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Barabanki News: चेक लौटाने में बैंक को देना होगा तीन लाख रुपये मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 28 May 2026 01:51 AM IST
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बाराबंकी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा से 30.52 लाख रुपये का चेक तकनीकी कारण बताकर लौटाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बैंक को तीन लाख रुपये मुआवजा समेत अन्य मदों में भुगतान करने का आदेश दिया है।
परिवाद के अनुसार, 27 जून 2024 को एलआईसी फाइनेंस के ऋण खाते में 30,52,571 रुपये जमा करने के लिए एसबीआई का चेक दिया था। बैंक ने चेक को पहले स्वीकार कर लिया, लेकिन बाद में टी-139 चेक नाट इश्यूड टिप्पणी के साथ वापस कर दिया। चेक लौटाए जाने से ऋण की किस्त समय पर जमा नहीं हो सकी।
भुगतान सुनिश्चित करने के लिए परिवादी को डिमांड ड्राफ्ट बनवाना पड़ा, जिसमें उसे 7,652 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। मामले में बैंक की ओर से तकनीकी खामी और चेक की डिटेल अपलोड न होने का तर्क दिया गया, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि बैंक की लापरवाही से उपभोक्ता को आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ी।
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आयोग ने कहा कि चेक संबंधित बैंक का ही था और यदि किसी प्रकार का संदेह था तो शाखा स्तर पर सत्यापन कराया जाना चाहिए था। इस आदेश में बैंक को 7,652 रुपये अतिरिक्त खर्च की राशि परिवाद दायर करने की तिथि से भुगतान तक आठ प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा मुआवजे के तीन लाख रुपये, वाद व्यय के लिए 10 हजार रुपये तथा अधिवक्ता शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है। निर्धारित 45 दिन में भुगतान न होने पर पूरी राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
परिवाद के अनुसार, 27 जून 2024 को एलआईसी फाइनेंस के ऋण खाते में 30,52,571 रुपये जमा करने के लिए एसबीआई का चेक दिया था। बैंक ने चेक को पहले स्वीकार कर लिया, लेकिन बाद में टी-139 चेक नाट इश्यूड टिप्पणी के साथ वापस कर दिया। चेक लौटाए जाने से ऋण की किस्त समय पर जमा नहीं हो सकी।
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भुगतान सुनिश्चित करने के लिए परिवादी को डिमांड ड्राफ्ट बनवाना पड़ा, जिसमें उसे 7,652 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। मामले में बैंक की ओर से तकनीकी खामी और चेक की डिटेल अपलोड न होने का तर्क दिया गया, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि बैंक की लापरवाही से उपभोक्ता को आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ी।
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