुराने प्रधान ही प्रशासक बन रहे हैं, जिससे विकास कार्यों में कोई रुकावट नहीं आएगी।
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प्रशासक के रूप में क्या होंगे अधिकार और पाबंदियां
भले ही प्रधान अब प्रशासक के तौर पर काम करेंगे, लेकिन इस बार उनके पर कतरे गए हैं। डीपीआरओ नितेश भोंडेले ने बताया कि प्रधान प्रशासक के तौर पर गांव के रूटीन और दैनिक कार्य जैसे साफ-सफाई, मनरेगा के काम, पेयजल आपूर्ति आदि को सुचारू रूप से संचालित रख सकेंगे।
हालांकि कोई भी नया बड़ा नीतिगत या वित्तीय निर्णय प्रशासक अपने स्तर पर अकेले नहीं ले पाएंगे। गांव के विकास के लिए कोई बहुत जरूरी या आपातकालीन नीतिगत फैसला लेना ही पड़ा तो उसका प्रस्ताव जिला अधिकारी को भेजा जाएगा, जिस पर अनुमति मिलने के बाद ही उस काम को अमलीजामा पहनाया जा सकेगा।
अमूमन कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जाता था लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस बार निवर्तमान प्रधानों को ही अगले छह महीने या नए चुनाव होने तक प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है। 27 मई की सुबह से निवर्तमान प्रधान बतौर प्रशासक अपने-अपने गांवों के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
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सरकार के इस फैसले से जहां प्रधान संगठनों में भारी उत्साह है। वहीं गांवों में चल रहे विकास कार्यों के अटकने का खतरा भी टल गया है। अब पुराने प्रधान ही प्रशासक बन रहे हैं, जिससे विकास कार्यों में कोई रुकावट नहीं आएगी।
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भले ही प्रधान अब प्रशासक के तौर पर काम करेंगे, लेकिन इस बार उनके पर कतरे गए हैं। डीपीआरओ नितेश भोंडेले ने बताया कि प्रधान प्रशासक के तौर पर गांव के रूटीन और दैनिक कार्य जैसे साफ-सफाई, मनरेगा के काम, पेयजल आपूर्ति आदि को सुचारू रूप से संचालित रख सकेंगे।
हालांकि कोई भी नया बड़ा नीतिगत या वित्तीय निर्णय प्रशासक अपने स्तर पर अकेले नहीं ले पाएंगे। गांव के विकास के लिए कोई बहुत जरूरी या आपातकालीन नीतिगत फैसला लेना ही पड़ा तो उसका प्रस्ताव जिला अधिकारी को भेजा जाएगा, जिस पर अनुमति मिलने के बाद ही उस काम को अमलीजामा पहनाया जा सकेगा।