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Barabanki News: झोलाछाप के इलाज से बुखार पीड़ित बालिका की मौत
Thu, 13 Aug 2026 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 13 Aug 2026 12:01 AM IST
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सिद्धौर। असंद्रा के मोहम्मदपुर चडी सिंह में झोलाछाप के इंजेक्शन लगाने के कुछ देर बाद बुखार व संक्रमण से पीड़ित एक 12 वर्षीय बालिका की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
गांव निवासी अखिलेश कुमार की बेटी नंदिनी के पैर में कुछ दिन पहले चोट लग गई थी। पैर में संक्रमण फैलने से उसे बुखार आने लगा। बुधवार को परिजन उसे कोपवा निवासी मनोज कुमार वर्मा के हेल्थ केयर क्लीनिक ले गए। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने बच्ची को इंजेक्शन लगाया। कुछ ही देर बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई। इसके बाद परिजन बेटी को लेकर सीएचसी सिद्धौर पहुंचे, जहां परीक्षण के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। नंदिनी की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। थाना प्रभारी अनिल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि झोलाछाप के खिलाफ जांच के लिए सीएचसी अधीक्षक को निर्देशित किया गया है। क्लिनिक बिना पंजीकरण के संचालित किया जा रहा है तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अवैध क्लीनिक और अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
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गलत इलाज से हो चुकी है कई की मौत
- 25 जून को जहांगीराबाद के कबीरपुर निवासी रामानंद (50) की झोलाछाप के इलाज से मौत हो गई। वह पेट दर्द से परेशान थे।
- 28 जून को हैदरगढ़ कस्बे के मोहल्ला ठाकुरद्वारा में झोलाछाप के इलाज से लोहिया मोहल्ला निवासी कल्लू हाशमी के डेढ़ साल के मासूम बेटे हसनैन की मौत हो गई। हसनैन के तीन अन्य भाई बहनों की हालत बिगड़ गई। चारों बच्चे शरीर में दाने निकलने से परेशान थे।
- 11 जुलाई को दरियाबाद के कयामपुर गांव में झोलाछाप के गलत इलाज से ढाई साल के अयांश की मौत हो गई थी। बच्चा सर्दी बुखार से पीड़ित था।
मौत के बाद चेतता है स्वास्थ्य विभाग
झोलाछाप गांव-गांव में सक्रिय हैं। कस्बों में बिना पंजीयन अस्पताल व क्लीनिक चलाने वाले भी इसी श्रेणी में आते हैं। इनकी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान भी चलाया लेकिन उसका असर नहीं दिख रहा है। गलत इलाज से कई लोगों की जान जाने के बावजूद झोलाछापों पर लगाम कसने में विभागीय अफसर उदासीन बने हैं। सिद्धौर में सीएचसी प्रभारी डॉ. हरप्रीत सिंह ने सादुल्लापुर स्थित आर्यन हॉस्पिटल और सेमरावा के आरएम हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था। वहां कोई डॉक्टर या स्टाफ नहीं मिला और कागज भी नहीं थे। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और दोनों हॉस्पिटल बिना खौफ चल रहे हैं।
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गांव निवासी अखिलेश कुमार की बेटी नंदिनी के पैर में कुछ दिन पहले चोट लग गई थी। पैर में संक्रमण फैलने से उसे बुखार आने लगा। बुधवार को परिजन उसे कोपवा निवासी मनोज कुमार वर्मा के हेल्थ केयर क्लीनिक ले गए। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने बच्ची को इंजेक्शन लगाया। कुछ ही देर बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई। इसके बाद परिजन बेटी को लेकर सीएचसी सिद्धौर पहुंचे, जहां परीक्षण के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। नंदिनी की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। थाना प्रभारी अनिल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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इस संबंध में सीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि झोलाछाप के खिलाफ जांच के लिए सीएचसी अधीक्षक को निर्देशित किया गया है। क्लिनिक बिना पंजीकरण के संचालित किया जा रहा है तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अवैध क्लीनिक और अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
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गलत इलाज से हो चुकी है कई की मौत
- 25 जून को जहांगीराबाद के कबीरपुर निवासी रामानंद (50) की झोलाछाप के इलाज से मौत हो गई। वह पेट दर्द से परेशान थे।
- 28 जून को हैदरगढ़ कस्बे के मोहल्ला ठाकुरद्वारा में झोलाछाप के इलाज से लोहिया मोहल्ला निवासी कल्लू हाशमी के डेढ़ साल के मासूम बेटे हसनैन की मौत हो गई। हसनैन के तीन अन्य भाई बहनों की हालत बिगड़ गई। चारों बच्चे शरीर में दाने निकलने से परेशान थे।
- 11 जुलाई को दरियाबाद के कयामपुर गांव में झोलाछाप के गलत इलाज से ढाई साल के अयांश की मौत हो गई थी। बच्चा सर्दी बुखार से पीड़ित था।
मौत के बाद चेतता है स्वास्थ्य विभाग
झोलाछाप गांव-गांव में सक्रिय हैं। कस्बों में बिना पंजीयन अस्पताल व क्लीनिक चलाने वाले भी इसी श्रेणी में आते हैं। इनकी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान भी चलाया लेकिन उसका असर नहीं दिख रहा है। गलत इलाज से कई लोगों की जान जाने के बावजूद झोलाछापों पर लगाम कसने में विभागीय अफसर उदासीन बने हैं। सिद्धौर में सीएचसी प्रभारी डॉ. हरप्रीत सिंह ने सादुल्लापुर स्थित आर्यन हॉस्पिटल और सेमरावा के आरएम हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था। वहां कोई डॉक्टर या स्टाफ नहीं मिला और कागज भी नहीं थे। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और दोनों हॉस्पिटल बिना खौफ चल रहे हैं।