{"_id":"6a36cab5a18496fd590ee754","slug":"full-details-of-the-gold-and-silver-were-not-presented-at-the-trust-meetings-barabanki-news-c-97-1-ayo1002-152199-2026-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: ट्रस्ट की बैठकों में नहीं रखा जाता था सोने-चांदी का पूरा ब्योरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: ट्रस्ट की बैठकों में नहीं रखा जाता था सोने-चांदी का पूरा ब्योरा
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 20 Jun 2026 10:45 PM IST
विज्ञापन
राम मंदिर परिसर का दृश्य।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
नितिन मिश्र
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़े कथित अनियमितता प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहलू मिला है। सूत्रों के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हर तीसरे माह होने वाली बैठक में मंदिर की आय और नकद दान का विवरण प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन सोने-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य दान सामग्री की मात्रा, मूल्यांकन और उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत ब्योरा बैठक के एजेंडे का नियमित हिस्सा नहीं था।
ऐसे में एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वर्षों के दौरान प्राप्त हुई बहुमूल्य दान सामग्री का समुचित लेखा-जोखा किस स्तर पर रखा गया और उसकी निगरानी की व्यवस्था क्या थी। जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि एसआईटी को दान से संबंधित कई रसीदें और अभिलेख मिले हैं, जिनमें श्रद्धालुओं की ओर से सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं चढ़ाने का उल्लेख है। हालांकि कई वस्तुओं के संग्रह, भंडारण और अंतिम स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड अभी तक स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से जांच टीम संबंधित दस्तावेजों और जिम्मेदार कर्मियों से जानकारी जुटा रही है। इसी क्रम में दान पात्रों से निकली सामग्री के संकलन, सुरक्षित भंडारण, मूल्यांकन और बैंक अथवा अधिकृत एजेंसियों को हस्तांतरण की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है। इसको लेकर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पूछताछ की गई।
हार और चरण पादुका भी रिकॉर्ड में नहीं
-राममंदिर की स्थापना होने के बाद रामलला को चढ़ावा और भेंट खूब प्राप्त हुआ। लेकिन दान की चोरी का आरोप सामने आने के बाद लोग भी अब सामने आकर अपनी भेंट को लेकर आरोप लगाने लगे हैं। कुछ ऐसा ही मामला जौनपुर निवासी कारोबारी के सामने भी आया जो अब चर्चा में आ गया है। वर्ष 2025 में रामलला को चरण पादुका व हार चढ़ाने वाले अमाई निवासी अजय विश्वकर्मा को आजतक इसकी रसीद नहीं मिल सकी है। वह घर से 22 अक्टूबर 2025 को पैदल अयोध्या के लिए निकले थे। 30 अक्टूबर को सवा किलो चांदी का हार व तकरीबन 300 ग्राम वजनी चांदी की चरण पादुका श्रीराम को समर्पित किया था।
विज्ञापन
दान में मिला तीन क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारत सरकार की संस्था ''''मिंट'''' (टकसाल) को जांच और गलाने के लिए पहले चरण में 9.44 क्विंटल (944 किलो) चांदी दी थी। राम मंदिर के लिए भक्तों की ओर से दान किए गए सोने और चांदी की गुणवत्ता और मात्रा के मूल्यांकन के लिए ट्रस्ट ने यह फैसला लिया था। चंपत राय ने कुछ महीने पहले यह जानकारी सार्वजनिक करते हुए बताया था कि दान के रूप में कुल 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना प्राप्त हुआ है। पहले चरण में 9.44 क्विंटल (944 किलो) चांदी गलाने के लिए भेजी गई। उन्होंने यह भी बताया था कि जांच में चांदी की शुद्धता 95 फीसदी पाई गई थी। इन्हें ईंटों के रूप में बैंक में संरक्षित किया गया है।
अनुभवी हाथों में देना होगा राम मंदिर का प्रबंधन : नृपेंद्र
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक इंटरव्यू में फिर राम मंदिर के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में करीब 1500 लोग अनौपचारिक तरीके से काम कर रहे हैं। यह एक मिनी सिटी की तरह है। उन्होंने कहा कि उनका निश्चित मत है कि पूरा प्रबंधन अनुभवी लोगों के हाथ में सौंप दिया जाना चाहिए। प्रबंधन के अंदर कोई स्ट्रक्चर नहीं है। काम का कोई बंटवारा नहीं है। प्रबंधन को अनुभवी हाथों में देना होगा। जिम्मेदारी स्पष्ट करनी होगी। नियम बने, वेतन हो, ऐसा सुझाव है।
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़े कथित अनियमितता प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहलू मिला है। सूत्रों के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हर तीसरे माह होने वाली बैठक में मंदिर की आय और नकद दान का विवरण प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन सोने-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य दान सामग्री की मात्रा, मूल्यांकन और उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत ब्योरा बैठक के एजेंडे का नियमित हिस्सा नहीं था।
ऐसे में एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वर्षों के दौरान प्राप्त हुई बहुमूल्य दान सामग्री का समुचित लेखा-जोखा किस स्तर पर रखा गया और उसकी निगरानी की व्यवस्था क्या थी। जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि एसआईटी को दान से संबंधित कई रसीदें और अभिलेख मिले हैं, जिनमें श्रद्धालुओं की ओर से सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं चढ़ाने का उल्लेख है। हालांकि कई वस्तुओं के संग्रह, भंडारण और अंतिम स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड अभी तक स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से जांच टीम संबंधित दस्तावेजों और जिम्मेदार कर्मियों से जानकारी जुटा रही है। इसी क्रम में दान पात्रों से निकली सामग्री के संकलन, सुरक्षित भंडारण, मूल्यांकन और बैंक अथवा अधिकृत एजेंसियों को हस्तांतरण की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है। इसको लेकर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पूछताछ की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
हार और चरण पादुका भी रिकॉर्ड में नहीं
-राममंदिर की स्थापना होने के बाद रामलला को चढ़ावा और भेंट खूब प्राप्त हुआ। लेकिन दान की चोरी का आरोप सामने आने के बाद लोग भी अब सामने आकर अपनी भेंट को लेकर आरोप लगाने लगे हैं। कुछ ऐसा ही मामला जौनपुर निवासी कारोबारी के सामने भी आया जो अब चर्चा में आ गया है। वर्ष 2025 में रामलला को चरण पादुका व हार चढ़ाने वाले अमाई निवासी अजय विश्वकर्मा को आजतक इसकी रसीद नहीं मिल सकी है। वह घर से 22 अक्टूबर 2025 को पैदल अयोध्या के लिए निकले थे। 30 अक्टूबर को सवा किलो चांदी का हार व तकरीबन 300 ग्राम वजनी चांदी की चरण पादुका श्रीराम को समर्पित किया था।
दान में मिला तीन क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारत सरकार की संस्था ''''मिंट'''' (टकसाल) को जांच और गलाने के लिए पहले चरण में 9.44 क्विंटल (944 किलो) चांदी दी थी। राम मंदिर के लिए भक्तों की ओर से दान किए गए सोने और चांदी की गुणवत्ता और मात्रा के मूल्यांकन के लिए ट्रस्ट ने यह फैसला लिया था। चंपत राय ने कुछ महीने पहले यह जानकारी सार्वजनिक करते हुए बताया था कि दान के रूप में कुल 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना प्राप्त हुआ है। पहले चरण में 9.44 क्विंटल (944 किलो) चांदी गलाने के लिए भेजी गई। उन्होंने यह भी बताया था कि जांच में चांदी की शुद्धता 95 फीसदी पाई गई थी। इन्हें ईंटों के रूप में बैंक में संरक्षित किया गया है।
अनुभवी हाथों में देना होगा राम मंदिर का प्रबंधन : नृपेंद्र
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक इंटरव्यू में फिर राम मंदिर के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में करीब 1500 लोग अनौपचारिक तरीके से काम कर रहे हैं। यह एक मिनी सिटी की तरह है। उन्होंने कहा कि उनका निश्चित मत है कि पूरा प्रबंधन अनुभवी लोगों के हाथ में सौंप दिया जाना चाहिए। प्रबंधन के अंदर कोई स्ट्रक्चर नहीं है। काम का कोई बंटवारा नहीं है। प्रबंधन को अनुभवी हाथों में देना होगा। जिम्मेदारी स्पष्ट करनी होगी। नियम बने, वेतन हो, ऐसा सुझाव है।